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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

विश्वनाथ प्रसाद तिवारी

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thumb|विश्वनाथ प्रसाद तिवारी डॉ॰ विश्वनाथ प्रसाद तिवारी (जन्म २० जून १९४०) प्रसिद्ध हिन्दी साहित्यकार हैं और २०१३ से २०१७ तक की अवधि के लिए साहित्य अकादमी के अध्यक्ष रहे हैं। इस पद पर निर्वाचित होने वाले वे हिंदी के प्रथम लेखक हैं I अकादेमी ने उन्हें महत्तर सदस्य बना कर अपना सवोच्च सम्मान दिया है। २०२३ में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया I http://sahitya-akademi.gov.in/sahitya-akademi/aboutus/about_h.jsp संग्रहीत प्रति 4 अगस्त 2014 https://web.archive.org/web/20161114044812/http://sahitya-akademi.gov.in/sahitya-akademi/aboutus/about_h.jsp 14 नवंबर 2016 dead वे गोरखपुर से प्रकाशित होने वाली 'दस्तावेज' नामक साहित्यिक त्रैमासिक पत्रिका के संस्थापक-संपादक हैं। यह पत्रिका रचना और आलोचना की विशिष्ट पत्रिका है, जो 1978 से नियमित प्रकाशित हो रही है। सन् २०११ में उन्हें व्यास सम्मान तथा 2019 में ज्ञानपीठ का मूर्तिदेवी सम्मान प्रदान किया गया। परिचय 20 जून 1940 को कुशीनगर के रायपुर भैंसही-भेडिहारी गांव में जन्मे आचार्य विश्वनाथ प्रसाद तिवारी एक लोकप्रिय शिक्षक भी रहे। प्रो॰ तिवारी गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के अध्यक्ष पद से वर्ष 2001 में सेवानिवृत्त हुए। आचार्य विश्वनाथ प्रसाद तिवारी साहित्य के अनवरत सहज साधक हैं। उन्होंने गांव की धूल भरी पगडण्डी से इंग्लैण्ड, मारीशस, रूस, नेपाल, अमरीका, नीदरलैण्ड, जर्मनी, फ्रांस, लक्जमबर्ग, बेल्जियम, चीन, कनाडा, दक्षिण कोरिया, आस्ट्रिया, जापान और थाईलैण्ड की जमीन नापी है। इन्होनें उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के कई सम्मान हासिल किये। रूस की राजधानी मास्को में साहित्य के प्रतिष्ठित पुश्किन सम्मान से नवाजे गये। उन्हें उत्तर प्रदेश की सरकार ने शिक्षक श्री सम्मान दिया। उन्हें उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा साहित्य भूषण सम्मान, हिंदी गौरव सम्मान , केंद्रीय हिंदी संस्थान द्वारा महापंडित सांकृत्यायन सम्मान, महादेवी वर्मा गोइन्का सम्मान, भारतीय भाषा परिषद का कृति सम्मान, मध्य प्रदेश का मैथिलीशरण गुप्त सम्मान, उड़ीसा का गंगाधर मेहर राष्ट्रीय कविता सम्मान, बिहार का डॉ राजेंद्र प्रसाद शिखर सम्मान मिल चुका है | उनके द्वारा संपादित पत्रिका 'दस्तावेज' को सरस्वती सम्मान भी मिल चुका है। उनके कृतित्व पर अनेक विश्वविद्यालयों द्वारा शोध उपाधियाँ प्रदान की गई हैं तथा अनेक आलोचना पुस्तकें प्रकाशित हैं। सरल एवं सहज व्यक्तित्व के धनी प्रोफेसर तिवारी साहित्य के साधना में आज भी अपना बहुमूल्य योगदान दे रहे हैं। रचनाएँ उनका रचनाकर्म देश और भाषा की सीमायें तोड़ता है। उड़िया अनुवाद के रूप में इनकी कविताओं के चार संकलन प्रकाशित हुए। हजारी प्रसाद द्विवेदी पर लिखी इनकी आलोचना पुस्तक का गुजराती और मराठी भाषाओं में अनुवाद हुआ है। इसके अलावा रूसी, नेपाली, अंग्रेजी, मलयालम, पंजाबी, मराठी, बांग्ला, गुजराती, तेलुगु, कन्नड़, तमिल व असमिया में भी इनकी रचनाओं का अनुवाद हुआ है। 1978 से हिन्दी की साहित्यिक पत्रिका 'दस्तावेज' का लगातार संपादन-प्रकाशन कर रहे हैं। 'दस्तावेज' के लगभग दो दर्जन विशेषांक प्रकाशित हुए हैं, जो ऐतिहासिक महत्व के हैं। उनके शोध व आलोचना के 13 ग्रंथ, 7 कविता संग्रह, 04 यात्रा संस्मरण, तीन लेखक-संस्मरण व चार साक्षात्कार पुस्तक प्रकाशित हो चुकी है। उन्होंने हिन्दी के कवियों, आलोचकों पर केन्द्रित 20 अन्य पुस्तकों का सम्पादन किया है। उनकी डायरी (दिनरैन) और "धावमानसमय" आत्मकथा (अस्ति और भवति ) भी प्रकाशित हो चुकी है | इनकी आत्मकथा का कई भाषाओं में अनुवाद हुआ है I सन्दर्भ इन्हें भी देखें डॉ विश्वनाथ त्रिपाठी श्रेणी:हिन्दी पत्रकार श्रेणी:हिन्दी कवि श्रेणी:हिंदी आलोचक श्रेणी:हिंदी पत्रिका संपादक श्रेणी:1940 में जन्मे लोग श्रेणी:जीवित लोग श्रेणी:हिंदी निबंधकार