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चुम्बक
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right|thumb|200px|घोड़े के नाल के आकार के एक चुम्बक के ध्रुवों से चिपका लोहे का एक टुकड़ा
right|thumb| एक छड़ चुम्बक के चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा आकर्षित हुई लौह-धुरि (iron-filings)
thumb| एक परिनालिका (सॉलिनॉयड) द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय बल रेखाएँ
right|thumb|250px|फेराइट चुम्बक
चुम्बक वह पदार्थ या वस्तु है जो चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है। चुम्बकीय क्षेत्र अदृश्य होता है और चुम्बक के दो प्रमुख गुण - चुम्बक लोहे को अपनी ओर आकर्षित करता है और दूसरा, इसके सम्पर्क में रहने से यह नर्वस सिस्टम में कुंडलिनी के इलेक्ट्रॉनिक विकिरण को बढ़ाता है, विशेष तौर पर जब कुंडलिनी पहले से ही सक्रिय हो तो विकिरण और भी बढ़ जाता है।https://hiwiki.iiit.ac.in/index.php/%E0%A4%9A%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AC%E0%A4%95 चुम्बक - विकिपीडिया hiwiki.iiit.ac.in hi 2025-09-17जून 2026 InternetArchiveBot https://bharatdiscovery.org/india/%E0%A4%9A%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AC%E0%A4%95 चुम्बक - भारतकोश, ज्ञान का हिन्दी महासागर bharatdiscovery.org 2025-09-17
चुम्बक के प्रकार
कुछ चुम्बक प्राकृतिक रूप से भी पाये जाते हैं किन्तु अधिकांश चुम्बक निर्मित किये जाते हैं। निर्मित किये गये चुम्बक दो तरह के हो सकते हैं:
स्थायी चुम्बक
इनके द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र बिना किसी वाह्य विद्युत धारा के ही प्राप्त होता है और सामान्य परिस्थितियों में बिना किसी कमी के बना रहता है। (इन्हें विचुम्बकित (डी-मैग्नेटाइज) करने के लिये विशेष व्यवस्था करनी पड़ती है।) ये तथाकथित कठोर (हार्ड) चुम्बकीय पदार्थ से बनाये जाते हैं। ये भी कई प्रकार के होते हैं-
धात्विक तत्त्व चुम्बक (जैसे लोहे के कुछ अयस्क, कोबाल्ट, निकल आदि)
मिश्र या कम्पोजिट (फेराइट चुम्बक, एल्निको चुम्बक)
विरल मृदा चुम्बक (समेरियम-कोबल्ट चुम्बक, निओडिमियम-आइरन-बोरॉन चुम्बक)
एकल-अणु चुम्बक तथा एकल-शृंखला चुम्बक
नैनो-संरचना चुम्बक
चुम्बक का प्रकार Brr (T) Hc (kA/m) BHmax (kJ/m³) TC (°C) टिप्पणीNd2Fe14B (सिंटर किया हुआ)1,0–1,4750–2000200–440310–400 सबसे शक्तिशाली स्थायी चुम्बकNd2Fe14B (bonded)0,6–0,7600–120060–100310–400 SmCo5 (सिंटर किया हुआ)0,8–1,1600–2000120–200720 विकिरण से खराब नहीं होतेSm(Co, Fe, Cu, Zr)7 (सिंटर किया हुआ)0,9–1,15450–1300150–240800 विकिरण से खराब नहीं होतेअल्निको (Alnico) (सिंटर किया हुआ)0,6–1,427510–88700–860 आसानी से विचुंबकित हो जाते हैं।Sr-फेराइट (सिंटर किया हुआ)0,2–0,4100–30010–40450 सबसे सस्ते चुम्बक इस्पात 0.001 से 0.02 6 से 19 -- 750 पुराने चुम्बक
अस्थायी चुम्बक
विद्युत्चुम्बकत्व विद्युत चुम्बक
ये चुम्बक तभी चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करते हैं जब इनके प्रयुक्त तारों से होकर विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है। धारा के समाप्त करते ही इनका चुम्बकीय क्षेत्र लगभग शून्य हो जाता है। इसी लिये इन्हें विद्युतचुम्बक (एलेक्ट्रोमैग्नेट) भी कहते हैं। इनमें किसी तथाकथित मृदु या नरम (सॉफ्ट) चुम्बकीय पदार्थ का उपयोग किया जाता है जिसके चारों ओर तार की कुण्डली लपेटकर उसमें विद्युत धारा प्रवाहित करने से चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। कण त्वरकों में इनका बहुत उपयोग होता है, जैसे द्विध्रुव चुम्बक कणों को मोड़ने के काम आते हैं और चतुर्ध्रुवी चुम्बक (क्वाड्रूपोल) आवएशित कणों की बीम को फोकस करने के काम आती है।
चुम्बकों को उनके ध्रुवों की संख्या के आधार पर भी वर्गीकृत कर सकते हैं। इस आधार पर चुम्बक द्विध्रुवी, चतुर्ध्रुवी, षट्ध्रुवी, आदि होते हैं। इसी प्रकार, यदि विद्युतचुम्बक का निर्माण अतिचालक तारों से किया गया है तो ऐसे चुम्बक को 'अतिचालक चुम्बक' कहते हैं अन्यथा सामान्य चालक तारों से निर्मित चुम्बकों को 'सामान्य चालक चुम्बक' (नॉर्मल कंडक्टिंग मैग्नेट) कहा जाता है।
चुम्बक की संरचना
चुम्बकीय पदार्थ
चुम्बकों के प्रमुख उपयोग
thumb|250px|कम्प्यूटर की हार्ड डिस्क पर पतली चुम्बकीय परत चढाकर उस पर आंकड़े संरक्षित किये जाते हैं।
thumb|भारी खनिजों के लिये चुम्बकीय हस्त छन्नी|पाठ=1
right|thumb|300px|कण त्वरक में आवेश पुंज को फोकस करने के लिये प्रयुक्त चतुर्ध्रुवी चुम्बक (क्वाड्रुपोल मैग्नेट)
चुम्बकीय रिकार्डिंग के विभिन्न माध्यम : फ्लॉपी डिस्क, हार्ड डिस्क, ऑडियो टेप, आदि
क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, एटीएम कार्ड आदि में एक चुम्बकीय पट्टी उपयोग में लायी जाती है। इस पट्टी पर कुछ आंकड़े और सूचनाएँ दर्ज की गयी होती हैं।
परम्परागत टीवी एवं कम्प्यूटर के मॉनिटर में : एलेक्ट्रॉन बीम को उपर-नीचे एवं अगल-बगल मोडने के लिये विद्युत्चुम्बक का प्रयोग होता है। इसी से छबि-निर्माण सम्भव हो पाता है।
लाउडस्पीकर एवं माइक्रोफोन में
विद्युत मोटर एवं विद्युत जनित्र में
मेटलवर्किंग में प्रयुक्त चक में - वस्तुओं को थामकर रखने हेतु
चुम्बकीय दिक्सूचक (कम्पास या कुतुबनुमा) में - इसमें एक हल्का सा स्थायी चुम्बक होता है जो क्षैतिज तल में घूमने के लिये स्वतन्त्र होता है। यह उत्तर-दक्षिण दिशा में ही स्थिर होता है और इस प्रकार दिशा बताने में सहायता करता है।
बहुत से खिलौनो में
चुम्बकों की सहायता से ऐसी चीजों को खोजने, पकड़ने एवं इकट्ठा करने में मदद मिलती है जो बहुत छोटी हैं, जिन तक हाथ नही जा सकता, या जिन्हें हाथ से पकड़ना कठिन है। (लोहे की कीलें, स्टैपुल पिनें, कागज की क्लिपें आदि)
किसी कबाड़ से चुम्बकीय पदार्थों (लोहा, निकिल, स्टील आदि) एवं अचुम्बकीय पदार्थों (एल्युमिनियम, ताँबा, आदि) को अलग करने हेतु।
चुम्बकीय लेविटेशन पर आधारित यातायात के लिये
रिले, कान्टैक्टर एवं सर्किट ब्रेकर में
कण त्वरकों में आवेशित कणों को मोड़ने, फोकस करने आदि के लिये (द्विध्रुवी चुम्बक, अनडुलेटर देखें )
मास-स्पेक्ट्रोमीटर में - अलग-अलग द्रव्यमान के कण चुम्बकीय क्षेत्र से गुजरने के बाद परदे पर अलग-अलग स्थान पर जाकर टकराते हैं। टकराये गये स्थान के निर्देशांक से उस कण के भार के बारे में पता चलता है।
चुम्बकीय बीयरिंग में - शाफ्ट बिना किसी चीज को स्पर्श किये हुए ही घूमता रहता है। इससे घर्षण में उर्जा का व्यय नहीं होता व सामान घिसता नहीं है।
विद्युत क्लच में
चुम्बकीय क्रेनों में
किसी लौहचुम्बकीय अयस्क के पृथक्करण में
चुम्बकीय पदार्थों के आविष्कार/विकास का इतिहास
मनुष्य का स्थायी चुंबकत्व से परिचय आज से कई शताब्दियाँ पहले हो चुका था। ईसा पूर्व छठी शताब्दी में यूनानी दार्शनिक थेल्स ने चुंबकत्व का सबसे प्रारंभिक अवलोकन किया था। किन्तु चुंबकत्व की आधुनिक समझ का आरम्भ सन 1600 में हुई।Magnetic Materials: History
1600: डॉ. विलियम गिल्बर्ट ने डि मैग्नेट (De Magnete) में चुंबकत्व पर पहला व्यवस्थित प्रयोग प्रकाशित किया।
1819: ऑर्स्टेड (Oerstead) ने अनजाने में विद्युत धारा और चुंबकत्व के बीच संबंध स्थापित किया, जब उन्होंने पाया कि विद्युत धारा ले जाने वाला तार दिक्सूचक सुई को विक्षेपित करता है।
1825: स्टर्जन (Sturgeon) ने विद्युत चुंबक का आविष्कार किया।
1880: वारबर्ग (Warburg) ने लोहे के लिए पहला हिस्टैरिसिस लूप (hysteresis loop) तैयार किया।
1895: क्यूरी का नियम (Curie law) प्रस्तावित किया गया।
1905: लैंग्विन (Langevin) ने पहली बार प्रतिचुम्बकत्व (diamagnetism) और अनुचुम्बकत्व (paramagnetism) के सिद्धांत की व्याख्या की।
1906: वीस (Weiss) ने लौहचुंबकत्व (ferromagnetic) सिद्धांत प्रस्तावित किया।
1920 का दशक: इलेक्ट्रॉन स्पिन और विनिमय अन्योन्यक्रिया (exchange interactions) से जुड़े सिद्धांतों के साथ चुंबकत्व के भौतिक विज्ञान का विकास हुआ; यही क्वांटम मैकेनिक्स''' की शुरुआत थी।
इन्हें भी देखें
विद्युतचुम्बकत्व
चुम्बकीय द्विध्रुव
फेराइट
चुम्बकीय पदार्थ
चुम्बकत्व
चुम्बकीय क्षेत्र
चुम्बकीय आघूर्ण
चुम्बकीय प्रोत्थापन
बाहरी कड़ियाँ
चुम्बक : परिभाषा, प्रकार, गुण, उपयोग https://web.archive.org/web/20210621230637/https://www.edutzar.in/magnet-in-hindi/ 21 जून 2021
Lectures given at the CAS course on: "MAGNETS" Bruges, Belgium, 16 - 25 जून 2009
Articles, tutorials and other educational information about magnets National High Magnetic Field Laboratory
Answers to several questions from curious kids about magnets
Magnetic units are discussed here
Kids Konnect - Magnets
सन्दर्भ
श्रेणी:भौतिकी
श्रेणी:चुम्बकत्व
श्रेणी:हिन्दी विकि डीवीडी परियोजना