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411 समाचार
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नुशूर वहीदी'

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नुशूर वहीदी (نشور وحیدی) के नाम से परिचित हफ़ीज़-उल-रहमान उर्दू भाषा के भारतीय कवि थे। प्रारंभिक जीवन 1912 में उत्तर प्रदेश के शेख़पुर, बलिया ज़िले में पैदा वहीदी के सात भाई-बहन थे। उनहोंने अपने घर में ही अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। वहीदी ने छोटी उम्र में ही कविताएँ लिखनी शुरू की थी और 13 साल की उम्र में वे अपने इलाक़े में कवि के तौर पर विख्यात थे।कुलदीप सलिल ऍफ़॰ A Treasury Of Urdu Poetry राजपाल ऐंड सन्ज़ 2008 978-81-7028-691-2 https://books.google.com/books?id=SYnxB4-pJRUC&pg=PA267 30 अप्रैल 2020 267 कार्य जीवन विख्यात कवि जिगर मुरादाबादी ने कविता वचन से थोड़ी देर विराम लेते समय नुशूर ने अपनी कविताएँ प्रस्तुत करने की अनुमति माँगी। उसी फ़ोरम में मोरादाबादी ने उनकी कविताओं की सराहना करने के बाद नुशूर ने साहित्यिक समूहों में ख्याति प्राप्त की। नुशूर को उर्दू काव्य के अंतिम रूमानी कवियों में से एक माना जाता है। उनहोंने कई उर्दू कविता संग्रह और सबाह-ए-हिंद नामक दर्शन से संबंधित ग्रंथ प्रकाशित किया। साहित्यिक समूहों में विख्यात होने के बावजूद उनहोंने तत्कालीन उभरता हुआ भारतीय फ़िल्म उद्योग में उनकी कविताओं के उपयोग करने की अनुमति नहीं दी। शायद इसी वजह से उन्हें अपने समकालीनों की तरह ख्याति प्राप्त नहीं हुई। निजी जीवन नुशूर और उनकी पत्नी के दो बेटे और दो बेटियाँ थीं। 1983 में नुशूर की मृत्यु हो गई। वे कवि के तौर पर इतने विख्यात थे कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उनके परिवार को उनकी श्रद्धांजलि का संदेश भेजा। उनके सम्मान में कानपुर में एक पार्क का नाम रखा गया। सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ http://www.milligazette.com/Archives/15022002/15022200211.htm Nushoor Wahedi Remembered 15 फ़रवरी 2002 द मिली गज़ेट श्रेणी:1912 में जन्मे लोग श्रेणी:बलिया के लोग श्रेणी:कानपुर के लोग श्रेणी:भारतीय मुस्लिम श्रेणी:१९८३ में निधन श्रेणी:उर्दू शायर