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चक्रायुध
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चक्रायुध प्राचीन भारत के कन्नौज राज्य का शासक था। संभवतः उसने आठवीं शताब्दी के अंतिम दो दशकों में शासन किया था। ७८३ ई के बाद किसी समय, जब कन्नौज, राष्ट्रकूट, गुर्जर-प्रतिहार राजपूत राजवंश और पाल वंश नरेशों के त्रिकोणयुद्ध का केंद्र था, चक्रायुध को कन्नौज का सिंहासन प्राप्त हुआ। कुछ विद्वान् अन्य प्रमाणों से ज्ञात वज्रायुध और इंद्रायुध नामक नरेशों के आधार पर एक आयुध वंश की कल्पना करते हें और चक्रायुध को उसका अंतिम शासक मानते हैं।
ऐतिहासिक उल्लेख
भागलपुर के एक अभिलेख से ज्ञात होता है कि पालवंशीय सम्राट् धर्मपाल ने इंद्रराज को, जो संभवत: इंद्रायुध था, पराजित कर महोदय (कन्नौज) का राज्य चक्रायुध को दे दिया। अभिलेख से यह ध्वनित होता है कि चक्रायुध इंद्रराज का संबंधी, संभवत: पुत्र था। इंद्रायुध शायद पालों के शुत्रु प्रतिहारनरेश वत्सराज के प्रभाव अथवा अधीनता में था। लखीमपुर के अभिलेख में धर्मपाल के द्वारा कान्यकुब्ज के सिंहासन पर संभवत: चक्रायुध के ही राज्याभिषेक का वर्णन है। उस अवसर पर कई देशों के नरेशों की उपस्थिति का उल्लेख है। उस काल के इतिहास में चक्रायुध का कोई गौरवपूर्ण स्थान नहीं है। उसका व्यक्तित्व अशक्त और पराश्रित सामंत का है। शीघ्र ही प्रतिहारनरेश नागभट्ट द्वितीय ने 'दूसरों पर आश्रय के कारण व्यक्त नीच प्रवृत्ति' के चक्रायुध को पराजित कर कन्नौज पर अधिकार कर लिया। धर्मपाल ने चक्रायुध के पक्ष में नागभट्ट का विरोध किया, किंतु नागभट्ट विजयी हुआ। नागभट्ट के दुर्भाग्य से इसी समय राष्ट्रकूटनरेश गोविंद तृतीय ने उत्तरी भारत पर आक्रमण किया। धर्मपाल और चक्रायुध स्वयमेव उपनत हो गए। आक्रमण के फलस्वरूप प्रतिहार साम्राज्य कुछ समय के लिये अशक्त हो गया तथा धर्मपाल और देवपाल ने पालों का प्रभुत्व स्थापित किया। किंतु इस संघर्ष के बाद चक्रायुध इतिहास के रंगमंच से लुप्त हो गया। उसके वंशजों के विषय में हमें कोई भी उल्लेख नहीं मिलता।
इन्हें भी देखें
श्रेणी:कन्नौज का राजा