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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

होन्या केंगले

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नाईक होन्या भागोजी केंगले भारत के महाराष्ट्र मे एक स्वतंत्रता सेनानी क्रांतिकारी थे जिन्होने महाराष्ट्र में अंग्रेजों के खिलाफ हथियार उठाए थे। केंगले का जन्म पुणे जिले मे आम्बेगांव तालुका के जम्भोरी गांव के एक किसान कोली परिवार मे हुआ। केंगले को बोम्बे का रोबिन हुड के नाम से जाना जाता था और ब्रिटिश सरकार ने केंगले के सर पर १००० रुपए का इनाम रखा हुआ था ज़िंदा या मुर्दा।https://books.google.co.in/books?id=QNA-AQAAIAAJ Histories for the Subordinated Hardiman David 2007 Seagull Books 978-1-905422-38-8 enhttps://books.google.co.in/books?id=DroEAQAAIAAJ Crime and Criminality in British India Yang Anand A. 1985 Association for Asian Studies 978-0-8165-0951-5 en नाईक होन्या भागोजी केंगले रॉबिन हुड ऑफ बोम्बे जम्भोरी, अम्वेगांव तालुका, पुणे, ब्रिटिश भारत जुलाई १८७६ भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन १००० रुपए जिंदा या मुर्दा हिन्दू कोली राघोजी भांगरे वंडकरी ब्रिटिश राजपत्रों के अनुसार केंगले काफी प्रचलित व्यक्ति था और उसने कई बार सरकारी खजाने को लुटकर ग़रीब लोगों मे बांटा था जिसके चलते ब्रिटिश अफसर उसे (रोबिन हुड ऑफ बोम्बे) बोलते थे तथा सरकार ने केंगले को डकैत घोषित कर दिया।https://books.google.co.in/books?id=jIbRhV00p6AC&dq=Honya+kenglia&source=gbs_navlinks_s Peasants and Imperial Rule: Agriculture and Agrarian Society in the Bombay Presidency 1850-1935 Charlesworth Neil 2002-07-04 Cambridge University Press 978-0-521-52640-1 en क्रांतिकारी गतिविधियों सन् १८७३ मे एक होन्या केंगले ने एक क्रांतिकारी समूह बनाया जिसे वंडकरी बुलाया जाता था और अंग्रेजों और उनके चमचों के खिलाफ जंग का एलान कर दिया। सबसे पहले केंगले ने साहूकारों के खिलाफ मोर्चा खोला क्योंकि साहूकार अंग्रेजों का साथ दे रहे थे और लोगों को पैसा उधार देकर उनकी जमीनों को हड़पने की कोशिश मे लगे हुए थे। केंगले ने लगातार पुणे, नाशिक, अहमदनगर और ठाणे के साहुकारों पर हमला किया और लुटे हुए माल को गरीब जनता मे बांटा दिया।https://books.google.co.in/books?id=UuJFAAAAYAAJ Agrarian Structure, Movements & Peasant Organisations in India: Maharashtra 2004 V.V. Giri National Labour Institute 978-81-7827-064-7 enhttps://books.google.co.in/books?id=HBFuAAAAMAAJ The History and Culture of the Indian People Majumdar Ramesh Chandra 1951 G. Allen 8 Unwin enhttps://books.google.co.in/books?id=WIAiAAAAMAAJ Tribal society in India: an anthropo-historical perspective Singh Kumar Suresh 1985 Manohar en साहुकारों ने अंग्रेजों का साथ नही छोड़ा और इसी तरह अंग्रेजों की सेना के बल पर अपना धंधा चलाए रखा जिसके चलते केंगले ने साहुकारों की नाक और कान काट दिए एवं घर जला दिए जिसके कारण गांव खाली हो गए। केंगले के हाथ लगा सारा माल गरीबों मे बांट दिया गया और ब्रिटिश सरकार ने केंगले को डकैत घोषित कर दिया और १००० रुपए का इनाम जिंदा या मुर्दा रखा। डकैत घोषित होने के पश्चात ही केंगले ने ब्रिटिश सरकार के सरकारी खजाने को लुट कर स्थानीय लोगों मे बांट दिए जिसके चलते केंगले स्थानीय बोलचाल में काफी प्रचलित हुआ। ब्रिटिश सरकार ने जगह-जगह केंगले के पोस्टर छपवाए और केंगले के साथीयों पर भी इनाम रख दिया। केंगले के साथी की महत्वता के हिसाब से २०० से लेकर ६०० तक का इनाम देने का वादा किया लेकिन किसी ने भी केंगले और उसके साथीयों की कोई जानकारी नही दी। ६०० रुपए सिर्फ केंगले के मुख्य साथी दादू दतिया के लिए थी और अन्य के लिए २००- ३०० थी।https://books.google.co.in/books?id=vIIIAAAAQAAJ&dq=Honya+koli&source=gbs_navlinks_s police reports of the bombay presidency including sinds 1875 en १८७४ मे ब्रिटिश सरकार ने केंगले को पकड़ने के लिए कर्नल स्कोट, मिस्टर डब्लू एफ सिनक्लेयर के नेतृत्व मे अंग्रेजी सेना भेजी लेकिन सरकार कुछ भी नही कर पाई। १८७६ मे मेजर एच डेनियल के नेतृत्व मे केंगले और सेना के बीच संघर्ष हुआ जिसमे केंगले को बंदी बना कर कचहरी में पेश किया गया और देशद्रोह का इल्ज़ाम लगाकर केंगले और उसके कुछ साथीयों को फांसी पर लटका दिया गया।https://books.google.co.in/books?id=E4tIAQAAMAAJ&dq=Honya+koli&source=gbs_navlinks_s Gazetteer of the Bombay Presidency Bombay (Presidency) 1885 Government central Press enhttps://books.google.co.in/books?id=WtDQDwAAQBAJ&dq=Honya+koli&source=gbs_navlinks_s MAHATMA JYOTIRAO PHULE- english Kulkarni-Pathare Dr Ravindra Thakur Translated From MARATHI to ENGLISH by Reshma 2020-02-17 Mehta Publishing House 978-93-5317-404-0 en संदर्भ