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नीला बौना
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खगोल भौतिकी में, नीला बौना (Blue dwarf) एक कम द्रव्यमान वाले लाल बौने तारे के विकास का एक सैद्धांतिक और भविष्योन्मुखी चरण है। यह तारा वर्तमान समय में पूरे ब्रह्मांड में कहीं भी अस्तित्व में नहीं है। खगोलीय गणनाओं के अनुसार, इस प्रकार के तारे का निर्माण तब होगा जब कोई लाल बौना तारा अपने हाइड्रोजन ईंधन के बड़े हिस्से को समाप्त कर चुका होगा। चूँकि कम द्रव्यमान वाले लाल बौनों का जीवनकाल हमारे ब्रह्मांड की वर्तमान आयु (13.8 अरब वर्ष) से हज़ारों गुना अधिक होता है, इसलिए ब्रह्मांड के इतिहास में अभी तक एक भी लाल बौना इस चरण तक नहीं पहुँच सका है।Adams Fred C. Laughlin Gregory A dying universe: the long-term fate and evolution of astrophysical objects Reviews of Modern Physics 69 2 1997 337-372 10.1103/RevModPhys.69.337"M dwarfs: Planet formation and long term evolution"
भौतिकी और कार्यप्रणाली
हमारा सूर्य जैसे सामान्य मुख्य अनुक्रम के तारों का केवल 'कोर' ही संवहन करता है, जिससे उनके कोर में हेलियम जमा हो जाता है और वे अंततः एक 'लाल दानव' में बदल जाते हैं। इसके विपरीत, 0.25 सौर द्रव्यमान से कम वाले लाल बौने तारे पूर्ण संवहनी होते हैं।
इसका अर्थ यह है कि उनके भीतर की गैस लगातार नीचे से ऊपर और ऊपर से नीचे घूमती रहती है। इस पूर्ण संवहन के कारण, तारे का हाइड्रोजन कभी भी केवल कोर में सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरा तारा अपने पूरे शरीर के हाइड्रोजन को ईंधन के रूप में उपयोग कर पाता है।"The end of the Main Sequence"
जैसे-जैसे ये तारे अपने हाइड्रोजन को धीरे-धीरे जलाते हैं, उनके भीतर का रासायनिक मिश्रण बदल जाता है और वे अधिक घने होने लगते हैं। पदार्थ के घने होने से तारे की अपारदर्शिता कम हो जाती है, जिससे उसके भीतर उत्पन्न होने वाली ऊर्जा और प्रकाश अधिक आसानी से बाहर निकल पाते हैं। इसके परिणामस्वरूप, तारे का आंतरिक और बाह्य तापमान बढ़ने लगता है और 'हर्ट्ज़स्प्रंग-रसेल आरेख' पर इसका रंग लाल से बदलकर नीला हो जाता है। तापमान बढ़ने के साथ-साथ इसकी चमक भी अस्थाई रूप से बढ़ जाती है।Laughlin Greg Bodenheimer Peter Adams Fred C. The End of the Main Sequence https://archive.org/details/sim_astrophysical-journal_1997-06-10_482_1/page/420 The Astrophysical Journal 482 1 1997 420-432 10.1086/304125
नीले बौने तारों की समयरेखा ब्रह्मांड के सुदूर भविष्य, यानी 'तारकीय युग' के अंत से जुड़ी है।
एक सामान्य लाल बौने तारे (जैसे 0.1 सौर द्रव्यमान वाला तारा) का जीवनकाल लगभग 6 खरब से लेकर 10 खरब वर्ष तक हो सकता है।
जब यह तारा अपने जीवन के अंतिम कुछ अरब वर्षों में प्रवेश करेगा, तब यह एक 'नीले बौने' के रूप में चमकेगा।
कंप्यूटर सिमुलेशन से पता चलता है कि एक 0.1 सौर द्रव्यमान वाला तारा अपने जीवन के अंतिम चरण में लगभग 1/3 सौर चमक तक पहुँच सकता है और उसकी सतह का तापमान 5,700 केल्विन (लगभग हमारे सूर्य के वर्तमान तापमान के बराबर) हो सकता है, जिससे वह तकनीकी रूप से एक नीला-सफेद बौना दिखाई देगा।Kitchin Chris The Future History of the Arctic and the Cosmos Springer 2019 978-3030193423 112-115
अंतिम परिणति: हेलियम श्वेत वामन
एक नीला बौना तारा अपने जीवन के अंत में किसी भी प्रकार का सुपरनोवा या हाइपरनोवा विस्फोट नहीं करता है। चूंकि इसका द्रव्यमान बहुत कम होता है, इसलिए इसका गुरुत्वाकर्षण बल कभी भी इतना दबाव नहीं बना पाता कि इसके भीतर मौजूद हेलियम का नाभिकीय संलयन शुरू हो सके।
जैसे ही इसके भीतर का बचा हुआ हाइड्रोजन ईंधन पूरी तरह से समाप्त हो जाता है, यह तारा धीरे-धीरे ठंडा होने लगता है। अंततः, यह सीधे एक हेलियम श्वेत वामन में बदल जाता है। यह श्वेत वामन भी खरबों वर्षों में धीरे-धीरे अपनी बची हुई गर्मी को अंतरिक्ष में विकीर्ण करेगा और अंत में एक मृत, ठंडे और अदृश्य 'काले बौने' के रूप में विलीन हो जाएगा।Hansen Carl J. Kawaler Steven D. Trimble Virginia Stellar Interiors: Physical Principles, Structure, and Evolution https://archive.org/details/springer_10.1007-978-1-4419-9110-2 Springer 2004 978-0387200897 295-302https://chandra.harvard.edu/edu/formal/stellar_ev/ Stellar Evolution - Chandra X-ray Observatory NASA
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
नासा (NASA) - तारों की मृत्यु और सुदूर भविष्य का ब्रह्मांड
श्रेणी:खगोल भौतिकी