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411 समाचार
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दहेज प्रथा

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दहेज का अर्थ है वह सम्पत्ति या मूल्यवान वस्तुएँ, जो विवाह के समय वधू के परिवार की तरफ़ से वर या उसके परिवार को दी जाती हैं।Production and Reproduction: A Comparative Study of the Domestic Domain https://archive.org/details/productionreprod0000unse Goody Jack Cambridge University Press 1976 Cambridge 8 दहेज को उर्दू में 'जहेज़' कहते हैं। यूरोप, भारत, अफ्रीका और दुनिया के अन्य भागों में दहेज प्रथा का लम्बा इतिहास रहा है। भारत में इसे दहेज, हुँडा या वर-दक्षिणा के नाम से भी जाना जाता है। भारतीय समाज में दहेज प्रथा एक गंभीर सामाजिक समस्या के रूप में देखी जाती है। जहाँ एक ओर ग्रामीण एवं पिछड़े क्षेत्रों में इसके कारण महिलाओं के उत्पीड़न और हिंसा के मामले सामने आते हैं, वहीं हाल के वर्षों में भारतीय न्यायालयों ने इसके लिए बने कड़े कानूनों (जैसे धारा 498A) के दुरुपयोग और झूठे मामलों पर भी चिंता व्यक्त की है। इतिहास एवं उत्पत्ति दहेज प्रथा की जड़ें प्राचीन काल में मानी जाती हैं। ऐतिहासिक रूप से, इसे 'स्त्रीधन' (विवाह के समय वधू को दिया जाने वाला स्वेच्छिक उपहार) और 'वर-दक्षिणा' से जोड़ा जाता था। समय के साथ सामाजिक और आर्थिक बदलावों के कारण इसने एक अनिवार्य और शोषक प्रथा का रूप ले लिया। ऐतिहासिक अवधारणा एवं शास्त्रीय दृष्टिकोण प्राचीन भारतीय साहित्य और संस्कृत ग्रंथों में आधुनिक 'दहेज प्रथा' का उल्लेख इस शोषक रूप में नहीं मिलता। उस काल में विवाह के समय दी जाने वाली संपत्ति या उपहारों को मुख्यतः दो अलग-अलग अवधारणाओं के रूप में देखा जाता था:Altekar A.S. The Position of Women in Hindu Civilization Motilal Banarsidass 1956 69-71 978-8120804869 स्त्रीधन और वर-दक्षिणा स्त्रीधन: प्राचीन धर्मशास्त्रों (जैसे मनुस्मृति और याज्ञवल्क्य स्मृति) के अनुसार, विवाह के समय वधू को उसके माता-पिता, रिश्तेदारों या पति द्वारा स्वेच्छा से दिए गए वस्त्र, आभूषण और संपत्ति पर केवल महिला का ही सर्वाधिकार होता था। इसे 'स्त्रीधन' कहा गया, जिसका उद्देश्य महिला को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना था, न कि वर पक्ष की मांग को पूरा करना।Kane P.V. History of Dharmasastra 2 Bhandarkar Oriental Research Institute 1941 535-542 वर-दक्षिणा: विवाह संस्कार संपन्न होने के पश्चात कन्यादान के अंग के रूप में वर को आदरस्वरूप दी जाने वाली एक प्रतीकात्मक भेंट या दक्षिणा होती थी।Murdock G.P. Social Structure https://archive.org/details/socialstructure00murdrich Macmillan 1949 20-22 आधुनिक स्वरूप में परिवर्तन ऐतिहासिक और समाजशास्त्रीय अध्ययनों के अनुसार, मध्यकाल और विशेषकर ब्रिटिश औपनिवेशिक काल के दौरान भूमि-स्वामित्व और संपत्ति के नियमों में आए बदलावों के कारण 'स्त्रीधन' की मूल अवधारणा विकृत हो गई। स्वेच्छिक उपहारों ने धीरे-धीरे वर पक्ष द्वारा मांगी जाने वाली एक अनिवार्य सामाजिक और आर्थिक मांग (दहेज) का रूप ले लिया।Kishwar Madhu Off the Beaten Track: Rethinking Gender Justice for Indian Women https://archive.org/details/offbeatentrackre0000kish Oxford University Press 1999 11-15 978-0195648164 हत्याएँ एवं हिंसा राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में प्रतिवर्ष हजारों मामले दहेज प्रताड़ना और दहेज हत्या से संबंधित दर्ज किए जाते हैं। वर्ष 2012 के आंकड़ों के अनुसार भारत में दहेज हत्या के 8,233 मामले सामने आए थे।http://hindi.webdunia.com/woman-articles/1130901048_1.htm दहेज सम्बन्धी मामले 26 फ़रवरी 2014 https://web.archive.org/web/20140208071940/http://hindi.webdunia.com/woman-articles/1130901048_1.htm 8 फ़रवरी 2014 dead कानूनी प्रावधान भारत में दहेज प्रथा को रोकने के लिए निम्नलिखित प्रमुख कानूनी प्रावधान किए गए हैं: दहेज निषेध अधिनियम, 1961: इसके अनुसार दहेज लेने, देने या इसके लेन-देन में सहयोग करने पर कम से कम 5 वर्ष की कैद और 15,000 रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 498-ए: पति और उसके रिश्तेदारों द्वारा सम्पत्ति अथवा कीमती वस्तुओं की अवैधानिक मांग के लिए प्रताड़ित करने पर 3 साल की कैद और जुर्माना हो सकता है। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 406: यदि ससुराल वाले लड़की के 'स्त्रीधन' को उसे सौंपने से मना करते हैं, तो 3 साल तक की कैद या जुर्माना का प्रावधान है। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 304-बी: विवाह के 7 साल के भीतर असामान्य परिस्थितियों में महिला की मौत होने पर (यदि दहेज उत्पीड़न साबित हो), तो कम से कम 7 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। इन्हें भी देखें बाल विवाह कन्या भ्रूण हत्या स्त्रीधन सन्दर्भ श्रेणी:सामाजिक प्रथा श्रेणी:भारत में सामाजिक समस्याएँ