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411 समाचार
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साल्हेर की लड़ाई

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साल्हेर की लड़ाई शाही मराठा विस्तार फरवरी 1672 साल्हेर, महाराष्ट्र, भारत मराठों ने साल्हेर और मुल्हेर किला और आसपास के मुगल क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया। मराठा विजय 25px मराठा साम्राज्य 25px मुगल साम्राज्य 25px प्रतापराव गुजर25px मोरोपंत त्र्यंबक पिंगले25px आनंदराव माकाजी25px सूर्याजी काकदे 25px रूपाजी भोसले 25px दिलेर खान25px बहादुर खानJaswant Lal Mehta Advanced Study in the History of Medieval India: 1526-1707 https://books.google.com/books?id=BsIgAAAAMAAJ&q=salher+battle 1981 Sterling 9788120706170 25px इखास खान25px बहलोल खान सालहर की लड़ाई फरवरी 1672 ई. में मराठा साम्राज्य और मुगल साम्राज्य के बीच लड़ी गई थी। लड़ाई नासिक जिले के साल्हेर किले के पास लड़ी गई थी। परिणाम मराठा साम्राज्य के लिए एक निर्णायक जीत थी। इस लड़ाई को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह पहली कड़ी लड़ाई है जिसमें मराठा साम्राज्य ने मुगल साम्राज्य को हराया था।https://books.google.com/books?id=Q5kVk6msxUcC&dq=salher+battle&pg=PA27 From the Death of Shivaji to the Death of Aurangzeb Y.G. Bhave Northern Book Centre 2000 42 9788172111007 पृष्ठभूमि पुरंदर की संधि (1665) के बाद शिवाजी को मुगल साम्राज्य को 23 किले सौंपना पड़ा था।http://creativeindiamag.com/india/the-decisive-battle-where-shivaji-rewrote-history-and-the-mughal-rout/ The Battle Where Shivaji Rewrote History And Mughal Rout Creative India creativeindiamag.com en-US 2017-11-03 https://web.archive.org/web/20171107015955/http://creativeindiamag.com/india/the-decisive-battle-where-shivaji-rewrote-history-and-the-mughal-rout/ 7 November 2017 dead रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण किले, जैसे सिंहगढ़, पुरंदर, लोहगढ़, करनाला, और महुली, मुगल साम्राज्य को सौंप दिये गए थे। इस संधि के बाद शिवाजी को आगरा में औरंगजेब के दरबार में जाने के लिए बाध्य होना पड़ा। सितंबर 1666 में आगरा से उनके प्रसिद्ध पलायन के बाद, 2 साल के लिए शांति रही 1670-1672 के बीच की अवधि में शिवाजी की शक्ति और क्षेत्र में एक बड़ी वृद्धि हुई । शिवाजी के सेनाओं ने बागलान तालुका, खानदेश, और सूरत में सफलतापूर्वक छापेमारी की और एक दर्जन से अधिक किलों पर कब्जा कर लिया। लड़ाई जनवरी 1671 में सेनापति प्रतापराव गूजर और उनकी 15,000 की सेना ने मुगल साम्राज्य के औंधा, पट्टा और त्र्यंबक किलों पर कब्जा कर लिया और साल्हेर और मुल्हेर पर हमला किया। इसके कारण औरंगजेब ने अपने दो सेनापतियों इखलास खान और बहलोल खान को 12,000 घुड़सवारों के साथ साल्हेर वापस लेने के लिए भेजा। अक्टूबर 1671 में, मुगलों ने साल्हेर की घेराबंदी की। बदले में शिवाजी ने अपने दो कमांडरों पेशवा मोरोपंत पिंगले और सरदार प्रतापराव गुजर को किले को पुनः प्राप्त करने की आज्ञा दी।Siva Chhatrapati, Being a Translation of Sabhasad Bakhar with Extracts from Chitnis and Sivadigvijaya, with Notes Nath Surendra 103https://books.google.com/books?id=oJlyfJBXlUsC&dq=salher+battle&pg=PA199 Mahadev Govind Ranade, Volume 3 Verinder Grover Deep & Deep Publications 1996 199 9788171002450 50,000 मुगलों ने 6 महीने से अधिक समय तक किले को घेर रखा था। शिवाजी साल्हेर के सामरिक महत्व को जानते थे क्योंकि यह महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों पर मुख्य किला था। Dइस बीच दिलेरखान ने पुणे पर भी हमला कर दिया था और शिवाजी पुणे को नहीं बचा सके क्योंकि उनकी मुख्य सेनाएं दूर थीं। शिवाजी ने दिलेरखान को पुणे से उसे दूर खींचने की और साल्हेर पहुँचने के लिए विवश करके एक योजना तैयार की। उस समय मोरोपंत त्र्यंबक पिंगले दक्षिण कोंकण में थे और प्रतापराव गूजर औरंगाबाद के पास छापेमारी कर रहे थे। उन्होंने दोनों को आदेश दिया कि किले को मुक्त करने के लिए साल्हेर में मुगलों पर हमला करें। अपने सेनापतियों को लिखे अपने पत्र में शिवाजी ने लिखा था 'उत्तर की ओर जाओ और साल्हेर पर हमला करो और दुश्मन को हराओ'।Jadhav Namdeorao Ganimi Kava दोनों मराठा सेनाएँ वाणी गाँव के पास मिलीं और नासिक में मुगल शिविर को दरकिनार कर साल्हेर के पास पहुँचे। कुल मराठा ताकत 40,000 (20,000 पैदल सेना + 20,000 घुड़सवार सेना) की थी। यह इलाका घुड़सवार सेना की लड़ाई के लिए उपयुक्त नहीं था इसलिए मराठा कमांडरों ने अलग-अलग जगहों पर मुगल सेना को लुभाने, विभाजित करने और खत्म करने का फैसला किया। योजना के अनुसार प्रतापराव गूजर ने 5,000 घुड़सवारों के साथ मुगलों पर धावा बोल दिया और कई अप्रशिक्षित सैनिकों को मार डाला। आधे घंटे के बाद मुगल पूरी तरह से तैयार हो गए और प्रतापराव ने अपनी सेना के साथ एक नकली वापसी शुरू कर दी। 25,000 की पूरी मुगल घुड़सवार सेना ने मराठों का पीछा करना शुरू कर दिया। प्रतापराव ने साल्हेर से 25 किमी दूर एक दर्रे में मुगल घुड़सवार सेना का लालच दिया, जहां आनंदराव माकाजी के अधीन 15,000 घुड़सवार छिपे हुए थे। प्रतापराव ने दर्रे से मुंह मोड़ लिया और एक बार फिर मुगलों पर आक्रमण कर दिया। आनंदराव के अधीन 15,000 ताजा घुड़सवारों ने दर्रे के दूसरे छोर को अवरुद्ध कर दिया और मुगलों को चारों ओर से घेर लिया। ताजा मराठा घुड़सवार सेना ने थके हुए मुगल घुड़सवारों को 2-3 घंटे में हरा दिया। हजारों मुगल युद्ध से भाग गए। इसके बाद मोरोपंत ने अपनी 20,000 पैदल सेना के साथ साल्हेर में 25,000 मुगल पैदल सेना को घेर लिया और उस पर हमला कर दिया। इस मुठभेड़ में प्रमुख मराठा सरदार और शिवाजी के बचपन के दोस्त सूर्यजी काकड़े युद्ध में एक ज़ाम्बुराक तोप से मारे गए थे।Sabhasad Krushnaji Anant Sabhasad Bakhar 1697 लड़ाई पूरे एक दिन तक चली और अनुमान है कि दोनों पक्षों के लगभग 10,000 लोग मारे गए थे।https://books.google.com/books?id=deHZAUDHzYwC&dq=salher+battle&pg=PA366 Shivaji, the Great Maratha, Volume 2 H.S. Sardesai Cosmo Publications 2002 366 9788177552867 शाही मुगल सेनाओं को पूरी तरह से खदेड़ दिया गया और मराठों ने उन्हें करारी हार दी।https://books.google.com/books?id=Q5kVk6msxUcC&dq=salher+battle&pg=PA27 From the Death of Shivaji to the Death of Aurangzeb Y.G. Bhave Northern Book Centre 2000 27 9788172111007https://books.google.com/books?id=BsIgAAAAMAAJ&q=salher+battle Advanced Study in the History of Medieval India: 1526-1707 Jaswant Lal Mehta Sterling 1981 404 9788120706170https://books.google.com/books?id=FIIQhuAOGaIC&dq=salher+battle&pg=PA42 The State at War in South Asia Pradeep Barua University of Nebraska 2005 42 0803213441Siva Chhatrapati, Being a Translation of Sabhasad Bakhar with Extracts from Chitnis and Sivadigvijaya, with Notes Nath Surendra 104 परिणाम मराठा साम्राज्य की एक निर्णायक जीत हुई और साल्हेर और मुल्हेर का पास का किला भी मराठा नियंत्रण में आए।https://books.google.com/books?id=N5mIVt_Zd-0C&dq=shriman+yogi+shivaji+the+great&pg=PP5 Shivaji the Great 2003 Balwant Printers Pvt. Ltd. 9788190200004 enSiva Chhatrapati, Being a Translation of Sabhasad Bakhar with Extracts from Chitnis and Sivadigvijaya, with Notes Nath Surendra 105 इस लड़ाई तक शिवाजी की अधिकांश जीत गुरिल्ला युद्ध के माध्यम से हुई थी, लेकिन साल्हेर पहली लड़ाई थी जिसमें मराठाो ने मुगलो को खुला युद्धक्षेत्र में हराया। उन्हें गजपति (हाथियों के भगवान), हयपति (घुड़सवारों के भगवान), गडपति (किलों के भगवान), और जलपति (उच्च समुद्र के स्वामी) के रूप में संबोधित किया।https://books.google.com/books?id=4BY-DwAAQBAJ The Grand Rebel Kincaid Dennis January 0101 Prabhat Prakashan 172 en कुछ साल बाद 1674 में शिवाजी महाराज को उनके राज्य के सम्राट (या छत्रपति) के रूप में शिवाजी, नें खुद का राज्याभिषेक करवा लिया और स्वराज्य के महाराजा पहले छत्रपति बन गए। सन्दर्भ : सभासद बखर श्रेणी:मराठा मुग़ल लड़ाइयाँ श्रेणी:मराठों से जुड़ी लड़ाई