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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

भगवानदास

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नवम्बर 2018 नवम्बर 2018 नवम्बर 2018 आमेर के राजा 250px| 27 जनवरी 157410 दिसम्बर 1589 कछवाहा भारमल राजा मान सिंह भारमल रानी सा मैनावती साहिबा रानी सा भगवती बाई जी साहिबा मानसिंह प्रथम (1550–1614) माधो सिंह (1561–1601) मनभावती बाई (1572–1605) बज्रेश सिंह (1579–1601) अनुपूर्वा बाई (1581–1648) जीजाई बाई (1589–1622) 1537 आमेर 10 दिसम्बर 1589 आगरा सूबेदार लाहौर Term सईद खान बीकानेर के राय सिंह सूबेदार काबुल Term 1586 (कुछ महीने) राजा मान सिंह इस्मा'इल क्विट ख़ान thumb|right|300px|आमेर का आमेर दुर्ग राजा भगवन्त दास की राजधानी था। राजा राजा भगवन्त दास) (1537 – 10 दिसम्बर 1589) आमेर के कछवाहा शासक थे। जयसिंह द्वितीय उनके ही वंशज थे जिन्होने जयपुर की स्थापना की। भगवन्तदास ने भारमल केे बाद आमेर का सिंहासन संभाला। अकबर के दरबार की शान बढ़ाने वाला राजा मानसिंह भगवन्तदास का ही पुत्र था। मुगल दरबार में भगवन्तदास को ऊँचा मनसब प्राप्त था। इसके अलावा वह एक उत्कृष्ट योद्धा था, जिसने आमेर से बाहर जाकर पश्चिमी और उत्तरी भारत में कई बड़े युद्ध लड़े और उनमें विजय प्राप्त की। राजा भारमल की मौत के बाद भगवन्तदास सन् 1573 ई. में आमेर का राजा बना। अपने पिता के समान ही भगवन्तदास को भी मुगल दरबार में काफी ऊँचा पद प्राप्त हुआ था। वह पांच हजारी मनसब तक पहुँचा था। अकबर बिना युद्ध के महाराणा प्रताप को अपने अधीन लाना चाहता था इसलिए अकबर ने प्रताप को समझाने के लिए चार राजदूत नियुक्त किए जिसमें से भगवन्तदास भी एक थे। भगवन्तदास को लाहौर का संयुक्त गवर्नर बनाया गया था, जबकि उसका पुत्र मानसिंह क़ाबुल में नियुक्त हुआ। जब मिर्ज़ा हाकिम ने लाहौर पर आक्रमण किया, तब उसे पराजित करने में भगवन्तदास का बहुत बड़ा हाथ था। 1585 में भगवन्तदास को कश्मीर के सुल्तान यूसुफ़ ख़ान के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए भेजा गया, जहां उससे डरकर सुल्तान ने आत्मसमर्पण कर दिया। इस उपलब्धि पर उसके नाम से सिक्का भी प्रचलित किया गया। अपने जीवन के अंतिम वर्षों में भगवन्तदास, राजा टोडरमल के साथ पंजाब का संयुक्त सूबेदार रहा। भगवन्तदास की मृत्यु 13 नवम्बर ,1589 को लाहौर में हो गयी जिसके बाद उनके पुत्र मानसिंह 1589 ई. में आमेर के शासक बने। इनके कार्यकाल में आमेर एक महत्वपूर्ण एवं गौरवपूर्ण राज्य में रूप में विख्यात हुआ। 'मानसी गंगा', गोवर्धन के तटों को पत्थरों से सीढ़ियों सहित बनवाने का श्रेय भगवानदास को प्राप्त है। श्रद्धालु मानसी गंगा के चारों और दर्शनीय स्थानों के दर्शन करते हुए परिक्रमा लगाते हैं। भगवानदास बाँकावत लवाण के जागीरदार थे व भगवन्तदास के अनुज थे। वह बाँके राजा के नाम से प्रसिद्ध थे व उनके वंशज बाँकावत व कछवाहा कहलाते हैं। लोकप्रिय संस्कृति में छवि फ़िल्में और टेलीविज़न 2018-2019 भारतीय ऐतिहासिक टेलीविजन श्रृंखला दास्तान-ए-मोहब्बत: सलीम अनारकली में उनकी भूमिका हेमंत चौधरी ने निभाई हैhttps://nettv4u.com/about/hindi/tv-serials/dastaan-e-mohabbat-salim-anarkali/all-cast-and-crew Hindi Tv Serial Dastaan E Mohabbat Salim Anarkali - Full Cast and Crew nettv4u en 2026-10-14 सन्दर्भ श्रेणी:1537 में जन्मे लोग श्रेणी:जयपुर का इतिहास श्रेणी:१५८९ में निधन