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टस्कनी हीरा
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thumb|टस्कनी हीरे की प्रतिकृति, एक टुकड़े में स्थापित जैसा कि यह मूल रूप से 16वीं-17वीं शताब्दी में दिखाई दिया था
टस्कनी हीरा भारत में पाया गया एक दुर्लभ और लुप्त हो चुका रत्न है। इसका रंग हल्का पीला होता है जिसमें हल्की हरी चमक झलकती है। इसे अत्यंत सुंदर और जटिल नौ-कोणीय आकार में तराशा गया था, जिसमें 126 पहलू थे। इसका वजन लगभग 137.27 कैरेट यानी 27.45 ग्राम था। अपनी अनोखी बनावट और रंग के कारण यह विश्वभर में प्रसिद्ध हुआ। इस हीरे को टस्कन हीरा, "टस्कनी के महा ड्यूक का हीरा", ऑस्ट्रियाई हीरा, ऑस्ट्रियाई पीला हीरा और डफ़नर हीरा जैसे नामों से भी जाना जाता है।मनुचेहर-दानाई मोहसिन रत्न और रत्न विज्ञान का शब्दकोश मार्च 9, 2013 स्प्रिंगर साइंस एंड बिजनेस मीडिया 978-3662042885 186 https://books.google.com/books?id=2UX1CAAAQBAJ 16 मार्च 2018
इतिहास
प्रथम विश्व युद्ध के बाद ऑस्ट्रियाई साम्राज्य के पतन के समय, सम्राट चार्ल्स प्रथम ने शाही खजाने से टस्कनी हीरे को निकालकर अपने साथ निर्वासन में ले लिया। कुछ समय बाद, 1918 में शाही परिवार के एक विश्वसनीय व्यक्ति ने इस बहुमूल्य हीरे को अन्य शाही रत्नों के साथ चुरा कर दक्षिण अमेरिका भाग गया। इसके बाद यह हीरा रहस्यमय ढंग से लुप्त हो गया। 1920 के दशक में यह अफवाह फैली कि इस हीरे को संयुक्त राज्य अमेरिका ले जाकर फिर से तराशा गया और किसी अन्य नाम से बेच दिया गया। इसके बाद इसका कोई निश्चित पता नहीं चल सका।https://www.paolopenko.com/2021/11/27/il-fiorentino-il-gran-diamante-di-toscana/ टस्कनी का महानतम हीरा – पाओलो पेंको द्वारा” 27 नवम्बर 2021
पश्चिमी साहित्य में लोकप्रिय
टस्कनी हीरा कई साहित्यिक कृतियों में रहस्य और इतिहास के प्रतीक के रूप में उभरता है। यह डैन हैनेल के 2015 के उपन्यास "इन द शैडो ऑफ डियाब्लो: डेथ एट द हीलिंग वाटर्स", एमी मेयर्सन के "द इम्परफेक्ट्स (2020)", जस्टिन बी॰. होडर के "द मिस्ट्स ऑफ मोर्ने (2021)" और थॉमस हर्लिमन के "डेर रोटे डायमंड (2022) " में कहानी के केंद्रीय भाग के रूप में शामिल है। इन उपन्यासों में यह हीरा खोए वैभव और मानवीय लालसा दर्शाता है।
संदर्भ
श्रेणी: रत्न