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मेघवाल
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मेघवाल या मेघवार (उर्दू: میگھواڑ, सिंधी: ميگھواڙ) एक जातीय समूह है, जो मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिम भारत में निवास करता है और इनकी कुछ आबादी पाकिस्तान में भी पाई जाती है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, इनकी कुल अनुमानित जनसंख्या लगभग 48,59,000 थी, जिनमें से 44,54,000 भारत में रहते थे। यह समुदाय विभिन्न भाषाएँ बोलता है, जिनमें मारवाड़ी (12,59,000), हिंदी (18,63,000), डोगरी (6,30,000), पंजाबी (6,93,400) और अन्य क्षेत्रीय भाषाएँ शामिल हैं। कुछ मेघवाल सिख धर्म को भी मानते हैं। इनका पारंपरिक व्यवसाय बुनाई रहा है, और यह एक कृषक जाति मानी जाती है, जिसका मुख्य कार्य खेती करना है। यह समुदाय प्राचीनकाल से हिंदू धर्म से जुड़ा हुआ है, और इनके प्रमुख आराध्य ऋषि मेघ, संत कबीर, बाबा रामदेवजी और गोसाई जी धनी मातंग देव हैं। बाबा रामदेवजी के पुजारी परंपरागत रूप से इसी समुदाय से होते हैं, जिन्हें "रिखिया" कहा जाता है। मेघवाल जाति की सामाजिक स्थिति अन्य अनुसूचित जातियों की तुलना में सामान्यतः बेहतर मानी जाती है, क्योंकि इनका कार्य मुख्यतः बुनाई और कृषि से संबंधित रहा है, और इनका संबंध पशु वध, मांस अथवा चमड़ा संबंधी व्यवसायों से नहीं रहा है। विशेषकर पंजाब में यह समुदाय एक समृद्ध और प्रभावशाली समूह के रूप में स्थापित है।
इतिहास
मेघवंशी यानी मेघवाल जाति को राजऋषि वृत्र या मेघ ऋषि से उत्पन्न जाना जाता है''।सिंधु सभ्यता के अवशेष (मेघ ऋषि की मुर्ति मिली) भी मेघो से मिलते है। हडप्पा,मोहन-जोद़ङो,कालीबंगा (हनुमानगढ),राखीगङी,रोपङ,शक्खर(सिंध),नौसारो(बलुचिस्तान),मेघढ़(मेहरगढ़ बलुचिस्तान)आदि मेघवंशजो के प्राचीन नगर हुआ करते थे। 3300ई.पू.से 1700ई.पू.तक सिंध घाटी मे मेघो की ही आधिक्य था। 1700-1500ई.पू.मे आर्यो के आगमन से मेघ, अखण्ड भारत के अलग अलग भागो मे बिछुड़ (चले) गये। प्राचीन इतिहास के अनुसार मेघवंशी ही मेघवाल कहलाए थे ।
आज मेघवालो को बहुत सारी उपजातीयो बांट रखा है जिसमे मुख्य रूप से घोटड़, पूनड़, साहेलिया, पटिर, बरवड़, परिहार, तंवर, इणकिया, डाबी, वर्मा, कटारिया, पटेल, राठौड़, महेश्वरी, शेखावत, राजावत, चौहान, सांवा, गुलशन, बेरवाल, सुरेला, मेहरा, गोठवाल, सोडा, जनागल कालवा, तंवर, सिगला, मंडाङ सिंहमार, पिंडार, भगत, बारुपाल,मिड़ल(मिरल),लोथिया,भड़नोवा(भरनोवा),केम्मपाल, अहम्पा, पंवार, वनल,परिहार (साटिका खुर्द ), लिलावत, जयपाल, चावणीया, तुर्किया, गाडी, देवपाल, जालानी, गोयल-मंगी, पन्नु, भाटि, दिवराया, गोगली, गंढेर, दहीया, मुंशी, कोली, तांती, पान, कड़ेला चौपाल आदि प्रमुख है। http://www.tribuneindia.com/2009/20090119/region.htm.
रीजनल ब्रीफ्स, पंजाब, अबोहर.
24 अगस्त 2009
22 जनवरी 2009
https://web.archive.org/web/20090122193340/http://tribuneindia.com/2009/20090119/region.htm
dead
http://journals.cambridge.org/action/displayAbstract;jsessionid=15D7EC7203DF91E4486EBE73F6D24E58.tomcat1?fromPage=online&aid=5351144
The Kāmaḍ of Rajasthan — Priests of a Forgotten Tradition. Journal of the Royal Asiatic Society of Great Britain & Ireland (Third Series), 6, pp 29-56
कैंब्रिज यूनीवर्सिटी प्रैस
29-56
5 जून 2010
https://web.archive.org/web/20120319202856/http://journals.cambridge.org/action/displayAbstract;jsessionid=15D7EC7203DF91E4486EBE73F6D24E58.tomcat1?fromPage=online&aid=5351144
19 मार्च 2012
live
http://www.joshuaproject.net/peopctry.php?rog3=IN&rop3=112948
मेघ, हिंदू ऑफ़ इंडिया
जोशुआ प्रोजेक्ट
13 अगस्त 2009
https://web.archive.org/web/20071111152727/http://www.joshuaproject.net/peopctry.php?rop3=112948&rog3=IN
11 नवंबर 2007
live
मेघवंश एक सिंहावलोकन
आर.पी. सिंह
रवि प्रकाशन
2009
11-12
8180330176cited text not present/found in sources
ऐसा विश्वास किया जाता है कि जब भारत में ओद्योगिक कपड़े का आगमन हुआ तो पश्चिम भारत के गांव गांव में फैले *बलाई* अर्थात *बुनकर* पूरी तरह। से बेरोजगार हो गय,,,! बेरोजगार बलाई बुनकर जाति ने कर्ज व भूखमरी की स्थिति में देशी राजाओं से गुहार लगाई । देशी राजा रजवाड़े हर किसी को तो रोजगार दे नही सकते थे । लेकिन उन्होंने प्रतिभाशाली बेरोजगार बलाई बुनकरों में से कुछ को ग्राम चौकीदार की सरकारी नौकरी दी जो *कोटवार* उपजाति बन गय। इसी प्रकार कुछ प्रतिभाशाली बेरोजगार बलाई बुनकरों को संदेशवाहक या हरकारे की सरकारी नौकरी दे जो *चोबेदार* उपजाति बन गई ।इसी प्रकार कुछ प्रतिभाशाली बेरोजगार बलाई बुनकरों को सिंचाई हेतु बनाय गई वर्षा के जल संग्रहण संरचनाओं ,तालाबों, बावड़ी, नहरों के देखभाल की सरकारी नौकरी दी गय जो *मेघवाल* उपजाति बन गई। उस वक्त नगद वेतन नही दिया जाता था,,अपितु कृषि भूमि के टुकड़े अनुवांशिक सेवा शर्त पर दे दिए जाते थे। जो आज भी कुछ परिवारो के पास है। शेष बेरोजगार बलाई बुनकर,,अन्य कृषि श्रम व खेतीबाड़ी में चले गय। इनमे से जो मेहनताने पर कुशल श्रम करने लगे वो,,,*मेहरा* उपजाति हो गय।।ओर जो कर्ज के ब्याज के बदले बिना मेहनताने के अकुशल श्रम करने लगे वो * बेगार बलूटे* कहलाने लगे। कालांतर में ये उपजातियां,, पृथक जातियां बन गई।
मूल
अलेक्ज़ेंडर कनिंघम ने अपनी 1871 में छपी पुस्तक ‘सर्वे ऑफ इंडिया’ में प्रतिपादित किया कि आर्यों के आगमन से पूर्व मेघ असीरिया से पंजाब में आए और सप्त सिंधु (सात नदियों की भूमि) पर बस गए। आर्यों के दबाव के तहत, वे संभवतः पाषाण युग (1400-1200 वर्ष ईसा पूर्व) के दौरान महाराष्ट्र और विंध्याचल क्षेत्र और बाद में बिहार और उड़ीसा में भी बसे। .भारतीय भू सर्वेक्षण
अलेक्ज़ेंडर कनिंघम
गवर्नमेंट सेंट्रल प्रैस
1871 वे सिंधु घाटी सभ्यता से संबंधित हैं।मेघवंश एक सिंहावलोकन
आर.पी. सिंह
रवि प्रकाशन
2009
3
8180330176 वे एक संत ऋषि मेघ के वंशज होने का दावा करते हैं, जो अपनी प्रार्थना से बादलों (मेघों) से बारिश ला सकता था।राजस्थान, भाग 2, Volume 38 of "पीपुल ऑफ इंडिया "
डी.के.सामन्ता, एस.के. मंडल, एन.एन. व्यास, एंथ्रोपॉलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया
पॉपुलर प्रकाशन
1998
629–632
8171547699 ‘मेघवार’ शब्द संस्कृत शब्द ‘मेघ’ से निकला है जिसका अर्थ है बादल और बारिश और ‘वार’ का अर्थ है ‘युद्ध’, एक ‘समूह’, ‘बेटा’ और ‘बच्चे’ (संस्कृत: वार:).सुप्रीम संस्कृत-हिंदी कोश डॉ॰आलोक कुमार रस्तोगीऔर श्री शरन कालरा पब्लिकेशन (प्रा.) लि., दिल्लीhttp://dsal.uchicago.edu/cgi-bin/philologic/contextualize.pl?p.5.apte3.954296
द प्रैक्टिकल संस्कृत-इंगलिश डिक्शनरी
9 सितंबर 2009
जून 2020 InternetArchiveBot
अतः ‘मेघवाल’ और ‘मेघवार’ शब्दशः एक लोग हैं, जो मेघवंश के हैं।http://www.shabdkosh.com/en2hi/search.php?e=cloud&f=0
इंगलिश-हिंदी डिक्शनरी: Cloud
शब्दकोश.कॉम
24 अगस्त 2009
फ़रवरी 2021 InternetArchiveBot
यह भी कहा जाता है कि मेघ जम्मू और कश्मीर के पर्वतीय क्षेत्रों में रहते थे जहाँ बादलों की गतिविधि बहुत होती है। वहाँ रहने वाले लोगों को स्वाभाविक ही (मेघ, बादल) नाम दे दिया गया। मिरासियों (पारंपरिक लोक कलाकार) द्वारा सुनाई जाने वाली लोक-कथाओं में मेघों को सूर्यवंश से जोड़ा जाता है जिस वंश से भगवान राम हुए हैं।एम.आर. भगत
मेघ माला
एम.आर. भगत
http://www.bhagatshaadi.com/megh/MEGH-MALA.pdf
hi
1 सितंबर 2009
https://web.archive.org/web/20090806042152/http://bhagatshaadi.com/megh/MEGH-MALA.pdf
6 अगस्त 2009
dead
पौराणिक संकेत
भारतीय पौराणिक कथाओं में राजऋषि वृत्र धार्मिक प्रमुख था और वह सप्त सिंधु क्षेत्र का राजा भी था। समस्त भारत पर शासन करने वाले नागवंशियों का वह पूर्वज था। नागवंशी अपने व्यवहार, शैली, योग्यता और उनकी गुणवत्ता में ईश्वरीय गुणों के लिए जाने जाते थे। वास्तुकला के वे विशेषज्ञ थे। वे नाग या अजगर की पूजा करते थे। मेघवालों को हिरण्यकश्यप, प्रह्लाद, हिरण्याक्ष, विरोचन, राजा महाबली (मावेली), बाण आदि के साथ भी जोड़ा जाता है।
मेघवंश एक सिंहावलोकन
आर.पी. सिंह
रवि प्रकाशन
2009
13-15
8180330176
ऐतिहासिक चिह्न
मौर्य काल के दौरान मेघवंश के चेदी राजाओं ने कलिंग पर शासन किया। वे अपने नाम के साथ महामेघवाहन जोड़ते थे और स्वयं को महामेघवंश का मानते थे। मेघवंश एक सिंहावलोकन
आर.पी. सिंह
रवि प्रकाशन
2009
21
8180330176 कलिंग के राजा खारवेल ने मगध के पुष्यमित्र को पराजित किया और दक्षिण भारतीय (वर्तमान में तमिलनाडु) क्षेत्रों पर विजय पाई. कलिंग के राजा जैन धर्म का पालन करते थे। मेघवंश एक सिंहावलोकन
आर.पी. सिंह
रवि प्रकाशन
2009
22-23
8180330176 मौर्यों के पतन के बाद, मेघवंश के राजाओं ने अपनी शक्ति और स्वतंत्रता पुनः प्राप्त कर ली। चेदी, वत्स, मत्स्य आदि शासकों को मेघ कहा जाता था। गुप्त वंश के उद्भव के समय कौशांबी एक स्वतंत्र राज्य था। इसका शासक मेघराज मेघवंश से था और बौद्ध धर्म का अनुयायी था। मेघवंश एक सिंहावलोकन
आर.पी. सिंह
रवि प्रकाशन
2009
23
8180330176
भौगोलिक वितरण
‘मेघवाल’ मारवाड़, राजस्थान से हैं। 1981 की जनगणना के अनुसार राजस्थान में मेघ, मेघवाल, मेंघवार के रूप में अधिसूचित लोगों की संयुक्त जनसंख्या 889,300 थी।http://findarticles.com/p/articles/mi_7018/is_1_33/ai_n28438653/?tag=content;col1
हिस्टरी, कम्युनिटी एंड आइडेंटिटी: एन इंटरप्रिटेशन ऑफ डालीबाई
लेंग्वेज फोरम, जन.-जून 2007
राजश्री ढाली
14 अगस्त 2009
14 फ़रवरी 2010
https://web.archive.org/web/20100214002522/http://findarticles.com/p/articles/mi_7018/is_1_33/ai_n28438653/
dead
वे पश्चिमी गुजरात में (पाकिस्तान सीमा के पास) और भारत के अन्य भागों जैसे महाराष्ट्र, पंजाब और हरियाणा में रहते हैं। ‘मेघ’ जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश से हैं,http://www.kashmir-information.com/LegalDocs/51.html
रिपोर्ट ऑफ द फ्रेंचाइज़ी कमेटी, 1933 (कश्मीर)
कश्मीर इंफर्मेशन नेटवर्क
24 अगस्त 2009
https://web.archive.org/web/20090505191738/http://www.kashmir-information.com/LegalDocs/51.html
5 मई 2009
dead
और उन्हें मेघ, आर्य मेघ और भगत के नाम से जाना जाता है। कुछ स्थानों पर वे गणेशिया, मेघवंशी, मिहाग, राखेसर, राखिया, रिखिया,सिहमार, रिषिया और अन्य नामों से भी जाने जाते हैं। कुछ महाशा भी यह दावा करते हैं कि वे मेघों से संबंधित हैं।मार्क जर्गंसमेयेर.
रिलीजियस रिबेल्स इन द पंजाब: द सोशल विज़न ऑफ अनटचेबल्स
1988
214
अजंता पब्लिकेशंस, दिल्ली
8120202082 सन् 1947 में भारत के विभाजन के बाद मेघ, जो हिंदू धर्म में धर्मान्तरित हो गए थे, वे भारतीय क्षेत्र में पलायन कर गए।मार्क जर्गंसमेयेर.
रिलीजियस रिबेल्स इन द पंजाब: द सोशल विज़न ऑफ अनटचेबल्स
1988
225
अजंता पब्लिकेशंस, दिल्ली
8120202082 उनमें से अधिकांश सियालकोट से आ कर पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में उनके लिए स्थापित शिविरों में आ बसे।
पाकिस्तान में शब्द मेघवाल के स्थान पर मेघवार प्रयोग किया जाता है। सन् 1991 में पंजाब (भारत) में मेघों की जनसंख्या 105157 होने का अनुमान था।http://data.undp.org.in/shdr/punjab/07-Dalits.pdf
दलित्स – ऑन द मार्जिंस ऑफ जिवेलपमेंट
यूएनडीपी: यूनाइटिड नेशंस डिवेलपमेंट प्रोग्राम
13 अगस्त 2009
https://web.archive.org/web/20110721180829/http://data.undp.org.in/shdr/punjab/07-Dalits.pdf
21 जुलाई 2011
dead
सन् 2000 में पाकिस्तान में लगभग 226600 मेघवार रहते थे जो मुख्यतः उत्तर-पूर्व पंजाब के दादू और नवाबशाह शहरों में,http://kcm.co.kr/bethany_eng/p_code1/712.html
द मेघवार भील ऑफ पाकिस्तान
Bethany World Prayer Center
14 अगस्त 2009
https://web.archive.org/web/20110524005144/http://kcm.co.kr/bethany_eng/p_code1/712.html
24 मई 2011
live
और सिंध में अधिकतर बदीन, मीरपुर खास, थारपरकर और उमेरकोट जिलों में बसे थे। फ़रवरी 2010
जाति का दर्जा
कई कश्मीरी मुसलमान, जो अविभाजित पंजाब और गुजरात राज्यों के मैदानों में आकर बसे और मेघों की भाँति बुनकर थे ‘मेघ’ शब्द इस समुदाय से जुड़े किसी विशेष कार्य का संकेत है, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात आदि राज्यों में इन्हें किसान वर्ग के रूप में वर्गीकृत किया गया है।http://lawmin.nic.in/ld/subord/rule3a.htm
द कांस्टिट्यूशन (शिड्यूल्ड कास्ट्स) ऑर्डर, 1950
विधि और न्याय मन्त्रालय, भारत
15 अगस्त 2009
https://web.archive.org/web/20090619082941/http://lawmin.nic.in/ld/subord/rule3a.htm
19 जून 2009
live
अर्थात् वे भारत की ऐसी जातियों में शामिल हैं जिन्हें भारतीय संविधान की अनुसूची में निर्दिष्ट किया गया और कुछ विशेष प्रबंध किए गए ताकि वे जातिगत पूर्वाग्रहों के कारण उत्पन्न प्रतिकूल प्रभावों से उबर सकें. http://www.kashmiraffairs.org/ka1406.pdf.
कश्मीर अफेयर्स
अ वेरसा मीडिया पब्लिकेशन
अक्टूबर-दिसम्बर 2006
1 सितंबर 2009
जून 2020 InternetArchiveBot
भारद्वाज्
अत्री
जीवन शैली
मेघवंशियों का पेशा कृषि और बुनाई था। वे वर्ष में दो फसलें लेते थे। शेष समय वे अन्य संबंद्ध गतिविधियों में व्यस्त रहते थे।मेघवंश एक सिंहावलोकन
आर.पी. सिंह
रवि प्रकाशन
2009
42
8180330176 राजस्थान के देहाती इलाके में अभी भी इस समुदाय के कई लोग अभी भी छोटी बस्तियों में रहते हैं। उनके आवास गारे की ईंट से बनी गोलाकार झोपडि़याँ हैं जिन पर रंगीन ज्यामितीय डिजाइन चित्रित होते हैं और जिन्हें विस्तृत जड़ाऊ दर्पण कार्य से सजाया गया होता है।http://www.trekearth.com/gallery/Asia/India/West/Gujarat/Ludiya/photo816808.htm
अ मेघवाल गर्ल
ट्रेक अर्थ
15 अगस्त 2009
https://web.archive.org/web/20100615201801/http://www.trekearth.com/gallery/Asia/India/West/Gujarat/Ludiya/photo816808.htm
15 जून 2010
live
बीते समय में मेघवाल समुदाय का मुख्य व्यवसाय कृषिश्रम था, बुनाई, विशेष रूप से खादी और काष्ठकार्य था और ये अभी भी उनके मुख्य व्यवसायों में हैं। महिलाएँ अपने कढ़ाई के काम के लिए प्रसिद्ध हैं और ऊन तथा सूती कपड़े की बढ़िया बुनकर हैं।http://www.indiaenvironmentportal.org.in/node/1922
वीविंग अ कामन डेस्टिनी
जून 1992
सेंटर फार साइंस एंड एन्वायरनमेंट
15 अगस्त 2009
https://web.archive.org/web/20110718070626/http://www.indiaenvironmentportal.org.in/node/1922
18 जुलाई 2011
live
http://www.craftrevival.org/CraftArtDetails.asp?CountryCode=India&CraftCode=003678
एंशियंट लाक डाइंग प्रैक्टिसिस ऑफ कच्छ एंड इट्स रिवाइवल बाइ द वंकर श्यामजी वालीजी ऑफ बुजोडी
क्राफ्ट रिवाइवल ट्रस्ट
15 अगस्त 2009
https://web.archive.org/web/20110719043943/http://www.craftrevival.org/CraftArtDetails.asp?CountryCode=India&CraftCode=003678
19 जुलाई 2011
dead
मेघवंशियों में से कुछ राजस्थान के गाँवों से मुंबई जैसे बड़े शहरों चले गए हैं। सन् 1936 में बी.एच मेहता, शोधकर्ता ने एक अध्ययन में कहा कि गाँव के मनहूस जीवन से बचने के लिए उनमें से अधिकतर शहरों में गए और महसूस किया कि शहर में भीड़ और अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों के बावजूद उनके जीवन में सुधार हुआ है।रिसर्च इन सोशियोलॉजी: एब्सट्रैक्ट्स ऑफ एम.ए. एंड पीएच.डी. टिस्सरटेशंस कंप्लीटिड इन द डिपार्टमेंट ऑफ सोशियालॉजी, मुंबई विश्वविद्यालय
27ff
धीरेंद्र नरैन, यूनीवर्सिटी ऑफ मुंबई. समाजशास्त्र विभाग, इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च
कंसेप्ट पब्लिशिंग कंपनी
1989
8170222354 आज मेघवालों में शिक्षितों की संख्या बढ़ी है और सरकारी नौकरियाँ प्राप्त कर रहे हैं। पंजाब में विशेषकर अमृतसर, जालंधर और लुधियाना जैसे शहरों में वे खेल, हौज़री, शल्य-चिकित्सा उपकरणों और धातुओं से वस्तुओं का उत्पादन करने वाले कारखानों में मज़दूरी कर रहे हैं। उनमें से कुछ का अपना स्वयं का व्यवसाय या लघु उद्योग है। जीवन यापन के लिए छोटा व्यापार और सेवा इकाइयाँ उनका प्रमुख सहारा है।http://joe.sagepub.com/cgi/content/abstract/19/1/43
इन्नोवेशंस, एंट्रप्रेन्योरशिप एंड डिवेलपमेंट
जर्नल ऑफ एंट्रप्रेन्योरशिप
11 अप्रैल 2010
https://web.archive.org/web/20100308094359/http://joe.sagepub.com/cgi/content/abstract/19/1/43
8 मार्च 2010
dead
जम्मू-कश्मीर में भूमि सुधारों के सफल कार्यान्वयन के बाद उनमें से कई छोटे किसान बन गए। पाकिस्तान से भारत में आने के बाद मेघों को भी अलवर (राजस्थान) में बंजर भूमि में दी गई। बाबू गोपी चंद ने उन्हें इस प्रक्रिया में बहुत सहायता की। यह अब उपजाऊ भूमि है।
उनके प्रधान भोजन में चावल, गेहूं और मक्का शामिल है और दालों में मूंग, उड़द और चना. वे शाकाहारी नहीं हैं। जम्मू में एक मेघ धार्मिक नेता भगता साध (केरन वाले) के नेतृत्व में एक बहुत बड़ा मेघ समूह शाकाहारी बना। अगस्त 2009
पारंपरिक मेघवाल समाज में महिलाओं का दर्जा कमतर है। परिवारों के बीच बातचीत के माध्यम से यौवन से पहले ही विवाह तय कर दिए जाते हैं। शादी के बाद पत्नी पति के घर में आ जाती है। प्रसव के समय वह मायके में जाती है। पिता द्वारा बच्चों का उत्तर दायित्व लेने और पत्नी को मुआवजा देने के बाद तलाक की अनुमति देने की परंपरा है। किसी बात के लिए नापसन्द व्यक्ति का हुक्का-पानी बंद करने की एक सामाजिक बुराई मेघों में है। इसे तुच्छ मामलों में भी इस्तेमाल किया जाता है। इससे मेघ महिलाओं के लिए सामाजिक कठिनाइयाँ बढ़ी हैं।
धर्म
मेघवालों के प्रारम्भिक इतिहास और उनके धर्म के बारे प्राचीन प्रमाण मिलते है। ये हिंदू धर्म की प्राचीन अनुसूचित जाति की एक उच्चतर जाति के रूप में मान्यता प्राप्त जाति है जो मेघ शिव और नाग (ड्रैगन के उपासक थे).मेघवंश एक सिंहावलोकन
आर.पी. सिंह
रवि प्रकाशन
2009
13
8180330176 मेघवाल राजा बली को भगवान के रूप में मानते हैं और उनकी वापसी के लिए प्रार्थना करते हैं। मेघवंश एक सिंहावलोकन
आर.पी. सिंह
रवि प्रकाशन
2009
60 and 16
8180330176 कई सदियों से केरल में यही प्रार्थना ओणम त्योहार का वृहद् रूप धारण कर चुकी है। वे एक नास्तिक और समतावादी ऋषि चार्वाक के भी मानने वाले थे। आर्य चार्वाक के विरोधी थे। दबाव जारी रहा और चार्वाक धर्म का पूरा साहित्य जला दिया गया। मेघवंश एक सिंहावलोकन
आर.पी. सिंह
रवि प्रकाशन
2009
34
8180330176 इस बात का प्रमाण मिलता है कि 13वीं शताब्दी में कई मेघवाल इस्लाम की शिया निज़ारी शाखा के अनुयायी बन गए और कि निज़ारी विश्वास के संकेत उनके अनुष्ठानों और मिथकों में मिलते हैं।Rethinking India's oral and classical epics: Draupadī among Rajputs, Muslims, and Dalits
अल्फ हित्लेबीतेल
यूनीवर्सिटी ऑफ शिकागो प्रैस
1999
327ff
0226340511 अधिकांश मेगवाल हिंदू है, हालांकि कुछ इस्लाम या ईसाई धर्म जैसे अन्य धर्मों के भी अनुयायी हैं।
मध्यकालीन हिंदू पुनर्जागरण, जिसे भक्ति काल भी कहा जाता है, के दौरान राजस्थान के एक मेघवाल कर्ता राम महाराज, मेघवालों के आध्यात्मिक गुरु बने। एन्साइक्लोपीडिया ऑफ दलित्स इन इंडिया: वाल्यूम 3 मूवमेंट्स
संजय पासवान
ज्ञान पब्लिशिंग हाउस
2002
8178350343 कहा जाता है कि 19 वीं सदी के दौरान मेघ आम तौर पर कबीरपंथी थे जो संतमत के संस्थापक संत सत्गुरु कबीर (1488 - 1512 ई.) के अनुयायी थे। एन्साइक्लोपीडिया ऑफ दलित्स इन इंडिया
ममता राजावत
अनमोल पब्लिकेशंस प्रा. लि.
2004
8126120843
15 आज कई मेघवाल संतमत के अनुयायी हैं जो कच्चे रूप से जुड़े धार्मिक नेताओं का समूह है और जिनकी शिक्षाओं की विशेषता एक आंतरिक, एक दिव्य सिद्धांत के प्रति प्रेम भक्ति और समतावाद है, जो हिंदू जाति व्यवस्था पर आधारित गुणात्मक भेद और हिंदू तथा मुसलमानों के बीच गुणात्मक भेद के विरुद्ध है।वुडहेड, लिंडा एंड फ्लेचर, पॉल.
रिलिजियन इन द मॉडर्न वर्ल्ड: ट्रेडिशंस एंड ट्रांसफॉर्मेशंस
2001
71–72
राऊटलेज (यू॰के॰)
0-415-21784-9 वर्ष 1910 तक, स्यालकोट के लगभग 36000 मेघ आर्यसमाजी बन गए थे।मार्क जर्गंसमेयेर.
द रिलीजियस रिबेल्स इन द पंजाब: द सोशल वियंस ऑफ अनटचेबल्स
1988
298
अजंता पब्लिकेशन्स, दिल्ली
8120202082 भारत के एक सुधारवादी फकीर और राधास्वामी मत के एक गुरु बाबा फकीर चंद ने अपनी जगह सत्गुरू के रूप में काम करने के लिए भगत मुंशी राम को मनोनीत किया जो मेघ समुदाय से थे।
राजस्थान में इनके मुख्य आराध्य बाबा रामदेवजी हैं जिनकी वेदवापूनम (अगस्त - सितम्बर) के दौरान पूजा की जाती है। मेघवाल धार्मिक नेता गोकुलदास ने अपनी वर्ष 1982 की पुस्तक ‘मेघवाल इतिहास’, जो मेघवालों के लिए सम्मान और उनकी सामाजिक स्थिति में सुधार का प्रयास है और जो मेघवाल समुदाय के इतिहास का पुनर्निर्माण करती है, में दावा किया है कि स्वामी रामदेव स्वयं मेघवाल थे।http://cssaame.com/issues/18_1/SILAKHAN.pdf
इज़ गॉड एन अनटचेबल? ए केस ऑफ कास्ट कंफ्लिक्ट इन राजस्थान
डॉमिनीक-सिला ख़ान
कंपेरेटिव स्टडीज़ ऑफ साऊथ एशिया, अफ्रीका एंड द मिडल ईस्ट
14 अगस्त 2009
https://web.archive.org/web/20090105223853/http://cssaame.com/issues/18_1/SILAKHAN.pdf
5 जनवरी 2009
dead
गाँव के मन्दिरों में चामुंडा माता की प्रतिदिन पूजा की जाती है। विवाह के अवसर पर बंकरमाता को पूजा जाता है। डालीबाई एक मेघवाल देवी है जिसकी पूजा रामदेव के साथ-साथ की जाती है। भारत के जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हिमाचल, हरियाणा राज्यों में पूर्वजपूजा (एक प्रकार का श्राद्ध) की जाती है। जम्मू-कश्मीर में डेरे-डेरियों पर पूर्वजों की वार्षिक पूजा प्रचलित है।सितंबर 2009 कुछ मेघवार पीर पिथोरो की पूजा करते हैं जिसका मन्दिर मीरपुर खास के पास पिथोरो गाँव में है।द एन्साइक्लोपीडिया ऑफ इंडियन लिटरेचर (प्रथम भाग (A To Devo), भाग 1
अमरेश दत्ता
साहित्य अकेडेमी 2006
8126018038
केरन के बाबा भगता साध मेघों के धार्मिक नेता और आराध्य पुरुष थे जिन्होंने जम्मू-कश्मीर में मेघ समुदाय के आध्यात्मिक कल्याण के लिए कार्य किया।http://books.google.co.in/books?id=Th3Mu-_RwjQC&pg=PA247&lpg=PA247&dq=glossary+of+tribes+in+north+eastern+province+of+punjab&source=bl&ots=yTCtDJpCB2&sig=umFwauSk8wsRL8X4-54HO8y7P60&hl=en&ei=1F9TS8rcJY7k7AOUi4ikCg&sa=X&oi=book_result&ct=result&resnum=4&ved=0CBEQ6AEwAw#v=onepage&q=&f=false अ ग्लोसरी ऑफ द ट्राइब्स एंड कास्ट्स ... – गूगल बुक्स Books.google.co.in 23 फरवरी 2010. VOL.3 p.77-78 https://web.archive.org/web/20121024071446/http://books.google.co.in/books?id=Th3Mu-_RwjQC&pg=PA247&lpg=PA247&dq=glossary+of+tribes+in+north+eastern+province+of+punjab&source=bl&ots=yTCtDJpCB2&sig=umFwauSk8wsRL8X4-54HO8y7P60&hl=en&ei=1F9TS8rcJY7k7AOUi4ikCg&sa=X&oi=book_result&ct=result&resnum=4&ved=0CBEQ6AEwAw#v=onepage&q=&f=false 24 अक्तूबर 2012 live
बाबा मनमोहन दास ने बाबा भगता साध के उत्तराधिकारी बाबा जगदीश जी महाराज के निधन के बाद गुरु का स्थान ले लिया।
thumb|right|गाँव कलोई, ज़िला थारपारकर, सिंध, पाकिस्तान में एक मेघवाल महिला.
कला
वील : राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में घर की छोटी - मोटी चीजों को सुरक्षित रखने हेतु बनाई गई मिट्टी की महलनुमा चित्रित आकृति वील ' कहलाती है मेघवाल जाति की महिलाएँ इस कला में निपुण होती हैं ।
राजस्थान में मेघवाल महिलाएँ उनकी सुंदर और विस्तृत वेशभूषा और आभूषणों के लिए प्रसिद्ध हैं। विवाहित महिलाओं को अक्सर सोने की नथिनी, झुमके और कंठहार पहने हुए देखा जा सकता है। यह सब दुल्हन को उसकी होने वाली सास "दुल्हन धन" के रूप में देती है। नथनियाँ और झुमके अक्सर रूबी, नीलम और पन्ना जैसे कीमती पत्थरों से सुसज्जित होते हैं। मेघवाल महिलाओं द्वारा कढ़ाई की गई वस्तुओं की बहुत मांग है। अपने काम में वे प्राथमिक रूप से लाल रंग का प्रयोग करती हैं जो स्थानीय कीड़ों से उत्पादित विशेष रंग से बनता है। सिंध और बलूचिस्तान में थार रेगिस्तान और गुजरात की मेघवाल महिलाओं को पारंपरिक कढ़ाई और रल्ली बनाने का निपुण कारीगर माना जाता है। हाथ से की गई मोहक कशीदाकारी की वस्तुएँ मेघवाल महिलाओं के दहेज का एक हिस्सा होती हैं।http://www.trekearth.com/gallery/Asia/India/West/Gujarat/Dhordo/photo1083893.htm
मेघवाल हैंडीक्राफ्ट
ट्रैक अर्थ
14 अगस्त 2009
https://web.archive.org/web/20111014203115/http://www.trekearth.com/gallery/Asia/India/West/Gujarat/Dhordo/photo1083893.htm
14 अक्तूबर 2011
live
http://www.indiainfoweb.com/gujarat/tribes/meghwals.html
मेघवा्ल्स
इंडिया इन्फोवेब
14 अगस्त 2009
https://web.archive.org/web/20100128041517/http://www.indiainfoweb.com/gujarat/tribes/meghwals.html
28 जनवरी 2010
dead
एशियन एंब्राइड्री
जसलीन धमीजा, क्राफ्ट्स काउंसिल ऑफ इंडिया
अभिनव पब्लिकेशंस
2004
125
8170174503
प्रमुख लोग
कैलाश चन्द्र मेघवाल, पूर्व राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष
अर्जुन राम मेघवाल, केन्द्रीय मंत्री, भारत सरकार, सांसद, बीकानेर (राजस्थान)
रूपाराम मेघवाल - पूर्व जैसलमेर विधायक
चन्द्रकांता मेघवाल - पूर्व विधानसभा सदस्य
मंजू मेघवाल पूर्व विधायक राजस्थान महिला बाल विकास मंत्री (राज्य मंत्री)
विश्वनाथ मेघवाल वर्तमान विधान सभा सदस्य (खाजूवाला)
पितराम सिंह काला - विधायक पिलानी
सन्दर्भ
2
इन्हें भी देखें
सिंधु घाटी सभ्यता
असुर
मोहन जोदड़ो
बाहरी कड़ियाँ
श्रेणी:भारत की जनजातियाँ
श्रेणी:भारतीय उप जातियाँ
श्रेणी:मेघवाल
श्रेणी:राजस्थान के सामाजिक समुदाय
श्रेणी:भारतीय जाति