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महावीर के पूर्व भव
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जैन ग्रन्थ और पुराण आदि में तीर्थंकरों के पूर्व भव वर्णित है। इनमें से २४वे तीर्थंकर वर्धमान महावीर के पूर्व भव भी विशेष है। इन भवो यानी की पूर्व जन्मो का ‘महावीर चरित्र’ में बड़ा हिस्सा रहता है। हालांकि इनको कुछ लेखक मिथक मानते है।Life of Mahavira https://www.google.co.in/books/edition/Life_of_Mahavira/Tju7Rlc6P3EC?hl=en en 1908 5
जैन पुराण जैसे उत्तरपुराण के अनुसार इनकी आत्मिक उद्धार की कहानी एक भील की पर्याय से शुरू होती है|Jain 2011 444-456
पुरुरवा भील
किसी देश में महावीर का जीव एक भील था। वहाँ वह किसी मुनिराज को हिरण समझ कर बाण चलाने ही वाला था कि उसकी पत्नी ने उसे रोका। वह उनके पास गया और आजीवन मधु मांस मदिरा का त्याग किया। इसके कारण पहले स्वर्ग में देव हुआ।Jain 2011 444
मारीच और मत
इस स्वर्ग से वह जीव ऋषभदेव के पुत्र भरत चक्रवर्ती का पुत्र मारीच हुआ। जब ऋषभदेव ने दीक्षा ली तो मारीच और १००० राजाओ ने भी दीक्षा अंगीकार की पर वह दिगंबर रूप में ना रह सके| ऋषभ देव के केवल ज्ञान प्राप्ति के बाद राजा तो सब पुनः दीक्षित हो गए पर मारीच परिवार्जक रहा।https://www.google.co.in/books/edition/Riṣabha_Deva_the_Founder_of_Jainism/OGsrAAAAIAAJ?hl=en&gl=IN Jain C. R. 1929 Riṣabha Deva, the Founder of Jainism Indian Press 113,138
इसके बाद कई भव तक स्वर्ग जाकर वापस मानुष बना पर अपने परिवार्जक मत को फैलाता रहा।Jain 2011 ४४५-४४९ स्वर्ग जाकर फिर विषाकनंदी राजा हुआ पर एक उपवन पर चचेरे भाई से लड़ाई कर, वैराग्य धारण कर दिगम्बर मुनि बन गया। वहाँ निदान बंध किया।Jain 2011 ४५०-४५२
त्रिपृष्ठ नारायण
इस अवसर्पिणी काल का प्रथम नारायण हुआ| उसी भाई के जीव को मारा और नर्क गया।
इन्हें भी देखें
ब्रह्माण्ड (जैन धर्म)
सन्दर्भ
स्रोत
Jain Pannālāl गुणभद्राचार्य जी विरचित उत्तर पुराण भारितय ज्ञानपीठ 2011