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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

हरमुख

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हरमुख Harmukh Mount Harmukh.JPG हरमुख 5142 http://peaklist.org/WWlists/ultras/karakoram.html संग्रहीत प्रति 21 फ़रवरी 2013 https://web.archive.org/web/20150924070238/http://www.peaklist.org/WWlists/ultras/karakoram.html 24 सितंबर 2015 live 1606 Jammu and Kashmir right गान्दरबल ज़िला, जम्मू और कश्मीर हिमालय 34 24 00 N 74 54 30 E type:mountain_region:IN_scale:100000 dms inline,title 1856थोमस मोन्टगोमरी (ब्रिटेन) अरीन बांडीपूर हरमुख भारत के जम्मू व कश्मीर राज्य के गान्दरबल ज़िले में सिन्द नदी (सिन्धु नदी से भिन्न) और किशनगंगा नदी के बीच स्थित एक ५,१४२ मीटर (१६,८७० फ़ुट) ऊँचा पहाड़ है। यह गंगाबल झील से उभरता हुआ प्रकट होता है और हिन्दुओं द्वारा पवित्र माना जाता है।Geography of Kashmir https://web.archive.org/web/20121030215230/http://www.koausa.org/Geography/ch1.5.html 30 अक्तूबर 2012 , kousa.org, Accessed 2012-04-24 इसे चढ़ने का सबसे आसान मार्ग बांडीपूर ज़िले के आरीन क्षेत्र से जाता है। पवित्रता हरमुख का मतलब 'शिव का मुख' है और यह पर्वत स्थानीय हिन्दुओं द्वारा शिवजी का ठिकाना माना जाता है।Territory of Desire: Representing the Valley of Kashmir, Ananya Jahanara Kabir, pp. 91, U of Minnesota Press, 2009, ISBN 9780816653560, ... The photograph of the peak in the Pir Panjal called the Harmukh (Face of Shiva) that forms the frontispiece of the inaugural volume in the Kashmir Series demonstrates the wider utility of these transformations ... इसे कभी-कभी 'कश्मीरी कैलाश' भी कहा जाता था।The birth-place of Kalidasa, with notes, references and appendices, Lakshmi Dhar, University of Delhi, Imperial Book Depot Press, 1926, ... It must be situated in the valley below the Kashmirian 'Kailasa' or the Harmukh mountain, on the bank of the Ganga, not far away from the residence of Siva ... कश्मीरी भाषा की 'हरमुखुक गोसोनी' नामक धार्मिक कथा के अनुसार: एक बार किसी संन्यासी ने हरमुख के शिखर पर पहुँचकर शिवजी के चहरे के दर्शन करने की कोशिश करी। बारह लम्बे बरसों तक वह ऊपर पहुँचने का प्रयत्न करता रहा लेकिन नाकामयाब रहा। एक दिन उसने एक गुज्जर चरवाहे को शिखर से उतरते देखा। जब गुज्जर उसके पास पहुँचा तो संन्यासी ने गुज्जर से पूछा कि उसे ऊपर क्या दिखा। गुज्जर ने बताया कि वह अपनी खोई हुई बकरी ढूंढ रहा था और शिखर पर उसने एक दम्पति मिया-बीवी को एक गाय को मनुष्य के कोपले (शिर) में दूध दोहते हुए देखा। दम्पति ने उसे कुछ दूध पीने को दिया लेकिन गुज्जर ने पीने से इन्कार कर दिया। जब उसने दम्पति से विदा ली तो उन्होने उसके माथे पर थोड़ा दूध मल दिया। संन्यासी ने यह सुना तो उसने ख़ुशी से आगे बढ़कर गुज्जर के माथे से कुछ दूध चाट लिया। चाटते ही संन्यासी को मुक्ति मिल गई और वह चकित गुज्जर की नज़रों से सामने से ग़ायब हो गया।http://www.koausa.org/Crown/marvels.html Some Marvels of Kashmir 21 फ़रवरी 2013 https://web.archive.org/web/20130509155818/http://koausa.org/crown/marvels.html 9 मई 2013 dead संस्कृति में हरमुख का उल्लेख कई कश्मीरी रचनाओं में मिलता है। इसका एक उदहारण प्रसिद्ध कश्मीरी प्रेम व भक्ति गीत "हरमुख बरतल" है: कश्मीरीहिन्दी अनुवादहरमुख बर तल ज़ागेय मऽदानो, यि दपहम ति लागयो। पोश दपहम, गोलाब लागेय मऽदानो। यि दपहम ति लागयो।हरमुख के द्वार पर तुम्हारी प्रतीक्षा करूँगा, जो मांगोगे वह अर्पण करूँगा। फूल मांगोगे, गुलाब अर्पण करूँगा। जो मांगोगे वह अर्पण करूँगा। इन्हें भी देखें गान्दरबल ज़िला कृशनसर किशनगंगा नदी सिन्द नदी बाहरी जोड़ हरमुख बरतल, गीत का एक यूट्यूब विडियो सन्दर्भ श्रेणी:हिन्दू तीर्थ स्थल श्रेणी:धार्मिक पर्वत स्थल श्रेणी:भारत के पर्वत श्रेणी:गान्दरबल ज़िला श्रेणी:जम्मू और कश्मीर के पर्वत श्रेणी:हिमालय के पाँच हज़ारी