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सिस्टेमा नेचुरा
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सिस्टेमा नेचुरा Systema_Naturae_cover.jpg 1758 में प्रकाशित सिस्टेमा नेचुरा के 10वें संस्करण का लैटिन मुख्य पृष्ठ कार्ल लीनियस द्वारा रचित 'सिस्टेमा नेचुरा' के अत्यंत महत्वपूर्ण 10वें संस्करण (1758) का मुख्य पृष्ठ। कार्ल लीनियस लैटिन जीव विज्ञान, वर्गिकी, वनस्पति विज्ञान, प्राणी विज्ञान वैज्ञानिक ग्रंथ 1735 (प्रथम संस्करण), 1758 (10वाँ संस्करण) 11 पृष्ठ (प्रथम संस्करण), 1300+ पृष्ठ (13वाँ संस्करण)
सिस्टेमा नेचुरा, जिसका पूरा नाम सिस्टेमा नेचुरे पर रेग्ना ट्रिया नेचुरे... (प्रकृति के तीन जगतों के माध्यम से प्रकृति की प्रणाली) है, महान स्वीडिश वनस्पतिशास्त्री, प्राणी विज्ञानी और चिकित्सक कार्ल लीनियस द्वारा रचित एक अत्यंत ऐतिहासिक और युग-प्रवर्तक वैज्ञानिक ग्रंथ है।https://www.britannica.com/topic/Systema-Naturae Systema Naturae Encyclopedia Britannica 1735 में लैटिन भाषा में पहली बार प्रकाशित हुई इस पुस्तक ने आधुनिक जैविक वर्गीकरण और 'वर्गिकी' की मजबूत नींव रखी। इस ग्रंथ के माध्यम से ही लीनियस ने पहली बार प्राकृतिक दुनिया को व्यवस्थित करने का एक सुसंगत और मानकीकृत तरीका दुनिया के सामने प्रस्तुत किया।
जब 1735 में इसका पहला संस्करण प्रकाशित हुआ था, तब यह केवल 11 पृष्ठों की एक छोटी सी पुस्तिका थी। लेकिन जैसे-जैसे लीनियस दुनिया भर से एकत्र किए गए पौधों और जानवरों के नमूनों का अध्ययन करते गए, इस पुस्तक का विस्तार होता गया। इसका 10वाँ संस्करण (1758) विज्ञान के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसी संस्करण में लीनियस ने जानवरों के लिए पहली बार 'द्विपद नामकरण' प्रणाली को सार्वभौमिक रूप से लागू किया था।https://www.linnean.org/learning/who-was-linnaeus/linnaeus-and-race Carl Linnaeus: Systema Naturae The Linnean Society of London आज जंतु विज्ञान में किसी भी प्रजाति के वैज्ञानिक नामकरण की शुरुआत आधिकारिक तौर पर इसी 10वें संस्करण (1 जनवरी 1758) से मानी जाती है।
'सिस्टेमा नेचुरा' में लीनियस ने संपूर्ण प्रकृति को तीन मुख्य 'जगतों' में विभाजित किया था: पशु जगत, पादप जगत, और खनिज जगत। इन जगतों को आगे वर्गों, गणों, वंशों, और प्रजातियों के पदानुक्रम में बांटा गया था।https://ucmp.berkeley.edu/history/linnaeus.html Carl Linnaeus (1707-1778) University of California Museum of Paleontology उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि लंबे और भ्रमित करने वाले वर्णनात्मक नामों को हटाकर, प्रत्येक जीव को एक सरल दो-शब्दों वाला लैटिन नाम (जैसे वंश और प्रजाति) देना था। उदाहरण के लिए, उन्होंने मनुष्यों को प्राइमेट्स वर्ग में रखा और हमें होमो सेपियन्स नाम दिया। हालांकि समय के साथ विज्ञान ने लीनियस के वर्गीकरण में कई सुधार किए हैं (चार्ल्स डार्विन के विकासवाद के सिद्धांत और आधुनिक आनुवंशिकी के बाद), लेकिन जीवों के नामकरण की जो मानक प्रणाली उन्होंने 'सिस्टेमा नेचुरा' में स्थापित की थी, वह आज भी पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों द्वारा उपयोग की जाती है।
सन्दर्भ
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बाहरी कड़ियाँ
बायोडायवर्सिटी हेरिटेज लाइब्रेरी (BHL) पर 'सिस्टेमा नेचुरा' के 10वें संस्करण का मूल डिजिटल स्कैन
एन्साइक्लोपीडिया ब्रिटैनिका पर 'सिस्टेमा नेचुरा' का महत्व
लिनियन सोसाइटी ऑफ लंदन (Linnean Society) की आधिकारिक वेबसाइट
श्रेणी:लैटिन साहित्य