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कापुचीनो
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जनवरी 2010
thumb|250px|क्लासिक कापुचीनो
कापुचीनो यह एक इटालियन कॉफ़ी पेय है जो एस्प्रेसो, गर्म दूध और भाप से गाढ़ा किये दूध (steamed milk) के झाग से बनता है। यह नाम कापुचिन फ्रायर्स से पड़ा है जो उनकी आदतों के रंग से जुड़ा है।http://www.nellositaly.com/the-culture-of-italian-coffee.html इतालवी कॉफी की संस्कृति 20 दिसंबर 2010 https://web.archive.org/web/20110305132356/http://www.nellositaly.com/the-culture-of-italian-coffee.html 5 मार्च 2011 dead
परिभाषा
कापुचीनो एक ऐसी कॉफ़ी है जिसके ऊपर झागदार दूध डाला जाता है। इसे भाप बनाने वाली एस्प्रेसो मशीन में बनाया जाता है। पहले एस्प्रेसो कॉफ़ी को कप के बिलकुल नीचे एक-तिहाई तक डाला जाता है और फिर उसमें उतनी ही मात्रा में गर्म दूध मिलाया जाता है। फिर ऊपरी एक-तिहाई हिस्से में, एक या दो मिनट पहले तैयार किये गए गाढ़े दूध का झाग मिलाया जाता है, इस झाग को अक्सर बड़े कलात्मक तरीके से ऐसे सजाया जाता है कि यह एक नुकीले टीले की तरह दिखाई दे। अक्सर छिला हुआ चॉकलेट, कच्ची चीनी, दालचीनी और अन्य मसालों को पूर्णतया तैयार किये पेय के ऊपर छिड़क कर सजावट की जाती है। फिर कापुचीनो का सेवन एक छोटे चम्मच से किया जाता है।
परंपरागत रूप से बनने वाली कापुचीनो कॉफ़ी में, जैसी यूरोप और अमरीका के पेशेवर कॉफ़ी हाउस में मिलती है, एस्प्रेसो कॉफ़ी, दूध/झाग की मात्रा लगभग एक समान होती है150 - 180 mL 0 on. अमरीका में व्यावसायिक कॉफ़ी चेन्स में कापुचीनो को अक्सर एक 360 mL 0 onनशीले या बड़े पेय के रूप में पेश किया जाता है।
इतिहास
कैपुचिनो बनाने के लिए उपयोग किये जाने वाले एस्प्रेसो मशीनों को 20 वीं सदी में पहली बार प्रस्तुत किया गया जब मिलान के लुइगी बेज़ेरा ने 1901 में सबसे पहले इसे पेटेंट के लिए दाखिला करवाया.एक एस्प्रेसो समयरेखा https://web.archive.org/web/20110717061215/http://www.timelineindex.com/content/view/390 17 जुलाई 2011 timelineindex.com 19वीं सदी की शुरुआत में ही, इटली में कैपुचिनो का विकास हुआ और इसकी लोकप्रियता में भी खूब बढ़ोतरी हुई जब कैफ़े और रेस्तरां में उपयोग की जाने वाली बड़ी-बड़ी एस्प्रेसो मशीनों में, विश्व युद्ध II के दौरान और उसके बाद भी काफ़ी सुधार किया गया, खासकर तब जब 1948 में गागिया नामक इटालियन कंपनी ने आधुनिक, उच्च-दबाव वाली एस्प्रेसो मशीन प्रस्तुत की। 1950 वें दशक तक तो इस पेय का वर्तमान रूप विकसित हो चुका था।
इटली में कैपुचिनो को सुबह के पेय के रूप में पिया जाता है और सुबह के 11.00 बजे के बाद तो लोग इसे बहुत कम पीते हैं। युनायटेड किंग्डम में, चूंकि अंग्रेज़ दूध वाली कॉफ़ी पीना पसंद करते हैं इसलिए शुरू-शुरू में कापुचीनो के रूप में एस्प्रेसो कॉफ़ी को काफ़ी लोकप्रियता मिली, लेकिन इस पेय की अद्भूत बनावट का आनंद और इसके स्वाद का मज़ा ज़्यादा लंबे समय तक लेने की इच्छा को पूरा करने के लिए कैफ़े इसकी मंज़िल बने। Morris 2007
सामग्रियां
thumb|right|250px|लेते आर्ट हार्ट के साथ "गीले" कापुचीनो
एस्प्रेसो कॉफ़ी के एक हिस्से के अलावा, कापुचीनो बनाने की विधि में सबसे महत्त्वपूर्ण बात है दूध की बनावट और उसका तापमान. कापुचीनो बनाने के लिए जब बरिस्ता (कॉफ़ी बनाने वाला व्यक्ति) दूध को भाप में उबालता है तब दूध में हवा के बहुत ही बारीक बुलबुले छोड़े जाते हैं जिससे माइक्रोफ़ोम (microfoam) बनता है और दूध को एक मखमली बनावट मिलती है। परंपरागत रूप से बनने वाली कापुचीनो में एस्प्रेसो कॉफ़ी के ऊपर बरिस्ता गर्म झागदार दूध डालता है जिससे पेय के ऊपर 2 सें.मी. (3/4 इंच) जितनी मोटी दूध की झागदार परत बन जाती है। इन मिश्रणों की विविधता के नाम हैं: कापुचीनो कायरो (सफ़ेद कापुचीनो, जो गीले कापुचीनो के नाम से भी जाना जाता है) (cappuccino chiaro (white cappuccino)) जिसमें दूध की मात्रा सामान्य से अधिक होती है और कापुचीनो स्करो (गहरा कापुचीनो, जो सूखा कापुचीनो के नाम से भी जाना जाता है) (capppuccino scuro (dark cappuccino)) जिसमें गाढ़े दूध की मात्रा सामान्य से कम होती है।
झाग को सही अनुपात में बनाने के लिए दूध को भाप में उबालते समय उस पर बारीकी से नज़र रखना बहुत ज़रूरी है, इसीलिये एस्प्रेसो से बनने वाले सभी पेयों में कापुचीनो को बिलकुल सही-सही बनाना बहुत ही कठिन माना जाता है। एक कुशल बरिस्ता एस्प्रेसो कॉफ़ी के ऊपर विभिन्न कलात्मक रूप से दूध डालकर अपनी कुशलता का परिचय दे सकता है।
लोकप्रियता
परंपरागत तौर पर, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण अमरीका और उत्तर अमरीका के कुछ प्रदेशों में रहने वाले लोग कापुचीनो के स्वाद को बेहद पसंद करते थे। 1990 के दशक के मध्य तक उत्तर अमरीका में उच्च दर्जे के कॉफ़ी हाउस उभरने लगे और कापुचीनो उत्तर अमरीकी लोगों को अधिक व्यापक रूप से उपलब्ध होने लगा।
इटली और पूरे यूरोप महाद्वीप में, परंपरागत रूप से कापुचीनो का सेवन सुबह के नाश्ते में कुछ मीठी पेस्ट्री के साथ किया जाता था। साधारणत: यूरोपीय लोग कापुचीनो का सेवन सुबह के नाश्ते के अलावा किसी अन्य भोजन के साथ नहीं करते, बल्कि पूरे दिन भर तथा रात के भोजन के बाद एस्प्रेसो पीना पसंद करते हैं। हालांकि हाल ही के कुछ वर्षों में यूरोपीय लोगों ने पूरे दिन भर कापुचीनो पीना शुरू कर दिया है। विशेष रूप से पश्चिमी यूरोप में (यू॰के॰, आयरलैंड, नीदरलैंड, जर्मनी, बेल्जियम) दोपहर में कैफ़े और छतों पर बैठकर और रात के भोजन के बाद रेस्तरां में कापुचीनो का लुत्फ़ उठाना बहुत ही लोकप्रिय दिनचर्या है। संयुक्त राज्य अमरीका में, 1990 के दशक के अंतिम दौर और 20वीं सदी के प्रारंभ में अमेरिकन कॉफ़ी उद्योग में हुई वृद्धि के साथ-साथ विविध प्रकार के कापुचीनो भी अत्यंत लोकप्रिय हुए, खासकर पेसिफ़िक नौर्थवेस्ट (Pacific Northwest) के शहरी क्षेत्रों में.http://blog.gourmet-coffee-zone.com/2008/03/07/the-pacific-northwest-coffee-culture-central संग्रहीत प्रति 20 दिसंबर 2010 https://web.archive.org/web/20100115122122/http://blog.gourmet-coffee-zone.com/2008/03/07/the-pacific-northwest-coffee-culture-central/ 15 जनवरी 2010 dead
आइस्ड (ठंडा) कापुचीनो
ठंडे कापुचीनो को कापुचीनो फ्रेडो (Cappuccino Freddo) कहते हैं, जिसमें अकसर पेय के ऊपर ठंडा झागदार दूध डाला जाता है। यह पेय इटली के उन क्षेत्रों में व्यापक रूप से उपलब्ध है जहां इस पेय में बर्फ़ नहीं डाली जाती. उदहारण के लिए, रोम में हर 'बार' (मधुशाला) में इस पेय को पहले से ही तैयार करके रखा जाता है। पर उत्तरी शहरों में, जैसे मिलान में, कापुचीनो फ्रेडो का मिलना लगभग असंभव सी बात है। बल्कि इसके बदले में "जिलेटो दा बेरे" ("gelato da bere") (जिलेटो और एस्प्रेसो का गाढ़ा मिश्रण) या "शकेरातो" ("shakerato") (एस्प्रेसो और बर्फ़ को खूब अच्छी तरह हिलाकर बनाया गया पेय) इससे कहीं ज़्यादा लोकप्रिय हैं। यह शब्द अब पूरे भूमध्य क्षेत्र (Mediterranean region) में भी प्रचलित हो चुका है, यहां पेय को पेश करने के कुछ क्षण पहले झागदार दूध मिलाया जाता है, जो विधि अकसर मूलतः इटालियन विधि से अलग है। उत्तर अमरीका में, यदि "कापुचीनो फ्रेडो" या "आइस्ड कापुचीनो" को, इसकी ख़ासियत, झागदार दूध के बगैर पेश किया जाए तो यह नाम अयथार्थ माना जा सकता है। उदहारण के लिए, 'स्टारबक्स' (Starbucks) में, झागदार दूध के बगैर बनाए पेय को 'आइस्ड लात्ते' (iced latte) कहते हैं। ठंडे दूध को भी विभिन्न तरीक़ों से झागदार बनाया जा सकता है।
21 वीं सदी के शुरू होने तक, 'स्टारबक्स' जैसे फ़ास्ट-फ़ूड चेन्स कापुचीनो को एक बदले रूप में, अर्थात बड़े और अलग-अलग नाप में पेश करने लगे थे600 ml 0 on. लेकिन पिछले कुछ वर्षों से, प्रमुख स्वतंत्र कैफ़े कापुचीनो को सिर्फ़ उसके पारंपरिक नाप150 - 180 ml 0 on के अनुसार पेश करने लगे हैं- जिससे उन्हें अन्य कैफ़े और बड़े फ़ास्ट-फ़ूड चेन्स से एक अलग पहचान मिलती है।August 2008 'स्टारबक्स' में एक "लघु" ("short") कापुचीनो भी मिलती है240 ml 0 on, लेकिन उसका ज़िक्र न तो मेनू में मिलता है, न ही वेबसाइट पर.
कापुचीनो के लिए सुविधाजनक दुकान
April 2009
कापुचीनो की व्यापक स्वीकृति के बाद सुविधाजनक दुकानों (convenience stores) जैसी अनेक प्रतिष्ठानों का जन्म हुआ और ये प्रतिष्ठान अपने ग्राहकों को कापुचीनो नाम का एक पेय पेश करने लगे। साधारणतः यह पेय मशीनों द्वारा, कोका मिश्रण से बने पेय की ही तरह, या तो तैयार मिश्रण से या डबल ब्रू किये (double-brewed) कॉफ़ी से बनाया जाता है। इस तरह बनाया गया पेय नियमित कापुचीनो से बिलकुल अलग होता है। सुविधाजनक दुकानों में उपलब्ध कापुचीनो की विशिष्टता यह होती है कि इसे एक हाई-स्पीड साय्क्लौनिक मिक्सिंग चेंबर (high-speed cyclonic mixing chamber) नामक मशीन में पहले ही से जमा रखे गर्म पानी से तैयार किया जाता है। मशीन को सक्रिय करने पर उसका व्हिपिंग इम्पेलर (whipping impeller) घूमने लगता है, तब सूखे पाउडर का मिश्रण और पानी को चेंबर में डाला जाता है, पूर्णतया तैयार पेय का गाढ़ापन इस बात पर निर्भर/नियंत्रित होता है कि पाउडर का मिश्रण कितनी जल्दी डाला गया। इस प्रक्रिया से झाग का निर्माण होना तो स्वाभाविक है। कुछ मशीनों में ऐसी सुविधा होती है कि छोटे-छोटे डिस्पोज़ेबल पाउचेज़ में संग्रहित विभिन्न स्वाद के तरल पदार्थ की थोड़ी सी मात्रा को कॉफ़ी में मिलाया जाता है और इस तरह एक ही मिक्सिंग चेंबर में 'मोका' (mocha) और 'भनीला' (vanilaa) जैसे अलग-अलग स्वाद वाले कापुचीनो तैयार किये जा सकते हैं। चूंकि सभी सामग्रियां या तो सूखे पाउडर के रूप में मिलतीं हैं या सड़न-रहित डिस्पोज़ेबल पैकेजिंग में, इसलिए इन पद्धतियों को बहुत ही कम रख-रखाव की ज़रूरत पड़ती है, सिर्फ़ मिक्सिंग चेंबर और इम्पेलर की सफ़ाई करनी पड़ती है। रख-रखाव को और कम करने के लिए, जब ऑपरेटर 'फिल बटन' (fill button) को दबाता है तो अधिकांश मशीनें बगैर पाउडर के भी कुछ क्षणों तक चलती रहतीं हैं ताकि मिक्सिंग चेंबर में साफ़ पानी बह सके और चेंबर की सफ़ाई हो जाए.
इसके अलावा, घरों में उपयोग के लिए तैयार मिश्रणों का उत्पादन भी किया जाता है। इन पाउडरों को गर्म पानी या दूध के साथ मिलाकर एक ऐसा पेय तैयार किया जा सकता है जैसा सुविधाजनक दुकानों में मिलता है; इन्हें अकसर "झागदार कॉफ़ी" ("frothed coffee") के नाम से विज्ञापित किया जाता है।
इसी तरह के पेय
कापुचीनो जैसे ही दूध और एस्प्रेसो से बने अन्य पेय में शामिल हैं:
कैफ़े माचियातो (Caffè macchiato) - बहुत ही कम दूध वाली एस्प्रेसो कॉफ़ी; कापुचीनो से छोटे नाप में उपलब्ध.
लात्ते (Latte) - ("कैफ़े लात्ते" का संक्षिप्त रूप) ज़्यादा दूध वाला बड़ा पेय, झाग की मात्रा में फेर-बदल होता है।
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
हाउ-टू-स्टीम मार्गदर्शन के साथ कॉफ़ीगीक
इटैलियन एस्प्रेसो नैशनल इंस्टिट्यूट
इंटरनैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ कॉफी टेस्टर्स
कॉफी टेस्टर्स, इंटरनैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ कॉफी टेस्टर्स के लिए एक मुफ्त न्यूज़लेटर जो एस्प्रेसो की गुणवत्ता, रासायनिक और संवेदी विश्लेषण, मार्केट दौर पर लेख की विशेषता करता है।
The Cappuccino Conquests. The Transnational History of Italian Coffee Jonathan Morris 2007 http://www.cappuccinoconquests.org.uk/assets/project-report.pdf , website, summar 20 दिसंबर 2010 https://web.archive.org/web/20090902143555/http://www.cappuccinoconquests.org.uk/assets/project-report.pdf 2 सितंबर 2009 dead
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