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सरफरोशी की तमन्ना
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अंगूठाकार|249x249पिक्सेल|सरफरोशी की तमन्ना गीत गाने वाले मशहूर क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल का चित्र (नोट – इस गीत का लेखक बिस्मिल अजीम आबादी)
सरफरोशी की तमन्ना भारतीय क्रान्तिकारी पंडित राम प्रसाद बिस्मिलhttp://www.bbc.com/hindi/india/2015/08/150814_sarfaroshi_ki_tammana_bismil_azeemabadi_sr संग्रहीत प्रति 17 अगस्त 2015 https://web.archive.org/web/20150817223220/http://www.bbc.com/hindi/india/2015/08/150814_sarfaroshi_ki_tammana_bismil_azeemabadi_sr 17 अगस्त 2015 live द्वारा गाई गई एक प्रसिद्ध देशभक्तिपूर्ण ग़ज़ल है जिसे बिहार के एक शायर बिस्मिल अजीमाबादी द्वारा लिखा गया था, जिसमें उन्होंने आत्मोत्सर्ग की भावना को व्यक्त किया था।ज़ब्तशुदा तराने (भूमिका) उनकी यह तमन्ना क्रान्तिकारियों का मन्त्र बन गयी थीआशारानी वोहरा पृष्ठ-१८ यह ग़ज़ल उर्दू छ्न्द बहरे-रमल में लिखी गई है जिसका अर्कान (छन्द-सूत्र) है: "फ़ाइलातुन, फ़ाइलातुन, फ़ाइलातुन, फ़ाइलुन"।Article #9 - Progressive Movement and Urdu Poetry https://web.archive.org/web/20110108045918/http://www.urdupoetry.com/articles/art9.html 8 जनवरी 2011 सरफरोशी की तमन्ना (खण्ड-२) पृष्ठ-६४ हिन्दी में यदि इसे देवनागरी लिपि में लिखा जाये तो यह परिवर्तित अष्टपदीय गीतिका छन्द के अन्तर्गत आती है इस छन्द का सूत्र है: "राजभा गा, राजभा गा, राजभा गा, राजभा"सरफरोशी की तमन्ना (खण्ड-२) पृष्ठ-६४।
Masterpieces of Patriotic Urdu Poetry. K. C. Kanda. नई दिल्ली, Sterling, 2005.A. G. Noorani, Urdu and Indian nationalism. Frontline 22(25) 2005. See http://www.flonnet.com/fl2225/stories/20051216001407800.htm https://web.archive.org/web/20110807133614/http://www.flonnet.com/fl2225/stories/20051216001407800.htm 7 अगस्त 2011 . Accessed March 22, 2008.। राम प्रसाद बिस्मिल »
अक्सर लोग इसे भगत सिंह जी की रचना बताते हैं लेकिन वास्तव में ये एक शायर बिस्मिल नजीराबादी द्वरा लिखी गई है। महान क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल ने उनका शे'र फांसी के फंदे पर झूलने के समय कहा था। चूँकि अधिकाँश लोग इसे राम प्रसाद बिस्मिल की आत्म कथा में पढ़ते है इसलिए इस रचना को बिस्मिल के पन्ने पर भी रखा गया है। -- कविता कोश टीम
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-क़ातिल में है
एक से करता नहीं क्यूँ दूसरा कुछ बातचीत,
देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है
ऐ शहीद-ए-मुल्क-ओ-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार,
अब तेरी हिम्मत का चरचा ग़ैर की महफ़िल में है
वक़्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमान,
हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है
खैंच कर लायी है सब को क़त्ल होने की उम्मीद,
आशिकों का आज जमघट कूच-ए-क़ातिल में है
बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वन्दे मातरम जैसे सुप्रसिद्ध गीत के बाद बिस्मिल अज़ीमाबादी की यह अमर रचना, जिसे गाते हुए न जाने कितने ही देशभक्त फाँसी के तख़्ते पर झूल गये, उसके वास्तविक इतिहास सहित नीचे दी जा रही है।
इतिहास
"सरफरोशी की तमन्ना" नामक देशभक्ति कविता है । इस कविता को राम प्रसाद बिस्मिल, भारतीय महान क्रान्तिकारी नेता ने मुकदमे के दौरान अदालत में अपने साथियों के साथ सामूहिक रूप से गाकर लोकप्रिय भी बनाया। 'बिस्मिल' की शहादत के बाद इसे स्वतन्त्रता सेनानियों की नौजवान पीढ़ी जैसे शहीद भगत सिंह तथा चन्द्रशेखर आजाद आदि के साथ भी जोड़ा जाता रहा है। [1] यह पहली एक जर्नल् "सबाह्" मै दिल्ली से प्रकाशित हुई ।
पाठ
उर्दू पाठ देवनागरी पाठسرفروشی کی تمنا اب ہمارے دل میں ہے
دیکھنا ہے زور کتنا بازوئے قاتل میں ہے
کرتا نہیں کیوں دوسرا کچھ بات چیت
دیکھتا ھوں میں جسے وہ چپ تیری محفل میں ہے
اے شہید ملک و ملت میں تیرے اوپر نثار
اب تیری ہمت کا چرچہ غیر کی محفل میں ہے
سرفروشی کی تمنا اب ہمارے دل میں ہے
وقت آنے دے بتا دیں گے تجھے اے آسمان
ہم ابھی سے کیا بتائیں کیا ہمارے دل میں ہے
کھینج کر لائی ہے سب کو قتل ہونے کی امید
عاشقوں کا آج جمگھٹ کوچئہ قاتل میں ہے
سرفروشی کی تمنا اب ہمارے دل میں ہے
ہے لئے ہتھیار دشمن تاک میں بیٹھا ادھر
اور ہم تیار ہیں سینہ لئے اپنا ادھر
خون سے کھیلیں گے ہولی گر وطن مشکل میں ہے
سرفروشی کی تمنا اب ہمارے دل میں ہے
ہاتھ جن میں ہو جنون کٹتے نہیں تلوار سے
سر جو اٹھ جاتے ہیں وہ جھکتے نہیں للکا ر سے
اور بھڑکے گا جو شعلہ سا ہمارے دل میں ہے
سرفروشی کی تمنا اب ہمارے دل میں ہے
ہم جو گھر سے نکلے ہی تھے باندھ کے سر پہ کفن
جان ہتھیلی پر لئے لو، لے چلے ہیں یہ قدم
زندگی تو اپنی مہمان موت کی محفل میں ہے
سرفروشی کی تمنا اب ہمارے دل میں ہے
یوں کھڑا مقتل میں قاتل کہہ رہا ہے بار بار
کیا تمناِ شہادت بھی کِسی کے دِل میں ہے
دل میں طوفانوں کی ٹولی اور نسوں میں انقلاب
ھوش دشمن کے اڑا دیں گے ہمیں روکو نہ آج
دور رہ پائے جو ہم سے دم کہاں منزل میں ہے
وہ جِسم بھی کیا جِسم ہے جس میں نہ ہو خونِ جنون
طوفانوں سے کیا لڑے جو کشتیِ ساحل میں ہے
سرفروشی کی تمنا اب ہمارے دل میں ہے
دیکھنا ہے زور کتنا بازوئے قاتل میں ہےसरफ़रोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है।
देखना है ज़ोर कितना, बाज़ु-ए-कातिल में है?
करता नहीं क्यूँ दूसरा कुछ बातचीत,
देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है
ऐ शहीदे-ए-मुल्क-ओ-मिल्लत, मैं तेरे ऊपर निसार,
अब तेरी हिम्मत का चर्चा ग़ैर की महफ़िल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
वक़्त आने पर बता देंगे तुझे, ए आसमान,
हम अभी से क्या बताएँ क्या हमारे दिल में है
खेँच कर लाई है सब को क़त्ल होने की उमीद,
आशिक़ोँ का आज जमघट कूच-ए-क़ातिल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है।
है लिये हथियार दुश्मन, ताक में बैठा उधर
और हम तैय्यार हैं; सीना लिये अपना इधर।
खून से खेलेंगे होली, गर वतन मुश्किल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है।
हाथ, जिन में हो जुनूँ, कटते नहीं तलवार से;
सर जो उठ जाते हैं वो, झुकते नहीं ललकार से।
और भड़केगा जो शोला, सा हमारे दिल में है;
सरफ़रोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है।
हम तो निकले ही थे घर से, बाँधकर सर पे कफ़न
जाँ हथेली पर लिये लो, बढ चले हैं ये कदम।
जिन्दगी तो अपनी महमाँ, मौत की महफ़िल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है।
यूँ खड़ा मक़्तल में क़ातिल, कह रहा है बार-बार;
क्या तमन्ना-ए-शहादत, भी किसी के दिल में है?
दिल में तूफ़ानों की टोली और नसों में इन्कलाब;
होश दुश्मन के उड़ा, देंगे हमें रोको न आज।
दूर रह पाये जो हमसे, दम कहाँ मंज़िल में है
वह जिस्म भी क्या जिस्म है, जिसमें न हो ख़ून-ए-जुनूँ;
तूफ़ानों से क्या लड़े जो, कश्ती-ए-साहिल में है।
सरफ़रोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है;
देखना है ज़ोर कितना, बाज़ु-ए-कातिल में है।
उर्दू लिपि यहाँ एक आधार की तरह उपयोग की गयी है, जो किसी भारतीय (अब पाकिस्तानी) कवि के हाथों लिखी गयी, फिलहाल संशोधित तथा विस्तृत की गयी है।Raajpoot's Blog υLтIмαтє Dσи http://blog.360.yahoo.com/blog-wWxvtx8jeqji1wacc3k5yKVJuaM-?cq=1&p=183 2007-07-21 जून 2020 InternetArchiveBot
पॉप संस्कृति में
इस कविता का प्रयोग मनोज कुमार की भगत सिंह के जीवन पर सन् १९६५ में बनी फिल्म शहीद में किया गया था। एक बार फिर इसका उपयोग (कुछ पंक्तियों में फेरबदल सहित) २००२ की हिन्दी फिल्म द लीजेण्ड ऑफ भगतसिंह के एक गीत के बोलों हेतु किया गया। कविता का उपयोग २००६ की फिल्म रँग दे बसन्ती में भी हुआ। इसके अतिरिक्त सन् २००९ में बनी अनुराग कश्यप की फिल्म गुलाल में काट-छाँट के साथ पैरोडी के रूप में किया गया।गुलाल में पीयूष मिश्रा द्वारा जो पंक्तियाँ सुनायी गयीं थीं उनमें तब के हिन्दुस्तान और आज के भारत दैट इज इण्डिया की स्थिति पर करारा कटाक्ष साफ झलकता है:सरफ़रोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है।
देखना है ज़ोर कितना, बाज़ु-ए-कातिल में है?
वक़्त आने दे बता, देंगे तुझे ऐ आसमाँ!
हम अभी से क्या बतायें, क्या हमारे दिल में है?
काश बिस्मिल आज आते, तुम भी हिन्दोस्तान में;
देखते यह मुल्क कितना, टेन्शन औ' थ्रिल में है।
आज का लड़का ये कहता' हम तो बिस्मिल थक गये;
अपनी आज़ादी तो भैया! लौंडिया के तिल में है।
आज के जलसों में बिस्मिल, एक गूँगा गा रहा;
और बहरों का वो रेला, नाचता महफ़िल में है।
हाथ की खादी बनाने, का ज़माना लद गया;
आज तो चड्ढी भी सिलती, इंग्लिशों की मिल में है।
वक़्त आने दे बता, देंगे तुझे ऐ आसमाँ!
हम अभी से क्या बतायें, क्या हमारे दिल में है?
सरफ़रोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है।
देखना है ज़ोर कितना, बाज़ु-ए-क़ातिल में है? सन्दर्भ
आशारानी व्होरा स्वाधीनता सेनानी लेखक-पत्रकार २००४ प्रतिभा प्रतिष्ठान १६६१ नेताजी सुभाष मार्ग नई दिल्ली ११०००२ ISBN 81-88266-23-X
आजादी की लडाई के जब्तशुदा तराने १९९८ प्रकाशन विभाग सूचना और प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार नई दिल्ली भारत
मदनलाल वर्मा 'क्रान्त' सरफरोशी की तमन्ना (४ खण्डों में) १९९७ प्रवीण प्रकाशन १/१०७९ ई महरौली नई दिल्ली-११००३० भारत
रामप्रसाद 'बिस्मिल' क्रान्ति गीतांजलि (संकलन, शोध एवं सम्पादन:मदनलाल वर्मा 'क्रान्त') २००६ प्रवीण प्रकाशन नई दिल्ली ISBN 81-7783-128-3
डॉ॰ मदनलाल वर्मा 'क्रान्त' स्वाधीनता संग्राम के क्रान्तिकारी साहित्य का इतिहास (३ खण्डों में) २००६ प्रवीण प्रकाशन ४७६०/६१ (दूसरी मंजिल) २३ अंसारी रोड दरियागंज नई दिल्ली-११०००२ ISBN 81-7783-122-4
विद्यार्णव शर्मा युग के देवता-बिस्मिल और अशफाक'' २००४ प्रवीण प्रकाशन १/१०७९ ई महरौली नई दिल्ली-११००३० ISBN 81-7783-078-3
इन्हें भी देखें
भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम
काकोरी काण्ड
राम प्रसाद 'बिस्मिल'
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है https://web.archive.org/web/20200929030744/https://shayaribazaar.com/sarfaroshi-ki-tamanna%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%AB%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B6%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%A4%E0%A4%AE%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%85%E0%A4%AC-%E0%A4%B9%E0%A4%AE/ 29 सितंबर 2020
बाहरी कड़ियाँ
गीत सरफरोशी की तमन्ना (यू ट्यूब पर)
साहित्य शिल्पी - बहर और छन्द (उर्दू गज़ल बनाम हिन्दी गज़ल-2) प्राण शर्मा
श्रेणी:देशभक्ति के गीत
श्रेणी:भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम