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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

रमेशचन्द्र मजुमदार

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R C Majumdar.jpg राम चंद्र मजूमदार कुलपति ढाका विश्वविद्यालय 1 जनवरी 1937 30 जून 1942 ए० एफ० रहमान महमूद हसन 1888 12 4 yes खंडापारा, गोपालगंज, बंगाल प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत 1980 2 11 1888 12 4 yes कोलकाता, पश्चिम बंगाल, भारत कलकत्ता विश्वविद्यालय भारतीय अध्यापक रमेशचन्द्र मजुमदार (१८८८- १९८०) भारत के प्रसिद्ध इतिहासकार और प्रोफेसर थे। वे प्रायः 'आर सी मजुमदार' नाम से अधिक प्रसिद्ध हैं। उन्होने ने प्राचीन भारत के इतिहास पर बहुत कार्य किया। उन्होने भारत की स्वाधीनता के इतिहास पर भी बहुत कुछ लिखा है। उन्होने कहा था कि 1857 का विद्रोह "न तो पहला, न ही राष्ट्रीय, न ही स्वतंत्रता संग्राम था" । वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख संघर्षरत और समाजसेवी थे। उन्होंने अपने जीवन में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिए अपना समर्पण और गरीबों के लिए समाजसेवा में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। आप हिस्ट्री एंड कल्चर ऑफ इंडियन पीपुल के महासम्पदाक थे। जीवनवृत्त रमेश चंद्र मजुमदार का जन्म 4 दिसंबर 1888 को खंडारपारा जिले के फरीदपुर में हुआ था जो अब बांग्लादेश में है। उन्होंने 1914 से कलकत्ता विश्वविद्यालय में इतिहास के प्रोफेसर के रूप में भी कार्य किया। उन्होने अपनी थीसिस "प्राचीन भारत में कॉर्पोरेट जीवन" के लिए डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की । 1921 में वे ढाका विश्वविद्यालय में इतिहास के प्रोफेसर नियुक्त हुए। १९३६ से १९४२ तक वे इस विश्वविद्यालय के उपकुलपति रहे। १९५० में वे काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के भारतविद्या महाविद्यालय के रेक्टर रहे। फिर उन्हें भारतीय इतिहास कांग्रेस का जनरल अध्यक्ष चुना गया और मानव जाति के इतिहास के लिए यूनेस्को द्वारा स्थापित 'मानव जाति के वैज्ञानिक और सांस्कृतिक विकास के इतिहास के लिए अंतर्राष्ट्रीय आयोग' (1950-1969) के उपाध्यक्ष भी बने। उन्होने शिकागो विश्वविद्यालय में भी शिक्षण कार्य किया। यूनेस्को के मानव इतिहास कमीशन के उपाध्यक्ष रहे। रामकृष्ण परमहंस तथा स्वामी विवेकानन्द के वे बड़े प्रशंसक थे। जब भारत सरकार ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास लिखने के लिए एक संपादकीय समिति की स्थापना की, तो वह इसके प्रमुख सदस्य बनाया गया। लेकिन, सिपाही विद्रोह पर तत्कालीन शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के साथ संघर्ष के बाद , उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ दी और अपनी पुस्तक, "द सिपाही म्यूटिनी एंड रिवोल्ट ऑफ़ 1857 " प्रकाशित की। स्वतंत्रता संग्राम पर उनके विचार उनकी पुस्तक "हिस्ट्री ऑफ द फ्रीडम मूवमेंट इन इंडिया" में पाए जाते हैं। स्वतंत्रता संग्राम में सहभागिता रमेश चंद्र मजूमदार ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अपनी सक्रिय भागीदारी के माध्यम से ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष किया और देश की स्वतंत्रता के लिए लड़ते हुए अपने जीवन का बलिदान दिया। उनका योगदान इस स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में महत्वपूर्ण है। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ जुड़कर स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ अनैतिक शुल्क आंदोलन, स्वदेशी आंदोलन, और विभाजन के खिलाफ आंदोलन में भाग लिया। उन्होंने विभिन्न स्तरों पर लोगों को जागरूक किया और उन्हें स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया। समाजसेवा रमेश चंद्र मजूमदार ने स्वतंत्रता संग्राम के बाद भी समाज की सेवा में अपना योगदान जारी रखा। उनकी समाजसेवा ने गरीब और वंचित लोगों को सहारा प्रदान किया और समाज को समर्थ बनाया। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, और गरीबी मुक्ति के क्षेत्र में विभिन्न समाजसेवा कार्यों में अपना समर्पण दिखाया। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में कई संगठनों और स्कूलों की स्थापना की जिनका मुख्य उद्देश्य गरीब और वंचित बच्चों को शिक्षा प्राप्त करना था। उन्होंने गरीब और असहाय लोगों के लिए निःशुल्क चिकित्सा सेवाएं भी प्रदान की। उनकी समाजसेवा ने समाज में सामाजिक न्याय, समानता, और सामाजिक समरसता के प्रति जागरूकता फैलाई। उनके कार्यों ने समाज को एक साथ लाने और समृद्धि को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाया। इतिहास लेखन डॉ मजुमदार ने अपने 10 खण्डों में प्रस्तावित History & culture of the Indian People में प्रकाशित “खंडो में प्रारम्भिक काल के महमूद कर आक्रमण तक का विवरण दिया है। स्वातंत्र्योत्तर भारतीय इतिहास लेखन में इसका महत्वपूर्ण स्थान है। इस पुस्तक में डॉ मजूमदार ने भारतीय इतिहास को तीन काल खंड में बांटा है। प्राचीन काल 1000 ई० तक, मध्य काल 1000 ई० से 1818 ई० तक तथा आधुनिक काल 1818 से आगे। इतिहास का लक्ष्य रमेशचन्द्र मजुमदार 1964 और 1965 में आयोजित भारतीय इतिहास कांग्रेस की कार्यवाही के अंश उद्धृत करते हैं, जो इसके पक्ष में तर्क देते हैं:रमेश चंद्र मजूमदार : भारतीय इतिहास के अनमोल रत्न इतिहास का मिशन और दायित्व मानवता को एक उच्च आदर्श और महान भविष्य की ओर ले जाना है। इतिहासकार वस्तुनिष्ठता की झूठी हठधर्मिता में अपना सिर छिपाकर इस जिम्मेदारी से नहीं बच सकता कि उसका काम केवल अतीत का इतिहास लिखना है। उनका कार्य मानवता की भावना को प्रकट करना और उसे आत्म-अभिव्यक्ति की ओर निर्देशित करना है। इतिहास को "मानव स्वभाव के भयानक विचलन, कायरतापूर्ण अपराधों, विभाजन और संघर्ष, पतन और पतन से बचना चाहिए, बल्कि जीवन के उच्च मूल्यों, संस्कृति की परंपराओं और मानवता की सेवा के लिए त्याग और समर्पण के महान कार्यों से बचना चाहिए। हालांकि, इतिहासकार के आलोचनात्मक स्पर्श की प्रतीक्षा करने वाला सबसे महत्वपूर्ण विषय राष्ट्रीय आंदोलन है, विशेष रूप से महात्मा गांधी के प्रभुत्व वाला युग, जिसने देश की स्वतंत्रता को बहाल किया। इतिहासकार को घटनाओं के बाहरी स्वरूप के पीछे जाना होगा और उस भावना का पता लगाना होगा जो उन्हें अनुप्राणित करती है, और इस तरह भारत की आत्मा को प्रकट करना होता है। केवल यही दृष्टिकोण सांप्रदायिक, क्षेत्रीय, भाषाई और वर्ग घृणा को भड़काने के खतरे से निपटने में मदद करेगा जो दुर्भाग्य से इतिहास लेखन को प्रभावित करता है। दूसरे शब्दों में,इतिहास को अशोक द्वारा बौद्ध धर्म के प्रसार को दर्ज करना चाहिए, लेकिन कलिंग युद्ध की भयावहता को नहीं, महमूद गजनी की तबाही और नरसंहार, औरंगजेब द्वारा मंदिरों के विनाश, जनरल डायर द्वारा जलियांवाला बाग नरसंहार, नरसंहार के सभी संदर्भों से सावधानीपूर्वक बचें। सांप्रदायिक दंगों के दौरान, इत्यादि। इन चूकों का कारण यह है कि ऐसी चीज़ें कुछ 'अस्वस्थ प्रवृत्तियाँ' लाती हैं जो राष्ट्रीय एकजुटता या अंतर्राष्ट्रीय शांति की अवधारणा के विरुद्ध होती हैं। प्रकाशन ऐन्सिएन्ट इण्डिया टू फ्रीडम ऑफ इंडिया (११ भागों में) The Struggle for Empire An Advanced History of India. London, 1960. ISBN 0-333-90298-X भारतीय जनगनेर संस्कृति ओ इतिहासAncient India ISBN 81-208-0436-8The sepoy Mutiny and the rebellion of 1857-1957भारतेर स्बाधीनता आन्दोलनेर इतिहास ISBN 0-8364-2376-3चम्पा ISBN 0-8364-2802-1Vakataka - Gupta Age Circa 200-550 A.D. ISBN 81-208-0026-5बांलार इतिहास ISBN 81-7646-237-3Main currents of Indian history ISBN 81-207-1654-XClassical accounts of IndiaHindu Colonies in the Far East'' ISBN 99910-0-001-1 Majumdar, R.C. India and South-East Asia I.S.P.Q.S. History and Archaeology Series Vol. 6 1979 ISBN 81-7018-046-5 सन्दर्भ इन्हें भी देखें भारतीय इतिहासकार भारत का इतिहास लेखन भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद बाहरी कड़ियाँ रमेश चन्द्र मजुमदार जीवनेर स्मृतिदीपे (जीवने के स्मृतिदीप में) (रमेशचन्द्र मजुमदार) बांग्लादेशेर इतिहास (बांग्लादेश का इतिहास) (रमेशचन्द्र मजुमदार) डॉ० आरसी मजूमदार ने स्वतंत्रता आंदोलन इतिहास लिखने के लिए दे दिया था इस्तीफा रमेशचंद्र मजूमदार : भारत के महानतम इतिहासकारों में से एक, जिन्हें कभी श्रेय नहीं दिया गया रमेश चंद्र मजूमदार : चलते फिरते इतिहास पुरुष, बन गए किंवदंती श्रेणी:भारतीय इतिहासकार