Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

नागपुरी भाषा

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

नागपुरी झारखण्ड, बिहार, छत्तीसगढ़ और उड़ीसा राज्यों में बोली जाने वाली एक हिन्द-आर्य भाषा है। isse नागजाति या नागवंश के शासन स्थापित होने पर (६४ ई.) इसकी राजभाषा नागपुरी, छोटानागपुर (झारखंड) में सर्वमान्य हुई। यह सदानो की मातृ भाषा है। नागपुरी को सदान के अतिरिक्त मुण्डा, खड़िया, उराँव, लोहरा, महली, चिक बड़ाईक आदि की यह सम्पर्क भाषा अर्थात सर्वसाधारण की बोली हो गई है। नागपुरी के पूर्व नाम, सदानी, सादरी, गँवारी भी प्रचलित रहे हैं। अब यह नागपुरी नाम पर विराम पा गई है। == नामोत्पत्ति == कई इतीहासकारों का मानना है कि ' सदान ' शब्द की उत्पत्ति ' निषाध ' शब्द से हुई है। इस क्षेत्र में नागवंशी राजाओं के शासन के कारण इस भाषा का नाम नागपुरी हुआ। इसे ' सादरी 'के नाम से भी जाना जाता है। नागपुरी भाषा बोलने वालो को नागपुरिया कहा जाता है। == भौगोलिक विस्तार == नागपुरी भारत में मुख्य रूप से झारखंड के चतरा, लातेहार, लोहरदग्गा, गुमला, राँची, खूँटी, सिमडेगा, छत्तीसगढ़ के जशपुर, सरगुजा, बलरामपुर, और उड़ीसा के सुन्दरगड़ जिला में बोली जाती है| इसके अलावा असम के टी ट्राइब द्वारा, पश्चिम बंगाल के दक्षिण-पश्चिम क्षेत्रों जैसे पुरुलिया जिला , अंडमान - निकोबार और बांग्लादेश में भी नागपुरी भाषा बोली जाती है | == विकास == फादर पीटर शांति नवरंगी ने इसके उद्भव एवं विकास पर प्रकाश डालते हुए प्रश्न उठाया कि नागपुरी छोटानागपुर की आर्य भिन्न बोलियों के मध्य में कैसे पड़ी? कहाँ से आई? कब आई? नागपुरी के प्रथम वैयाकरण रेव. ई. एच. ह्विटली ने नागपुरी का संबंध किसी आर्य बोली से नहीं बतलाया। तो दूसरी ओर नागपुरी के दूसरे समर्थ वैयाकरण रेव. कोनराड बुकाउट ने नागपुरी को मगही, भोजपुरी, छत्तीसगढ़ी इत्यादि से मिलती-जुलती बताया। फिर भी यह इनसे भिन्न भाषा है जो छोटानागपुर के अरण्यों और पहाड़ियों के बीच बसे गाँवों में स्वतंत्रातापूर्वक पनपी और विकसित हुई। अतः नागपुरी का शुद्ध रूप अब उन गाँवों में ही सुरक्षित है। फादर नवरंगी ने यह स्वीकार किया है कि यह कहना कठिन है कि नागपुरिया सदानी (नागपुरी) भाषा किस प्राचीन प्राकृत अथवा मध्ययुग की किसी अपभ्रंश बोली का वर्तमान रूप है। इस भाषा के सर्वनामों और क्रियाओं के कोई-कोई रूप दूरवर्ती राजस्थानी और नेपाली रूपों से मिलते हैं, कितने रूप प्राचीन वैस्वारी और अवधी से संबंध दिखाते है, कितने रूप तो बंगला और उड़िया की चलित बोलियांे के रूप से मेल खा जाते हैं। नागपुरी भाषा के प्रख्यात विद्वान प्रो॰ केसरी कुमार ने भी कहा है कि मगही और मैथिली की तरह नागपुरी भी मागधी अपभ्रंश से प्रसूत और उन्हीं की तरह एक निश्चित बोली है जो बिहारी के अंतर्गत आती है। डॉ॰ सुनीति कुमार चाटुर्ज्या के अनुसार मागधी प्रसूत भाषाओं की प्राचीन सामग्री के आधार पर भाषाविदों ने यह निष्कर्ष निकाला है कि पूर्ववर्ती मागधी अपभ्रंश के सभी स्थानीय रूपों मगही, मैथिली, भोजपुरी, बंगला, उड़िया और असमिया ने आठवीं शताब्दी से ग्यारहवीं शताब्दी तक न्यूनाधिक मात्रा में स्वतंत्रा रूप से अपनी आवश्यकताओं को पूरा कर लिया होगा। यह पार्थक्य किस शताब्दी से सम्पन्न हुआ इसके संबंध में निश्चित रूप से कुछ कहा जाना संभव नहीं। यही स्थिति हम नागपुरी के लिए भी कह सकते हैं। == लिपि == पूर्व में, नागपुरी कविताएँ लिखने में देवनागरी या कैथी लिपि का उपयोग किया जाता था। वर्तमान में, नागपुरी आमतौर पर देवनागरी लिपि में लिखी जाती है। == साहित्य == नागपुरी भाषा में काव्यों की रचना 17वी शताब्दी में शुरू हुई। नागवंशी राजाओं और रामगढ़ के राजाओं के शासनकाल के दौरान देवनागरी और कैथी लिपि में कई नागपुरी कविताएँ लिखी गई। नागवंशी राजाओं में से कई राजा कवि, लेखक और रचनाकार रहे हैं। नागवंशी राजा रघुनाथ शाह एक कवि थे। हनुमान सिंह, बंधु लोहार, जयगोविंद मिश्र, बरजू राम, महाकवि घासी राम और दास महली नागपुरी के रचनाकार रहे हैं। बेनीरामराम मेहता द्वारा लिखित "नागवंशावली" एक ऐतिहासिक कृति है। महाकवी घासीराम द्वारा लिखित वंशावली, दुर्गासप्तशती, बारहमासा, विवाह परिछन आदि प्रमुख है। प्रद्धुम्न दास और रुद्र सिंह भी प्रमुख लेखक रहे हैं। डॉ बी. पी. केसरी नागपुरी भाषा के प्रसिद्ध साहित्यकार रहे हैं । वर्तमान में डॉ. उमेश नंद तिवारी, डॉ. शकुंतला मिश्र, डॉ. राम कुमार, डॉ. बूटन महली, हरिनंदन राम महली, संतोष महली एवं रामदेव बड़ाईक नागपुरी साहित्य के भण्डार को और भी समृद्ध कर रहे हैं। नागपुरी, रांची विश्वविद्यालय और झारखंड के अन्य विश्वविद्यालयों में पढ़ाया जाता है। साथ ही नागपुरी भाषा राज्य के JPSC-JSSC द्वारा आयोजित परीक्षाओं में पृथक भाषा पत्र के रूप में स्थानीय ज्ञान को परखने के लिए पूछी जाती है, कई नागपुरी पत्रिकाओं भारत के विभिन्न हिस्सों सहित रांची , शिलांग , डुआर्स और पश्चिम बंगाल के तराई क्षेत्रों में प्रकाशित होता है। == कुछ वाक्यांश == == इन्हें भी देखें == हिन्द-आर्य भाषाओं की सूची नागपुरी सिनेमा == सन्दर्भ == == बाहरी कड़ियाँ == नागपुरी भाषा का उद्भव और विकास (नागपुरी संस्थान)