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411 समाचार
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बैसाखी

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बैसाखी Ganges at Haridwar, Uttarakhand.jpg नदियों में स्नान करना वैशाखी परंपरा है बसोआ, बिसुआ, जुड़ शीतल, पोहेला बोशाख, बोहाग बिहू, विशु, पुथण्डु हिन्दू, बौद्ध, सिख गंगा स्नान, मेले, फसल कटाई समापन उत्तर भारत right|thumb|300px|खालसा की जन्मस्थली पर बैसाखी बैसाखी का अर्थ वैशाख माह का त्यौहार है।https://books.google.co.in/books?id=bzGBAAAAMAAJ&q=%E0%A4%AC%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%96%E0%A5%80+%E0%A4%B5%E0%A5%88%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%96+%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%BF&dq=%E0%A4%AC%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%96%E0%A5%80+%E0%A4%B5%E0%A5%88%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%96+%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%BF&hl=en&sa=X&ved=2ahUKEwjntZ7F2-TuAhW6_XMBHYwaChQ4ChDoATAAegQIARAC Dillī pradeśa kī loka sāṃskr̥tika śabdāvalī Śarmā Dharmavīra 1991 Rājeśa Prakāśana hi यह वैशाख सौर मास का प्रथम दिन होता है। बैसाखी वैशाखी का ही अपभ्रंश है।https://books.google.co.in/books?id=bzGBAAAAMAAJ&dq=%E0%A4%AC%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%96%E0%A5%80+%E0%A4%B5%E0%A5%88%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%96+%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%BF&focus=searchwithinvolume&q=%E0%A4%AC%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%96%E0%A5%80+%E0%A4%B5%E0%A5%88%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%96%E0%A5%80 Dillī pradeśa kī loka sāṃskr̥tika śabdāvalī Śarmā Dharmavīra 1991 Rājeśa Prakāśana hi इस दिन गंगा नदी में स्नान का बहुत महत्व है। हरिद्वार और ऋषिकेश में बैसाखी पर्व पर भारी मेला लगता है।https://www.newindianexpress.com/nation/2010/apr/14/50-lakh-take-holy-dip-in-ganga-on-baisakhi-146142.amp 50 lakh take holy dip in Ganga on \\\'Baisakhi\\\' - The New Indian Express www.newindianexpress.com 2021-02-12 13 अप्रैल 2021 https://web.archive.org/web/20210413174809/https://www.newindianexpress.com/nation/2010/apr/14/50-lakh-take-holy-dip-in-ganga-on-baisakhi-146142.amp dead बैसाखी के दिन सूर्य मेष राशि में संक्रमण करता है । इस कारण इस दिन को मेष संक्रान्ति भी कहते है।https://books.google.co.in/books?id=Tl5C3qroPEcC&pg=PA38&dq=%E0%A4%AC%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%96%E0%A5%80+%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B7&hl=en&sa=X&ved=2ahUKEwj6o4zu5OTuAhVLgtgFHYHdAUQQ6AEwAHoECAAQAg#v=onepage&q=%E0%A4%AC%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%96%E0%A5%80%20%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B7&f=false Abhinava Hindī nibandha Śarmā Pavitra Kumāra 2008 Atmaram & Sons 978-81-7900-058-8 hi इसी पर्व को विषुवत संक्रान्ति भी कहा जाता है।https://books.google.co.in/books?id=BwFjDwAAQBAJ&pg=PA128&dq=%E0%A4%AC%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%96%E0%A5%80+%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B7%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%A4&hl=en&sa=X&ved=2ahUKEwjDw7nO5eTuAhXR4nMBHQb8BYoQ6AEwAXoECAIQAg#v=onepage&q=%E0%A4%AC%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%96%E0%A5%80%20%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B7%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%A4&f=false Uttrakhand Samanya Gyan Small: Uttrakhand GK Expert Exam Leaders Exam Leaders hi बैसाखी पारम्परिक रूप से प्रत्येक वर्ष 13 या 14 अप्रैल को मनाया जाता है। यह त्योहार हिन्दुओं, बौद्ध और सिखों के लिए महत्वपूर्ण है। वैशाख के पहले दिन पूरे भारतीय उपमहाद्वीप के अनेक क्षेत्रों में बहुत से नव वर्ष के त्यौहार जैसे जुड़ शीतल, पोहेला बोशाख, बोहाग बिहू, विशु, पुथण्डु मनाये जाते हैं। दिन के प्रमुख कृत्य thumb|right|वैसाखी के दिन पंज प्यारों का रूप धारण कर इनका स्मरण किया जाता है। इस दिन पंजाब का परपरागत नृत्य भांगड़ा और गिद्दा किया जाता है। शाम को आग के आसपास इकट्ठे होकर लोग नई फसल की खुशियाँ मनाते हैं। पूरे देश में श्रद्धालु गुरुद्वारों में अरदास के लिए इकट्ठे होते हैं। मुख्य समारोह आनन्दपुर साहिब में होता है, जहाँ पन्थ की नींव रखी गई थी। सुबह 4 बजे गुरु ग्रन्थ साहिब को समारोहपूर्वक कक्ष से बाहर लाया जाता है। दूध और जल से प्रतीकात्मक स्नान करवाने के बाद गुरु ग्रन्थ साहिब को तख्त पर बैठाया जाता है। इसके बाद पंच प्यारे 'पंचबानी' गाते हैं। दिन में अरदास के बाद गुरु को कड़ा प्रसाद का भोग लगाया जाता है। प्रसाद लेने के बाद सब लोग 'गुरु के लंगर' में शामिल होते हैं। श्रद्धालु इस दिन कारसेवा करते हैं। दिनभर गुरु गोविन्द सिंह और पंच प्यारों के सम्मान में शबद् और कीर्तन गाए जाते हैं। महत्व बैसाखी के पर्व की शुरुआत भारत के पंजाब प्रांत से हुई है और इसे रबी की फसल की कटाई शुरू होने की सफलता के रूप में मनाया जाता है। पंजाब और हरियाणा के अलावा उत्तर भारत में भी बैसाखी के पर्व का बहुत महत्व है। इस दिन गेहूं, तिलहन, गन्ने आदि की फसल की कटाई शुरू होती है। सिख धर्म वैसाखी ,गुरू अमर दास द्वारा चुने गए तीन हिंदू त्योहारों में से एक है, जिन्हें सिख समुदाय द्वारा मनाया जाता है।https://www.timesnowhindi.com/spirituality/article/story-behind-celebrating-baisakhi-in-hindi-vaisakhi-kyon-or-kaise-manate-hain/342837 Baisakhi 2021: क्‍यों हर साल 13 अप्रैल को मनाते हैं बैसाखी, जानें बैसाखी की कहानी, कैसे मनाया जाता है ये पर्व 2021-04-12 www.timesnowhindi.com hi 2022-04-11 प्रत्येक सिख वैसाखी त्योहार, सिख आदेश के जन्म का स्मरण है, जो नौवे गुरु तेग बहादुर के बाद शुरू हुआ और जब उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता के लिए खड़े होकर इस्लाम में धर्मपरिवर्तन के लिए इनकार कर दिया था तब बाद में मुगल सम्राट औरंगजेब के आदेश के तहत उनका शिरच्छेद कर दिया गया। गुरु की शहीदी ने सिख धर्म के दसवें और अंतिम गुरु के राज्याभिषेक और खालसा के संत-सिपाही समूह का गठन किया, दोनों वैसाखी दिन पर शुरू हुए थे।https://hindi.webdunia.com/sikh-religion/2018-baisakhi-118041200048_1.html बैसाखी क्यों है खालसा पंथ की स्थापना का त्योहार, जानिए... Hindi Webdunia https://web.archive.org/web/20180517123035/http://hindi.webdunia.com/sikh-religion/2018-baisakhi-118041200048_1.html 17 मई 2018 dead इतिहास प्रकृति का एक नियम है कि जब भी किसी जुल्म, अन्याय, अत्याचार की पराकाष्ठा होती है, तो उसे हल करने अथवा उसके उपाय के लिए कोई कारण भी बन जाता है। इसी नियमाधीन जब मुगल शासक औरंगजेब द्वारा जुल्म, अन्याय व अत्याचार की हर सीमा लाँघ, श्री गुरु तेग बहादुरजी को दिल्ली में चाँदनी चौक पर शहीद कर दिया गया, तभी गुरु गोविंदसिंहजी ने अपने अनुयायियों को संगठित कर खालसा पंथ की स्थापना की जिसका लक्ष्य था धर्म व नेकी (भलाई) के आदर्श के लिए सदैव तत्पर रहना।https://navbharattimes.indiatimes.com/astro/dharam-karam/vrat-tyohar/guru-govind-singh-history-and-baisakhi-importance-76981/ बैसाखी के द‍िन ही गुरु गोव‍िंद सिंह ने द‍िए थे ये निर्देश, जानिए इतिहास नवभारतटाइम्स.कॉम 2020-04-13 नवभारत टाइम्स hi-IN 2021-04-10 पुराने रीति-रिवाजों से ग्रसित निर्बल, कमजोर व साहसहीन हो चुके लोग, सदियों की राजनीतिक व मानसिक गुलामी के कारण कायर हो चुके थे। निम्न जाति के समझे जाने वाले लोगों को जिन्हें समाज तुच्छ समझता था, दशमेश पिता ने अमृत छकाकर सिंह बना दिया। इस तरह 13 अप्रैल,1699 को श्री केसगढ़ साहिब आनंदपुर में दसवें गुरु गोविंदसिंहजी ने खालसा पंथ की स्थापना कर अत्याचार को समाप्त किया।https://www.jagranjosh.com/general-knowledge/history-and-significance-of-baisakhi-festival-in-hindi-1586759004-2 बैसाखी पर्व का इतिहास (History of Bisakhi Festival) jagranjosh उन्होंने सभी जातियों के लोगों को एक ही अमृत पात्र (बाटे) से अमृत चखा पाँच प्यारे सजाए। ये पाँच प्यारे किसी एक जाति या स्थान के नहीं थे, वरन्‌ अलग-अलग जाति, कुल व स्थानों के थे, जिन्हें खंडे बाटे का अमृत चखाकर इनके नाम के साथ सिंह शब्द लगा। अज्ञानी ही घमंडी नहीं होते, 'ज्ञानी' को भी अक्सर घमंड हो जाता है। जो परिग्रह (संचय) करते हैं उन्हें ही घमंड हो ऐसा नहीं है, अपरिग्रहियों को भी कभी-कभी अपने 'त्याग' का घमंड हो जाता है। अहंकारी अत्यंत सूक्ष्म अहंकार के शिकार हो जाते हैं। ज्ञानी, ध्यानी, गुरु, त्यागी या संन्यासी होने का अहंकार कहीं ज्यादा प्रबल हो जाता है। यह बात गुरु गोविंदसिंहजी जानते थे। इसलिए उन्होंने न केवल अपने गुरुत्व को त्याग गुरु गद्दी गुरुग्रंथ साहिब को सौंपी बल्कि व्यक्ति पूजा ही निषिद्ध कर दी। सिख नव वर्ष वैसाखी परंपरागत रूप से सिख नव वर्ष रहा है। खालसा सम्बत के अनुसार, खालसा कैलेंडर का निर्माण खलसा -1 वैसाख 1756 विक्रमी (30 मार्च 16 99) के दिन से शुरू होता है। यह पूरे पंजाब क्षेत्र में मनाया जाता है।https://aajtak.intoday.in/story/baisakhi-2020-know-its-importance-and-history-tlifd-1-1180227.html क्यों मनाते हैं बैसाखी का त्योहार? जानिए इसका महत्व aaj tak नगर कीर्तन सिख समुदाय नगर कीर्तन (शाब्दिक रूप से "शहर भजन गायन") नामक जुलूस का आयोजन करते हैं। पांच खल्सा इसका नेतृत्व करते हैं, जो पंज-प्यारे के पहनावे में होते है और सड़कों पर जुलूस निकालते है।https://www.naidunia.com/chhattisgarh/bilaspur-festival-of-baisakhi-nagar-kirtan-will-not-come-out-will-play-tradition-of-baisakhi-6797095 Festival Of Baisakhi: नहीं निकलेगी नगर कीर्तन बैसाखी की निभाएंगे परंपरा 2021-04-09 Nai Dunia hi 2021-04-11 फसल कटाई का त्योहार वैसाखी पंजाब के लोगों के लिए फसल कटाई का त्योहार है। पंजाब में, वैसाखी रबी फसल के पकने का प्रतीक है। इस दिन किसानों द्वारा एक धन्यवाद दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिससे किसान, प्रचुर मात्रा में उपजी फसल के लिए ईश्वर का धन्यवाद करते हैं और भविष्य की समृद्धि के लिए भी प्रार्थना करते हैं। सिखों और पंजाबी हिंदुओं द्वारा फसल त्योहार मनाया जाता है। 20 वीं शताब्दी के शुरुवात में वैसाखी सिखों और हिंदुओं के लिए एक पवित्र दिन था और पंजाब के सभी सभी मुस्लिमों और गैर-मुस्लिमों, ईसाइयों सहित, के लिए एक धर्मनिरपेक्ष त्योहार था। आधुनिक समय में भी ईसाई, सिखों और हिंदुओं के साथ-साथ वैसाखी समारोह में भाग लेते हैं।https://khabar.ndtv.com/news/faith/baisakhi-2020-date-significance-history-khalsa-panth-establishments-and-other-facts-2209660 आज है बैसाखी, जानिए इस त्‍योहार के बारे में ये जरूरी बातें NDTV India https://web.archive.org/web/20200414000315/https://khabar.ndtv.com/news/faith/baisakhi-2020-date-significance-history-khalsa-panth-establishments-and-other-facts-2209660 14 अप्रैल 2020 dead आवत पौनी आवत पौनी एक परंपरा है जो कटाई से जुड़ी है, जिसमें लोगों को गेहूं काटने के लिए एक साथ मिलना शामिल है।https://www.livehindustan.com/lifestyle/story-know-the-importance-of-baishaki-2018-1901717.html बैसाखी 2018: फसल पकने के बाद नए साल की खुशियां मनाने का प्रतीक बैसाखी Hindustan hindi 2022-04-11 मेले और नृत्य भांगड़ा जो फसल त्योहार का लोक नृत्य भी है जिसे पारंपरिक रूप से फसल नृत्य कहा जाता है। नए साल और कटाई के मौसम के लिए, भारत के, पंजाब में कई हिस्सों में मेले आयोजित किए जाते हैं। चंडीगढ़ के पास पिंजौर परिसर में जम्मू शहर, कठुआ, उधमपुर रियासी और सांबा, हिमाचल प्रदेश के रेवलर, शिमला, मंडी और प्रशारा झील सहित विभिन्न स्थानों में वैशाखी मेले लगते है। हिंदू धर्म हिंदुओं के लिए यह त्योहार नववर्ष की शुरुआत है। हिंदू इसे स्नान, भोग लगाकर और पूजा करके मनाते हैं। ऐसा माना जाता है कि हजारों साल पहले देवी गंगा इसी दिन धरती पर उतरी थीं। उन्हीं के सम्मान में हिंदू धर्मावलंबी पारंपरिक पवित्र स्नान के लिए गंगा किनारे एकत्र होते हैं तथा इस पर्व को मनाते है।https://www.jansatta.com/religion/baisakhi-2020-date-time-puja-vidhi-muhurat-timings-in-hindi-not-only-for-sikhs-baisakhi-is-also-special-for-hindu-religion-people-know-its-history-and-importance/1373350/ Baisakhi 2020 Date, Time, Puja Vidhi: जलियांवाला बाग के शहीदों की शहादत को याद करने का दिन है बैसाखी, जानिए इसका इतिहास जनसत्ता क्षेत्रीय विविधताएं केरल में यह त्योहार 'विशु' कहलाता है। इस दिन नए, कपड़े खरीदे जाते हैं, आतिशबाजी होती है और 'विशु कानी' सजाई जाती है। इसमें फूल, फल, अनाज, वस्त्र, सोना आदि सजाए जाते हैं और सुबह जल्दी इसके दर्शन किए जाते हैं। इस दर्शन के साथ नए वर्ष में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।http://hindi.webdunia.com/sikh-religion/2018-baisakhi-118041200048_1.html बैसाखी क्यों है खालसा पंथ की स्थापना का त्योहार, जानिए... Webdunia hindi.webdunia.com hi 2021-04-11 बिखोरी उत्सव उत्तराखंड के बिखोती महोत्सव में लोगों को पवित्र नदियों में डुबकी लेने की परंपरा है। इस लोकप्रिय प्रथा में प्रतीकात्मक राक्षसों को पत्थरों से मारने की परंपरा है। विशु विशु, वैसाखी के ही दिन, केरल में हिन्दू नव वर्ष के रूप में मनाया जाता है, और जो मलयाली महीने मेदाम के पहले दिन मनाया जाता है। बोहाग बिहू बोहाग बिहू या रंगली बिहू 13 अप्रैल को असमिया नव वर्ष की शुरुआत के रूप में मनाते हैं। इसे सात दिन के लिए विशुव संक्रांति (मेष संक्रांति) वैसाख महीने या स्थानीय रूप से 'बोहग' (भास्कर कैलेंडर) के रूप में मनाया जाता है। महा विषुव संक्रांति महाविषुव संक्रांति ओडिशा में उड़िया नए साल का प्रतीक है। समारोह में विभिन्न प्रकार के लोक और शास्त्रीय नृत्य शामिल होते हैं, जैसे शिव-संबंधित छाऊ नृत्य। पाहेला बेशाख बंगाली नए साल को हर साल 14 अप्रैल को 'पाहेला बेषाख' के रूप में मनाया जाता है और पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और बांग्लादेश में एक उत्सव 'मंगल शोभाजात्रा' का आयोजन किया जाता है। यह उत्सव 2016 में यूनेस्को द्वारा मानवता की सांस्कृतिक विरासत के रूप में सूचीबद्ध किया गया था। पुत्थांडु पुत्थांडु, जिसे पुथुवरूषम या तमिल नववर्ष भी कहा जाता है, तमिल कैलेंडर , चिथीराई मॉस का पहला दिन है। बिहार में जुरशीतल बिहार और नेपाल के मिथल क्षेत्र में, नया साल जुरशीतल के रूप में मनाया जाता है। यह मैथिली पंचांग का पहला दिन है। परिवार के सदस्यों को लाल चने सत्तू और जौ और अन्य अनाज से प्राप्त आटे का भोजन कराया जाता है। भारत के बाहर पंजाब (पाकिस्तान) में पाकिस्तान में कई जगह ऐसी हैं जो सिख धर्म के ऐतिहासिक महत्व की हैं, जैसे कि गुरु नानक का जन्मस्थान। ये जगह वैसाखी पर हर साल भारत और विदेश से तीर्थयात्रियों को आकर्षित करती हैं। अजीज-उद-दीन अहमद के मुताबिक, अप्रैल में गेहूं की फसल कटाई के बाद लाहौर में बसाचाली का आयोजन किया जाता था। हालांकि, अहमद कहते हैं, ज़िया-उल-हक सत्ता में आने के बाद 1970 में शहर ने अपनी सांस्कृतिक जीवंतता खोना शुरू कर दिया था, और हाल के वर्षों में "पंजाब में पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एन) सरकार ने एक आधिकारिक आदेश के माध्यम से पतंग को प्रतिबंधित कर दिया था। जो कि धर्म के नाम पर इस्लाम के एक विशुद्ध रूप से अभ्यास करना चाहते हैं "। भारत के पंजाब राज्य के विपरीत, जो वैसाखी सिख त्योहार को आधिकारिक अवकाश के रूप में मान्यता देता है, पाकिस्तान के पंजाब या सिंध प्रांतों में आधिकारिक छुट्टी नहीं होती, जहां इसके बजाय आधिकारिक तौर पर इस्लामी छुट्टियां मान्यता प्राप्त हैं। 8 अप्रैल 2016 को, अलहमरा (लाहौर) में पंजाबी प्रचार ने विसाखी मेला का आयोजन किया, जहां वक्ताओं ने विस्खी मेला जैसी घटनाओं के माध्यम से पाकिस्तान में "पंजाबी संस्कृति को जीवित रखने के लिए हमारा संघर्ष जारी रखने" का वादा किया।https://www.jagran.com/world/pakistan-baisakhi-2020-pakistani-sikhs-to-celebrate-baisakhi-on-tuesday-20186722.html देशभर में बैसाखी का जश्न, पाकिस्तान में रह रहे सिख कल मनाएंगे बैसाखी jagran पाकिस्तान में बहुसंख्यक सिख होते थे, लेकिन 1947 भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौरान एक विशाल बहुमत भारत में चले आये समकालीन पाकिस्तान में लगभग 20 करोड़ पाकिस्तानियों की कुल जनसंख्या में लगभग 20,000 सिख हैं, या लगभग 0.01%। ये सिख, और दुनिया के दूसरे हिस्सों से सिख, तीर्थ यात्रा के लिए हजारों की संख्या में पहुंचते हैं और पश्चिमी पंजाब (पाकिस्तान) में वैसाखी को मनाते हैं। जिसमें हंस अब्दल में पांजा साहिब परिसर, ननकाना साहिब में गुरुद्वारों और लाहौर के विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों पर केंद्रित त्यौहार शामिल हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका,कनाडा ,यूनाइटेड किंगडम और मलेशिया में संयुक्त राज्य में, आमतौर पर वैसाखी उत्सव की स्मृति पर एक परेड होती है। न्यूयॉर्क शहर के मैनहट्टन में,लोग "निशुल्क सेवा" करने के लिए बाहर निकलते हैं, जैसे लंगर (मुफ्त भोजन) देने, और किसी अन्य श्रम को पूरा करने। लॉस एंजिल्स, कैलिफ़ोर्निया में, कई सिख समुदाय जिसमें कई गुरुद्वारा शामिल हैं, एक पूर्ण दिवस कीर्तन (आध्यात्मिक संगीत) कार्यक्रम रखते है। वैंकूवर, एबॉट्सफ़ोर्ड और सर, ब्रिटिश कोलंबिया, कनाडा में स्थानीय सिख समुदाय अप्रैल में अपनी वार्षिक विसाखी समारोह आयोजित करता है, जिसमें अक्सर परेड के साथ एक नगर कीर्तन (परेड) शामिल है, सरे 2014 में 200,000 लोग शामिल थे। यूनाइटेड किंगडम का एक बड़ा सिख समुदाय भारतीय उपमहाद्वीप, पूर्वी अफ्रीका और अफगानिस्तान से आया है। यूके में सिखों की सबसे बड़ी तादाद , पश्चिमी मिडलैंड्स (विशेष रूप से बर्मिंघम और वॉल्वरहैम्प्टन) और लंदन में मिलती है। वैसाखी में साउथल नगर कीर्तन सभा ,एक सप्ताह या दो दिन पहले आयोजित की जाती है। 'बर्मिंघम नगर कीर्तन ' बर्मिंघम सिटी काउंसिल के सहयोग से अप्रैल के अंत में आयोजित किया जाता है और यह एक वार्षिक आयोजन है जिसमें हजारों लोग आकर्षित होते हैं जो शहर में गुरुद्वारों से अलग होने वाले दो अलग-अलग नगर कीर्तन से शुरू करते हैं और हैण्डवर्थ पार्क में वैसाखी मेले में जाकर समाप्त होते है। भारतीय सिख समुदाय, मलेशिया में एक जातीय अल्पसंख्यक है, यही कारण है कि वैसाखी एक सार्वजनिक अवकाश नहीं रहता है हालांकि, देश के विभिन्न जातीय और धार्मिक समूहों के बीच एकीकरण को बढ़ावा देने के सरकार के प्रयासों के मुताबिक, प्रधान मंत्री नजीब रजाक ने घोषणा की है कि 2013 की शुरुआत से, सिख मलेशियन भारतीय समुदाय के सभी सरकारी कर्मचारियों को वैसाखी दिवस पर एक दिन का अवकाश दिया जाएगा। वैसाखी की वर्तनी क्षेत्र के साथ वर्तनी भिन्न होती है पंजाब क्षेत्र में, वैसाखी सामान्य है, जबकि दोबी और मालवाई क्षेत्रों में, बोलने वालों को "व" के लिए "ब" का स्थान देना आम बात है। इसलिए, वर्तनी का प्रयोग लेखक की बोली पर निर्भर है। बौद्ध वैसाख इसी तरह ये ऐतिहासिक त्यौहार भारतीय उपमहाद्वीप, पूर्वी एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया में, बुद्ध के जन्मदिन के रूप में,मनाया जाता है जो वेसाक कहलाता है, जिसे वैसाखी पूर्णिमा, वैसाखा या वेसाखा के रूप में भी जाना जाता है। चित्र दीर्घा सन्दर्भ इन्हें भी देखें वर्ष प्रतिपदा जुरशीतल बैशाख श्रेणी:संस्कृति श्रेणी:हिन्दू त्यौहार श्रेणी:धार्मिक त्यौहार श्रेणी:त्यौहार श्रेणी:सिख धर्म