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रुद्रसागर झील
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रुद्रसागर झील Neermahal191.jpg नीरमहल जल महल के पास झील का नज़ारा मेलाघर, त्रिपुरा, भारत 23.504 91.315 region:IN_type:waterbody inline,title झील India
रुद्रसागर झील भारत के त्रिपुरा राज्य सिपाहीजाला ज़िले में मेलाघर के पास फैली रुद्रसागर झील राज्य की सबसे अहम आर्द्रभूमियों (wetlands) में शुमार होती है। यह झील सिर्फ़ अपनी क़ुदरती ख़ूबसूरती के लिए ही नहीं, बल्कि झील के बीचोंबीच तैरते हुए नज़र आने वाले मशहूर नीरमहल की वजह से भी दुनिया भर में जानी जाती है। एक क़ुदरती अवसादन जलाशय (natural sedimentation reservoir) होने के नाते यह झील इलाक़े के जल-चक्र, मछली पालन और सैलानियों की रौनक़, तीनों में एक अहम किरदार निभाती है। इसकी अहमियत को देखते हुए ही इसे रामसर सूची में शामिल कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संरक्षित आर्द्रभूमि का दर्जा दिया गया है।Rudrasagar Lake https://rsis.ramsar.org/ris/1572?__goaway_challenge=meta-refresh&__goaway_id=9c34e160fccaf0c83eed0e9ebca45c60&__goaway_referer=https%3A%2F%2Fen.wikipedia.org%2F रामसर साइट्स इन्फॉर्मेशन सर्विस 24 अगस्त 2026 रुद्रसागर झील
भूगोल
रुद्रसागर झील त्रिपुरा के सिपाहीजाला ज़िले की सोनामुड़ा उपसंभाग के मेलाघर ब्लॉक में स्थित है, जो राजधानी अगरतला से तक़रीबन 52 से 55 किलोमीटर की दूरी पर पड़ती है। रामसर की आधिकारिक फ़ेहरिस्त के मुताबिक़ इस स्थल का दायरा क़रीब 240 हेक्टेयर है, जबकि झील का समूचा जल-क्षेत्र क़रीब 5.3 वर्ग किलोमीटर तक फैला बताया जाता है। झील अंडाकार शक्ल की है और इसे "त्विजिलिकमा" के नाम से भी पुकारा जाता है।यह झील 23°29’ उत्तरी अक्षांश और 90°01’ पूर्वी देशांतर के बीच स्थित है।
जलविज्ञान
हाइड्रोमॉर्फोलॉजिकल एतबार से रुद्रसागर एक क़ुदरती अवसादन जलाशय है। तीन बारहमासी धाराएँ — नोआचेरा, दुर्लभनारायण-छड़ा और कमताली-छड़ा — इस झील में पानी लाती हैं। यहाँ से झील का पानी काचिगंग (New-Karchi) नामक एक संपर्क चैनल के ज़रिये गोमती नदी की तरफ़ बहता है। बरसों से गाद जमा होने, आस-पास के इलाक़ों में खेती-बाड़ी और शहरीकरण के फैलाव, जंगलों की कटाई और मूर्ति-विसर्जन जैसी वजहों से झील का असल रक़बा बीते दशकों में क़रीब एक हज़ार हेक्टेयर से घटकर आज के दायरे तक सिमट गया है।
जैवविविधता
रुद्रसागर झील की जैवविविधता ख़ासी समृद्ध है। यहाँ जलीय वनस्पतियों (aquatic macrophytes) की तक़रीबन 14 क़िस्में पाई जाती हैं, जिनमें सिंघाड़ा (Trapa) और मखाना (Euryale ferox) जैसे आर्थिक तौर पर अहम पौधे शामिल हैं। मछलियों में कतला, रोहू, मृगल, चितल, मोका, पाबदा, बोटिया प्रजातियाँ और नोटोप्टेरस चिताला (Chitala chitala) जैसी क़िस्में यहाँ मिलती हैं। सर्दियों के मौसम में यह झील प्रवासी पक्षियों की एक अहम पनाहगाह बन जाती है — इनमें दुर्लभ बेयर्स पोचार्ड और फ़ेरुजिनस डक जैसी प्रजातियाँ भी शामिल हैं। इसके अलावा IUCN की रेड लिस्ट में शुमार छत-पीठ वाला कछुआ (roofed turtle) भी इसी झील का बाशिंदा है।
रामसर स्थल
रुद्रसागर झील को 8 नवंबर 2005 को रामसर स्थल के तौर पर पहचाना गया, और भारत सरकार के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने 29 फ़रवरी 2007 को इसे बाक़ायदा अंतरराष्ट्रीय अहमियत की आर्द्रभूमि क़रार दिया। रामसर सूची में इसका स्थल क्रमांक 1572 है। इस दर्जे के साथ ही झील के संरक्षण की ज़िम्मेदारी त्रिपुरा के वन विभाग को नोडल एजेंसी के तौर पर सौंपी गई।
मछली एवं स्थानीय अर्थव्यवस्था
रुद्रसागर झील स्थानीय आबादी, ख़ासकर मछुआरा समुदाय की रोज़ी-रोटी का एक बड़ा ज़रिया है। झील में मछली पालन का काम "रुद्रसागर उद्बस्तु मत्स्य सम्बय समिति" नाम की स्थानीय समिति के सहयोग से चलाया जाता है, जो वन विभाग के साथ मिलकर मत्स्य प्रबंधन देखती है। कतला, रोहू और मृगल जैसी व्यावसायिक तौर पर अहम मछलियों की पैदावार से सैकड़ों परिवारों को सीधा फ़ायदा पहुँचता है।
नीरमहल से संबंध
रुद्रसागर झील की पहचान का सबसे ख़ूबसूरत पहलू है झील के ठीक बीचोंबीच तैरता हुआ नीरमहल — जिसका मानी ही होता है "पानी का महल"। इसे त्रिपुरा के महाराजा बीर बिक्रम किशोर माणिक्य ने अपने ग्रीष्मकालीन निवास के तौर पर बनवाया था। 1921 में इसकी नींव पड़ी और ब्रिटिश कंपनी मार्टिन एंड बर्न को इसके निर्माण की ज़िम्मेदारी दी गई थी; महल को बनकर तैयार होने में क़रीब नौ बरस लगे और 1930 में यह पूरा हुआ। संगमरमर और बलुआ पत्थर से तामीर हुआ यह महल हिंदू और मुग़ल स्थापत्य शैलियों के दिलचस्प संगम की मिसाल है, और पूर्वी भारत का इकलौता जल-महल माना जाता है। महल तक पहुँचने का ज़रिया सिर्फ़ नाव ही है, जो इस पूरे सफ़र को और भी यादगार बना देता है।
पर्यटन
रुद्रसागर झील और नीरमहल मिलकर त्रिपुरा के सबसे बड़े सैर-सपाटे के केंद्रों में शुमार होते हैं। यहाँ हर रोज़ देसी-विदेशी सैलानी नाव की सवारी, झील का शांत नज़ारा और प्रवासी पक्षियों को देखने के लिए आते हैं। हर साल अगस्त के महीने में तीन दिन तक चलने वाला नीरमहल जल महोत्सव यहाँ का सबसे बड़ा आकर्षण है, जिसमें नाव-दौड़ के साथ-साथ कई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं।
संरक्षण एवं चुनौतियाँ
बरसों की गाद-भराई, खेती और शहरीकरण के दबाव, जंगलों की कटाई, बाढ़ और मूर्ति-विसर्जन जैसी सरगर्मियों की वजह से झील का रक़बा और उसकी सेहत, दोनों पर असर पड़ा है। पानी की गुणवत्ता और भारी धातुओं की मौजूदगी को लेकर हुए अध्ययनों में भी झील में बढ़ते प्रदूषण की तरफ़ इशारा किया गया है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की तरफ़ से झील की बहाली (restoration) की योजनाएँ बनाई गई हैं, और वन विभाग स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर इसके संरक्षण की कोशिशों में जुटा है।
समस्या
रुद्रसागर झील के जलसम्भर में बड़े पैमाने पर मिट्टी का कटाव इसके क्षेत्रफल और गहराई को कम करने वाली म ुख्य समस्याओं में से एक है। जलसम्भर में इस तरह की गिरावट और झील में गाद जमा होने का असर लंबे समय से झील पर पड़ रहा है। शहरी और कृषि क्षेत्रों में विस्तार, वनों की कटाई, बाढ़, मूर्तियों के विसर्जन और झील के जल निकास क्षेत्र से जुड़ी अन्य गतिविधियों के कारण झीलों में गाद जमा हो जाती है।
नीरमहल
झील के उत्तर-पूर्वी किनारे के पास नीरमहल (जल महल) नाम से एक महल स्थित है। इसे त्रिपुरा के तत्कालीन राजा वीर विक्रम किशोर देव वर्मन ने 1938 में बनवाया था।
Neermahal https://sepahijala.nic.in/tourist-place/neermahal/ 24 अगस्त 2026 नीरमहल
इन्हें भी देखें
कमलासागर
लोकताक झील
सन्दर्भ
Ramsar Sites Information Service (RIS) — Rudrasagar Lake, Site No. 1572 — rsis.ramsar.org
Ramsar Convention — आधिकारिक घोषणा एवं अधिसूचना, 29 फ़रवरी 2007
Wetlands of Tripura, Forest Department, Government of Tripura — forest.tripura.gov.in
Tripura Tourism, Government of Tripura — नीरमहल एवं रुद्रसागर संबंधी जानकारी
Barman, D. et al. (2013), "Status of Rudrasagar Lake (Ramsar Site) in Tripura, India", Environment and Ecology, Vol. 31, No. 3
श्रेणी:त्रिपुरा की झीलें
श्रेणी:भारत में रामसर स्थल