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आत्रेय
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ऋषि आत्रेय, या आत्रेय पुनर्वसु, ऋषि अत्रि के वंशज तथा महान ऋषि थे, जिनकी सिद्धियाँ पुराणों में वर्णित हैं। वे तक्षशिला, गंधार के मूल निवासी थे। ऋषि अत्रेय आयुर्वेद के प्रसिद्ध विद्वान थे और प्रारंभिक आयुर्वेद के छह सम्प्रदायों की स्थापना उनकी शिक्षाओं के आधार पर की गई थी। उन्हें भेलसंहिता के लेखक होने का श्रेय भी दिया जाता है, जो छठी शताब्दी ई०पू० की अवधि में लिखी गयी थी। ऐसा माना जाता है कि उन्होंने गंधार राज्य के राजा नग्नजित के निजी चिकित्सक के रूप में काम किया था, जिसका उल्लेख महाभारत में मिलता है। https://books.google.com/books?id=v56tj2EPZ-YC&pg=PA116&dq=Bhela_Samhita 116 Mohammad Ali Jazayery, Werner Winter Walter de Gruyter 1988 Languages and Cultures: Studies in Honor of Edgar C. Polomé चरकसंहिता की मूल सामग्री के लिए भी ऋषि आत्रेय को श्रेय दिया जाता है, जिसे अग्निवेश और चरक द्वारा संहिताबद्ध और सम्पादित किया गया था। सुरेन्द्रनाथ दासगुप्ता के अनुसार, प्राचीन अत्रेय-चरक आयुर्वेद सम्प्रदाय की जड़ें संभवतः अथर्ववेद की अब विलुप्त हो चुकी करणवेद्या शाखा में थीं।A History of Indian philosophy 1 https://books.google.com/books?id=NjI9AAAAIAAJ&pg=PA284&lpg=PA284 284 Surendranath Dasgupta 1922 26 फ़रवरी 2020 https://web.archive.org/web/20181204024840/https://books.google.com/books?id=NjI9AAAAIAAJ 4 दिसंबर 2018 live
आयुर्वेद के विकास में प्रभाव
चरक परम्परा के अनुसार, आयुर्वेद के छह सम्प्रदाय मौजूद थे, जिन्हें ऋषि पुनर्वसु आत्रेय के शिष्यों ने स्थापित किया था। उनके प्रत्येक शिष्य- अग्निवेश, भेल, जतूकर्ण, पराशर, हारीत और क्षारपाणि ने एक-एक संहिता की रचना की।https://www.shivajicollege.ac.in/sPanel/uploads/econtent/22f576a67a04bc3f8d4962bacb1aa8b7.pdf आयुर्वेद की आचार्य परम्परा 23 जनवरी 2022 23 जनवरी 2022 https://web.archive.org/web/20220123130117/https://www.shivajicollege.ac.in/sPanel/uploads/econtent/22f576a67a04bc3f8d4962bacb1aa8b7.pdf dead सभी छह में से, अग्निवेश द्वारा रचित ग्रन्थ सर्वाधिक लोकप्रिय हुआ। डॉ तुस्तोमु यामाशिता के अनुसार, भेलसंहिता को अक्सर आयुर्वेद के बाद के लेखकों और टिप्पणीकारों द्वारा उद्धृत किया जाता है। भेल की कुछ पांडुलिपियां जो अभी भी उपलब्ध हैं, वे हैं: तंजावुर पांडुलिपि (तंजावुर में महाराजा सरफोजी के पुस्तकालय में रखी गई एक पानपात्र की पांडुलिपि) और पूर्वी तुर्केस्तान पांडुलिपि, जोकि एक कागजी पांडुलिपि का केवल एक पन्ना है जिसे अब स्टैट्सबिबलीओथेक ज़ु बर्लिन में रखा गया है।Mathematics and Medicine in Sanskrit, Edited by Dominik Wujastyk
चरक ने बाद में अग्निवेशसंहिता से संकेत लेते हुए, उनका सर्वप्रसिद्ध काम, चरकसंहिता का निर्माण लगभग ३०० ई०पू० में किया, जो बच गया और बोवर पांडुलिपि के रूप में पाया गया जिसे लगभग चौथी शताब्दी में लिखा गया था। चरकसंहिता आयुर्वेद का संस्थापक पाठ है।
इन्हें भी देखें
चरक
भेलसंहिता
सन्दर्भ
श्रेणी:ब्राह्मण गोत्र
श्रेणी:अयुर्वेदाचार्य
श्रेणी:ऋषि