Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

अवटु ग्रंथि

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

अवटु ˈ θ aɪ r ɔɪ d Glandula thyreoidea Anterior thyroid.jpg सामने से देखने पर मानव अवटु ग्रंथि (भूरा); और ग्रंथि को रक्तापूर्ति करती धमनियां (लाल)। Thyroid dummy.jpg अवटु ग्रंथि गले में टेंटुए के ठीक नीचे स्थित होती है। Thyroid diverticulum (an extension of endoderm into 2nd pharyngeal arch) अंत:स्रावी तंत्र Superior, Inferior thyroid arteries Superior, middle, Inferior thyroid veins अवटु (थाइरॉयड) मानव शरीर में पायी जाने वाली सबसे बड़ी अंत:स्रावी ग्रंथियों में से एक है। यह द्विपिंडक रचना निम्न ग्रीवा में अवटु उपास्थि (थाइरॉयड कार्टिलेज़) स्वरयंत्र के नीचे वलयाकार उपास्थि (क्राइकॉइड कार्टिलेज़) के लगभग समान स्तर पर स्थित होती है। यह थायरॉकि्सन (T4), ट्राइ-आयडोथाइरोनीन (T3) और थाइरोकैल्सिटोनीन नामक हार्मोन स्रावित करती हैयादव रामनन्दन अभिनव जीवन विज्ञान जुलाई २००5 निर्मल प्रकाशन कोलकाता 26 २३ जून २००९ जिससे शरीर के ऊर्जा क्षय, प्रोटीन उत्पादन एवं अन्य हार्मोन के प्रति होने वाली संवेदनशीलता नियंत्रित होती है। ये हार्मोन चयापचय की दर और कई अन्य शारीरिक तंत्रों के विकास और उनके कार्यों की दर को भी प्रभावित करते हैं। हार्मोन कैल्सीटोनिन कैल्शियम साम्यावस्था (कैल्शियम होमियोस्टैसिस) में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। आयोडीन T3 और T4 दोनों का एक आवश्यक घटक है। कार्य थायरॉक्सिन हार्मोन वसा, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट के मेटाबोलिज्म को बढ़ाता है। यह रक्त में शर्करा, कोलेस्टरोल तथा फास्फोलिपिड का मात्रा को कम कर देता है। लाल रक्त कोशिका के निर्माण को बढ़ा कर रक्ताल्पता की रोकथाम करता है। यह हड्डियों, पेशियों, लैंगिक तथा मानसिक वृद्धि को नियंत्रित करता है। यह दुग्ध स्राव को भी बढाता है। यह हृदय गति एवं रक्तचाप को नियंत्रित करता है। असमान्य अवस्था अवटु ग्रंथि हाइपोथैलेमस, पीयूष ग्रंथि आदि कारकों द्वारा नियंत्रित होती है। अवटु ग्रंथि की सबसे सामान्य समस्याएँ अवटु ग्रंथि की अतिसक्रियता (हाइपरथाइरॉयडिज़्म) और अवटु ग्रंथि की निम्नसक्रियता (हाइपोथाइरॉयडिज़्म) हैं। जब अवटुग्रंथि बहुत अधिक मात्रा में हार्मोन बनाने लगती है तो शरीर, उर्जा का उपयोग मात्रा से अधिक करने लगता है। इसे हाइपर थाइराडिज़्म कहते हैं। जब अवटुग्रंथि पर्याप्त मात्रा में हार्मोन नहीं बना पाती तो शरीर, उर्जा का उपयोग मात्रा से कम करने लगता है। इस अवस्था को हाइपोथायराडिज़्म कहते हैं। ये असमान्य अवस्थाएँ किसी भी आयु वाले व्यक्ति में हो सकती है तथापि पुरुषों की तुलना में पांच से आठ गुणा अधिक महिलाओं में यह बीमारी होती है। सन्दर्भ श्रेणी:अंतःस्रावी ग्रंथि श्रेणी:ग्रंथि श्रेणी:हार्मोन श्रेणी:हिन्दी विकि डीवीडी परियोजना