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411 समाचार
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प्यार का मौसम

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प्यार का मौसम प्यार का मौसम.jpg प्यार का मौसम का पोस्टर नासिर हुसैन नासिर हुसैन आर॰ डी॰ बर्मन नासिर हुसैन शशि कपूर, आशा पारेख, भारत भूषण, राजेन्द्रनाथ, निरूपा रॉय, किशन मेहता 1969 भारत हिन्दी प्यार का मौसम 1969 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। इसका निर्देशन, निर्माण और लेखन नासिर हुसैन ने किया। इसमें शशि कपूर और नासिर हुसैन की मनपसंद अभिनेत्री- आशा पारेख ने अभिनय किया। इसमें भारत भूषण, निरूपा रॉय, मदन पुरी, ताहिर हुसैन और एक अन्य नासिर हुसैन के पसंद राजेन्द्रनाथ भी थे। यादगार गीतों के लिए दो और हुसैन पसंदीदा जिम्मेदार थे: गीतकार मजरुह सुल्तानपुरी और संगीतकार आर॰ डी॰ बर्मन। विश्लेषण कहानी नासिर हुसैन की पसंदीदा थीम पर थी, एक परिवार जिसके सदस्य फिल्म की शुरुआत में अलग हो जाते हैं और बहुत सारी कार्रवाई के बाद फिल्म के अंत में फिर से जुड़ जाते हैं। फिल्म में थीम गीत (तुम बिन जां कहां) कई बार बजाया जाता है: मोहम्मद रफी के संस्करण को नायक शशि कपूर पर तीन बार चित्रित किया गया है, जबकि किशोर कुमार के संस्करण को भारत भूषण पर दो बार चित्रित किया गया है। यह गीत नासिर हुसैन (यादों की बारात और हम किससे कम नहीं) की बाद की फिल्मों के प्रमुख गीतों की तरह फिल्म का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। मुख्य गीत तीनों फिल्मों में लंबे समय से खोए परिवार/प्रेमियों को एकजुट करने में मदद करता है। संक्षेप सीमा, विधुर मोहन की एकमात्र संतान है, जिसे मोहन के मालिक सरदार रंजीत सिंह ने गोद लिया है। उनकी अपनी संपत्ति का कोई वारिस नहीं है, क्योंकि उनकी बेटी, जमुना (निरूपा रॉय), एक गरीब किसान, गोपाल (भारत भूषण) के साथ रहती है। रंजीत की अपने सौतेले भाई शंकर (मदन पुरी) के साथ नहीं बनती है। जमुना अपने पिता को आखिरकार मना लेती है, और वह उनके घर जाते हैं। वह वहाँ देखते हैं कि घर आग की लपटों में घिरा हुआ है और गोपाल जल के मर चुका है। उनका बेटा, सुन्दर लापता हो जाता है। वर्षों बाद, सीमा (आशा पारेख) अब बड़ी हो गई है और ऊटी में प्यारेलाल (शशि कपूर) नामक एक युवक से मिलती है। वह उससे एक साल बाद फिर मिलती है, लेकिन इस बार वह खुद को झटपट सिंह के रूप में पेश करता है। इसके तुरंत बाद वह असली झटपट सिंह से मिलती है, और नकली झटपट सिंह उर्फ ​​प्यारेलाल के बारे में अपना विचार बदल लेती है। अब सुनील को पता चल जाता है कि उसे गोद लिया गया था और वह गोपाल का खोया बेटा है। वह सरदार रंजीत सिंह के पास जाता है और उसे जायदाद को सम्भालने का काम दिया जाता है। वहाँ वह फिर से सीमा से मिलता है और वे अपना प्रेम-संबंध फिर से शुरू करते हैं। उस समय तक, संपत्ति चोरी करने की योजना बनाते हुए, शंकर अपने बेटे को जमुना और गोपाल के खोए हुए बेटे के रूप में भेजता है। रंजीत सिंह उसे सही व्यक्ति मान लेता है और शंकर के बेटे से सीमा से शादी करना चाहता है। कुछ गलतफहमियों के बाद, परिवार आखिरकार फिर से मिल जाता है और जमुना का मानसिक स्वास्थ्य ठीक हो जाता है। फिल्म के अंत में सीमा और सुनील / सुन्दर की शादी होती है। मुख्य कलाकार शशि कपूर — सुन्दर / सुनील / प्यारेलाल आशा पारेख — सीमा कुमार भारत भूषण — गोपाल निरूपा रॉय — जमुना राजेन्द्रनाथ — नकली झटपट सिंह इफ़्तेख़ार — केशव असित सेन — कुँवर साहब किशन मेहता — रमेश वस्ती — सरदार रंजीत कुमार दुलारी — कमला मदन पुरी — शंकर कुमार लक्ष्मी छाया — लाजवंती "लज्जो" सुजाता — प्रकाश की माँ तबस्सुम — तारा संगीत गीत गायक आर॰ डी॰ बर्मन मजरुह सुल्तानपुरी तुम बिन जाऊँ कहाँ मोहम्मद रफी 3:27 I आप चाहे मुझ को लता मंगेशकर 4:32 आप से मिलिये प्यार लता मंगेशकर 6:28 मैं ना मिलूंगी नजर लता मंगेशकर 3:42 ना जा मेरे हमदम लता मंगेशकर 5:08 ओ नि सुल्ताना रे मोहम्मद रफी, लता मंगेशकर 5:09 चे खुश नजारें के मोहम्मद रफी 4:25 तुम बिन जाऊँ कहाँ किशोर कुमारभारद्वाज अनुराग खंडवा की वीरान पड़ी हवेली और मध्य प्रदेश सरकार का किशोरपन https://satyagrah.scroll.in/article/108777/kishore-kumar-singer-actor-profile-anecdotes 27 फरवरी 2019 सत्याग्रह 4 अगस्त 2018 hi-IN https://web.archive.org/web/20190227182110/https://satyagrah.scroll.in/article/108777/kishore-kumar-singer-actor-profile-anecdotes 27 फ़रवरी 2019 dead 3:31 II तुम बिन जाऊँ कहाँ किशोर कुमार 1:49 दुखी सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ 0230670 प्यार का मौसम श्रेणी:1969 में बनी हिन्दी फ़िल्म श्रेणी:आर॰ डी॰ बर्मन द्वारा संगीतबद्ध फिल्में