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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

वीरासन

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अगस्त 2021 वीरासन वज्रासन के सामान दिखने वाला आसन है, लेकिन इन दोनों में बहुत अंतर है। वज्रासन में आप अपनी एड़ी पर बैठते है जिसमे आपके दोनों घुटनो के बीच थोड़ी जगह होती है। जबकि वीरासन में आप पैरो के ऊपर बैठते है, घुटने एक दुसरे से जुड़े होते है और एड़ी बाहर की तरफ होती है। वीरासन योग के सबसे साधारण और सरल आसनो में से एक है और काफी महत्वपूर्ण भी है, क्योकि इसे बैठकर किया जा सकता है। इसे ध्यान और प्राणायाम के समय विकल्प के रूप में भी प्रयोग किया जाता है। मुख्यतः यह आसन पैरों को आराम देने तथा पैरो में रक्त संचार का संतुलन बनाये रखने के लिए उपयोगी है। वीरासन के फायदे - इसके अभ्यास से हृदय और श्वसन प्रणाली की कार्य शक्ति में भी वृद्धि होती है। यह आसन कब्ज, बवासीर, पेट फूलना और अपच ठीक करता है। यह आसन थके हुए पैरों को आराम देने में सहायक है और पैरो की चर्बी को भी कम करता है। इसका अभ्यास गर्भावस्था के दौरान आयी पैरों की सूजन को कम करता है। वीरासन उच्च रक्तचाप, अस्थमा को ठीक करने में मदद करता है। इस आसन में रीढ़ की हड्डी को सीधा रखा जाता है जो कमर दर्द को ठीक करने में सहायक है। यह आसन पैरों में रक्त संचार का संतुलन बांये रखता है। इसके अभ्यास से पाचन शक्ति में वृद्धि और गैस से राहत मिलती है।   वीरासन करने की विधि - वीरासन को बैठकर किया जाता है। इसलिए आप पैरो को मोड़कर बैठ जाइये और अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखिये। इस आसन को करने से पहले योग मैट या चटाई का इस्तेमाल करे। अब अपने दाहिने घुटने को धीरे से मोड़कर बाहर निकाले और इसी तरह अपने बांये घुटने के साथ करे। अब आराम से इस स्थति में बैठ जाइये और ध्यान रहे कि आप अपनी एड़ियों को बाहर की तरफ करके बैठे हो। इस आसन को 5 से 7 मिनट तक सानै से किया जा सकता है। इसे खाना खाने के बाद भी किया जा सकता है। सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ निर्देश https://web.archive.org/web/20180114203255/http://www.santosha.com/vira.html 14 जनवरी 2018 श्रेणी:ध्यान