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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

शिलप्पदिकारम

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शिलप्पादिकारम को 'तमिल साहित्य' के प्रथम महाकाव्य के रूप में जाना जाता है। इसका शाब्दिक अर्थ है- "नूपुर की कहानी"। इस महाकाव्य की रचना चोल वंश के शासक सेन गुट्टुवन के भाई इलांगो आदिगल ने लगभग ईसा की दूसरी-तीसरी शताब्दी में की थी। 'शिलप्पादिकारम' की सम्पूर्ण कथा नुपूर के चारों ओर घूमती है। इस महाकाव्य के नायक और नायिका 'कोवलन' और 'कण्णगी' हैं। यह महाकाव्य ‘पुहारक्कांडम’, 'मदरैक्कांडम' और 'वंजिक्कांडम' तीन भागों में विभाजित है। इन तीनों भागों में क्रमशः चोल, पाण्ड्य, और चेर राज्यों का वर्णन है। महाकाव्य में कवि ने तत्कालीन तमिल समाज का सजीव चित्र प्रस्तुत करने के साथ-साथ समाज में प्रचलित नृत्यों, व्यवसायों आदि का भी परिचय दिया है। इन्हें भी देखें जीवक चिन्तामणि कण्णगि संगम साहित्य बाहरी कड़ियाँ शिलपदतीकारम् हिंदी पीडीएफ on Internet archive Silappadikaram (गूगल पुस्तक ; अंग्रेजी अनुवादक-कृष्णमूर्ति) SILAPATHIKARAM.COM GRETIL etext A summary of the story with illustrations A synopsis of Silappadikaram entitled Silambu Selvam, written by Dr.  Shuddhananda Bharati श्रेणी:तमिल साहित्य