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पार्वती तिर्की

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पार्वती तिर्की (जन्म 16 जनवरी 1994)https://www.prabhatkhabar.com/state/jharkhand/ranchi/sahitya-akademi-yuva-puraskar-2025-dr-parvati-tirkey-jharkhand-tribal-girl कौन हैं डॉ पार्वती तिर्की? हिन्दी कविता संग्रह ‘फिर उगना’ के लिए मिलेगा साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार Sahitya Akademi Yuva Puraskar 2025 Dr Parvati Tirkey Jharkhand tribal girl 2025-06-18 प्रभात खबर hi 2025-06-19 एक भारतीय कवयित्री, शिक्षिका और शोधकर्ता हैं, जो झारखंड के गुमला जिले से आती हैं। कुड़ुख जनजाति समुदाय से संबंधित डॉ तिर्की समकालीन हिन्दी साहित्य में अपने महत्वपूर्ण योगदान के लिए जानी जाती हैं। उनका प्रथम काव्य संग्रह फिर उगना वर्ष 2025 में साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया।https://www.deccanherald.com/india/sahitya-akademi-announces-bal-sahitya-yuva-puraskar-for-2025-3591773 Sahitya Akademi 2025: Yuva, Bal Sahitya Puraskar Winners Announced Deccan Herald en 2025-06-19https://economictimes.indiatimes.com/news/india/sahitya-akademi-announces-bal-sahitya-yuva-puraskar-for-2025/articleshow/121930724.cms?from=mdr Sahitya Akademi announces Bal Sahitya, Yuva Puraskar for 2025 2025-06-18 The Economic Times 2025-06-19 0013-0389 प्रारंभिक जीवन और शिक्षा पार्वती तिर्की का जन्म 16 जनवरी 1994 को झारखंड के गुमला जिले में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा जवाहर नवोदय विद्यालय, गुमला से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), वाराणसी से हिन्दी साहित्य में स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। बाद में, उन्होंने बीएचयू के हिन्दी विभाग से “कुड़ुख आदिवासी गीत: जीवन राग और जीवन संघर्ष” विषय पर शोध करते हुए पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। शैक्षणिक जीवन डॉ. तिर्की वर्तमान में रांची विश्वविद्यालय से संबद्ध राम लखन सिंह यादव कॉलेज में हिन्दी विभाग की सहायक प्राध्यापक के रूप में कार्यरत हैं। उनका शैक्षणिक और साहित्यिक कार्य आदिवासी मौखिक परंपराओं, लोक गीतों और आधुनिक हिन्दी कविता के संगम को उजागर करता है। वह आदिवासी अनुभवों को मुख्यधारा साहित्य में स्थान देने का प्रयास करती हैं। साहित्यिक योगदान फिर उगना (2023) डॉ. तिर्की का पहला काव्य संग्रह फिर उगना वर्ष 2023 में राधाकृष्ण प्रकाशन द्वारा प्रकाशित हुआ। इस संग्रह को इसकी संवेदनशील, सरल और संवादात्मक शैली के लिए सराहा गया है। उनकी कविताओं में धरती, पेड़, पक्षी, जंगल और आकाशीय तत्व केवल रूपक नहीं बल्कि जीवंत उपस्थिति के रूप में प्रकट होते हैं। उनकी कविताएँ आदिवासी जीवन और दर्शन में गहराई से रची-बसी हैं, जिनमें किसी प्रकार का आदर्शीकरण या कृत्रिमता नहीं है। संग्रह में आधुनिकता और आदिवासी पहचान के संघर्ष, सांस्कृतिक क्षरण, पारिस्थितिक चेतना और हाशिए के समाज की मौन प्रतिरोधशीलता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है। सम्मान साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार, 2025 – काव्य संग्रह फिर उगना के लिए।https://sahitya-akademi.gov.in/pdf/Pressrelease_YP-2025_h.pdf Sahitya akadami Yuva puraskar Akadami Sahitya 19 June 2025 साहित्य अकादमी 19 June 2025 प्रलेक नवलेखन सम्मान 2023https://www.drishtiias.com/state-pcs-current-affairs/young-poetess-dr-parvati-tirkey-received-pralek-navlekhan-samman Young Poetess Dr. Parvati Tirkey Received 'Pralek Navlekhan Samman' Drishti IAS en 2025-06-19 यह भी देखें हिन्दी संदर्भ श्रेणी:1994 में जन्मे लोग श्रेणी:जीवित लोग श्रेणी:भारतीय कवयित्रियाँ श्रेणी:हिंदी कवयित्रियाँ श्रेणी:बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र श्रेणी:आदिवासी लोग