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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

सतिपट्ठान

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सतिपट्ठान (संस्कृत : स्मृत्युपस्थान = स्मृति + उपस्थान ) महात्मा बुद्ध की शिक्षाओं में महत्वपूर्ण साधना है। स्मृत्युपस्थान का अर्थ है, सतत जागरूक रहने का अभ्यास । निरन्तर अप्रमाद रहकर सति-भावना करने पर धीरे-धीरे साधक की प्रज्ञा-चक्षु खुल जाती है। उस प्रज्ञा-चक्षु के द्वारा साधक प्रज्ञप्ति समतिक्रम कर नाम-रूप-पंचस्कन्ध का यथाभूत अनित्य-दुःख-अनात्म स्वभाव को दर्शन करने लगते है। इस तरह अपने स्वरूप के यथाभूत दर्शन करने को विपश्यना या विदर्शन कहते हैं। सत्तिपट्ठान-विपम्सना-भावना की आधारशिला है सूत्रपिटक के अन्तर्गत दीघनिकाय का महासतिपट्ठान सूत्र, जो शान्ति-प्रार्थी जिज्ञासु साधकों के लिए अत्यन्त ही महत्त्वपूर्ण है। विदर्शन-भावना के द्वारा साधक श्रप्रमत्त हो अपने शरीर और मन के विषय में सतत जागरूक रहकर अपने चित्त को विशुद्ध , निर्मल और निर्विकार बनाकर, समाधि प्राप्त कर, 'परम सत्य' का साक्षात्कार कर सकते हैं। सतिपट्ठान भावना के विषय में भगवान बुद्ध कहते हैं :- भिक्षुओ ! भाणियों की विशुद्धि के लिए, शोक-सन्ताप से छूटने के लिए, दुःख-दौर्मनस्य का नाश करने के लिए, लोकोत्तर मार्ग के अधिगम के लिए और निर्वाण-मुक्ति के साक्षात्कार के लिए - यह एक एकमात्र मार्ग है । इन्हें भी देखें सतिपट्ठान सुत्त महासतिपट्ठान सुत्त सन्दर्भ श्रेणी:बौद्ध दार्शनिक अवधारणाएँ श्रेणी:धर्म का दर्शन श्रेणी:जापानी भाषा पाठ वाले लेख श्रेणी:चीनी भाषा पाठ वाले लेख