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दादाखाचर
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दादाखाचर (१८००-१८५२) भगवान स्वामीनारायण के सुप्रसिद्ध परमभक्त तथा गढ़डा के राजा थे । उनके पिता एभेल खाचर और माता सोमादेवी थीं और जन्म के समय उनका नाम उत्तमसिंह था । वे दादा खाचर के नाम से जाने गए और उनकी चार बहनें थीं, जया, ललिता, पांचाली और नानू। उनका पूरा परिवार भगवान स्वामीनारायण का परमभक्त था।
(१० फ़रवरी १८०५) को भगवान स्वामीनारायण के गढ़डा आगमन पर, भक्तराज दादाखाचर ने अपनी सभी संपत्ति और राज्य भगवान स्वामीनारायण को समर्पित कर दिया था। भगवान ने अनेक बार दादाखाचर की परीक्षा भी ली, लेकिन उन्होंने अपनी भक्ति नहीं छोड़ी। दादाखाचर की भक्ति के वश होकर स्वामीनारायण ने गढ्डा को ही अपना घर माना, और २५ वर्ष से ज्यादा यही रहे। दादाखाचर के आग्रह पर श्रीजी महाराजने गढ्डा में शिखरबद्ध मंदिर बनवा कर अपने मनुष्य रूप के ही समान गोपीनाथजी देव की मूर्ति प्रतिष्ठित की।
उनका दरबारगढ़ गढ़डा में आज भी विद्यमान है। आज भी उन्हें स्वामीनारायण संप्रदाय में भगवान स्वामीनारायण के सर्वश्रेष्ठ भक्त के रूप में याद किया जाता है।
दादाखाचर की देहावसान सवंत १८५२ में गढ्डा में हुई।
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भगवान स्वामीनारायण
स्वामीनारायण सम्प्रदाय
स्वामीनारायण मंदिर, गढड़ा