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पासिफे समूह
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पासिफे समूह (Pasiphae group) बृहस्पति के 'प्रतिगामी अनियमित उपग्रहों' का एक विस्तृत खगोलीय समूह है। 'प्रतिगामी' कक्षा का अर्थ है कि इस समूह के सभी उपग्रह बृहस्पति की परिक्रमा उसी दिशा में करते हैं जो बृहस्पति के अपने घूर्णन की दिशा के विपरीत है। इस समूह का नाम इसके सबसे बड़े और सबसे पहले खोजे गए सदस्य, पासिफे उपग्रह के नाम पर रखा गया है, जिसकी खोज 1908 में ब्रिटिश खगोलशास्त्री फिलिबर्ट जैक्स मेलोटी ने 'ग्रीनविच वेधशाला' में की थी।Bagenal Fran Dowling Timothy E. McKinnon William B. Jupiter: The Planet, Satellites and Magnetosphere https://archive.org/details/isbn_9780521818087 Cambridge University Press 2004 978-0521818087 266-269"An abundant population of small irregular satellites around Jupiter"अगस्त 2026 InternetArchiveBot
खगोलविदों और खगोल भौतिकीविदों का मानना है कि पासिफे समूह के उपग्रह बृहस्पति के साथ एक ही समय पर नहीं बने थे। इन उपग्रहों की उत्पत्ति का सबसे स्वीकृत सिद्धांत यह है कि ये सौर मंडल के प्रारंभिक इतिहास में क्षुद्रग्रह बेल्ट से आए एक बड़े क्षुद्रग्रह के टुकड़े हैं।
अरबों वर्ष पूर्व, एक विशाल क्षुद्रग्रह बृहस्पति के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र द्वारा पकड़ लिया गया था। बाद में, यह क्षुद्रग्रह किसी अन्य खगोलीय पिंड या धूमकेतु से टकराकर नष्ट हो गया। इस शक्तिशाली टक्कर में बचा हुआ सबसे बड़ा टुकड़ा 'पासिफे' बन गया, और जो छोटे टुकड़े अंतरिक्ष में बिखर गए, वे बृहस्पति की कक्षा में स्थापित होकर इस समूह के अन्य छोटे उपग्रह बन गए।
हालांकि, समूह के एक अन्य बड़े उपग्रह 'सिनोपे' का रंग पासिफे से थोड़ा अलग (हल्का लाल) है, जिससे कुछ वैज्ञानिक यह मानते हैं कि सिनोपे संभवतः एक स्वतंत्र रूप से पकड़ा गया क्षुद्रग्रह हो सकता है जो संयोग से इसी कक्षा में स्थापित हो गया।Sheppard Scott S. Jewitt David C. An abundant population of small irregular satellites around Jupiter https://archive.org/details/sim_nature-uk_2003-05-15_423_6937/page/261 Nature 423 6937 2003 261-263 10.1038/nature01584
कक्षीय विशेषताएँ
पासिफे समूह के उपग्रह बृहस्पति से बहुत अधिक दूरी पर स्थित हैं और इनकी कक्षाएं अत्यधिक फैली हुई हैं:
दूरी: इन उपग्रहों का 'अर्ध-दीर्घ अक्ष' बृहस्पति से लगभग 2.28 करोड़ (22.8 मिलियन) से 2.41 करोड़ किलोमीटर के बीच है। इतनी विशाल दूरी के कारण, इन्हें बृहस्पति की एक पूरी परिक्रमा करने में 700 से 770 पृथ्वी-दिन (लगभग दो वर्ष) का समय लगता है।
झुकाव: बृहस्पति के भूमध्यरेखीय तल के सापेक्ष इनकी कक्षा का झुकाव 144.5° और 158.3° के बीच होता है। यह 90° से अधिक का झुकाव इनकी 'प्रतिगामी' (उल्टी दिशा में परिक्रमा करने वाली) प्रकृति को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
उत्केंद्रता: इन उपग्रहों की कक्षाएँ अत्यधिक अंडाकार हैं। इनकी 'उत्केंद्रता' 0.25 से 0.43 के बीच पाई जाती है, जिसका अर्थ है कि इनकी बृहस्पति से दूरी इनकी कक्षा के दौरान बहुत अधिक बदलती रहती है।Grav Tommy Holman Matthew J. Near-Infrared Photometry of the Irregular Satellites of Jupiter and Saturn The Astrophysical Journal Letters 605 2 2004 L141-L144 10.1086/420881"The Orbits of Jupiter's Irregular Satellites""Proper Elements and Secular Resonances for Irregular Satellites"
प्रमुख सदस्य
अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ (IAU) की नामकरण परंपरा के अनुसार, बृहस्पति के प्रतिगामी अनियमित उपग्रहों के नाम के अंत में हमेशा "e" (ए) अक्षर आता है। पासिफे समूह के प्रमुख सदस्य इस प्रकार हैं:
पासिफे: यह इस समूह का सबसे बड़ा सदस्य है, जिसका व्यास लगभग 60 किलोमीटर है।
सिनोपे: लगभग 38 किलोमीटर के व्यास के साथ यह समूह का दूसरा सबसे बड़ा उपग्रह है। इसकी खोज 1914 में हुई थी।
कैलिर्हो: यह एक छोटा उपग्रह है जिसका व्यास लगभग 9 किलोमीटर है, जिसे 1999 में खोजा गया था।
मेगाक्लाइट: यह भी एक छोटा (लगभग 5 किमी व्यास) उपग्रह है, जो 2000 में खोजा गया था।
इस समूह में ऑटोनोए, यूरीडोम और स्पोंडे जैसे कई अन्य बहुत छोटे उपग्रह भी शामिल हैं, जिनका व्यास मात्र 2 से 3 किलोमीटर है।https://science.nasa.gov/jupiter/jupiter-moons/ Jupiter Moons - NASA Science NASA 25 जून 2026Schmadel Lutz D. Dictionary of Minor Planet Names https://archive.org/details/dictionaryofmino0000lutz Springer Science & Business Media 2012 978-3642297182 15-20
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
नासा (NASA) - बृहस्पति और उसके उपग्रह अन्वेषण
श्रेणी:खगोल विज्ञान
श्रेणी:सौर मंडल