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बरहामपुर जेल
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ब्रह्मपुर के ब्रिटिश कालीन ऐतिहासिक कारागार ओडिशा और पश्चिम बंगाल, भारत सक्रिय / ऐतिहासिक धरोहर 1863 (ओडिशा) / 1767 (पश्चिम बंगाल)
ब्रह्मपुर के ब्रिटिश कालीन कारागार भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान स्थापित दो महत्वपूर्ण ऐतिहासिक जेलों को संदर्भित करते हैं। अंग्रेजी वर्तनी (Berhampur / Berhampore) में समानता होने के कारण अक्सर इन दोनों के इतिहास को एक साथ देखा जाता है, लेकिन ये दो अलग-अलग राज्यों में स्थित हैं और दोनों का भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।
ब्रह्मपुर मंडल कारागार, ओडिशा (Berhampur Circle Jail)
यह ओडिशा के गंजम जिले के ब्रह्मपुर (Berhampur) शहर में स्थित राज्य के सबसे पुराने कारागारों में से एक है।
इतिहास और स्थापना
स्थापना: ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार द्वारा दक्षिण ओडिशा क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इस जेल की स्थापना वर्ष 1863 में की गई थी।
स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका: भारत छोड़ो आंदोलन और असहयोग आंदोलन के दौरान, दक्षिण ओडिशा के सैकड़ों स्वतंत्रता सेनानियों को ब्रिटिश सरकार द्वारा इस जेल में बंदी बनाकर रखा गया था।
शहीद लक्ष्मण नायक और ऐतिहासिक कोठरियाँ
लक्ष्मण नायक का कारावास: महान आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी और प्रजामंडल आंदोलन के नेता लक्ष्मण नायक को अंग्रेजों द्वारा इसी जेल में कैद किया गया था।
फांसी: ब्रिटिश सरकार के आदेश पर 29 मार्च 1943 को ब्रह्मपुर जेल के भीतर ही लक्ष्मण नायक को फांसी दे दी गई थी।
स्मारक और संरक्षण: जेल प्रशासन ने आज भी उन चार विशेष कोठरियों (Cells) को पूरी तरह सुरक्षित और संरक्षित रखा है, जहाँ लक्ष्मण नायक ने अपने जीवन के अंतिम दिन बिताए थे। हर साल उनकी पुण्यतिथि पर यहाँ श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जाता है।
बहरामपुर केंद्रीय कारागार, पश्चिम बंगाल (Berhampore Central Jail)
यह कारागार पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बहरामपुर (Berhampore) में स्थित है।https://www.google.com/?gws_rd=ssl Google www.google.com 2026-10-13
इतिहास और 1857 का विद्रोह
ब्रिटिश सैन्य बैरक (1767): प्लासी के युद्ध (1757) की जीत के बाद, ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने वर्ष 1767 में बहरामपुर में एक विशाल सैन्य छावनी और बैरक का निर्माण किया था। बाद में सेना के हटने पर इन बैरकों को नागरिक जेल में बदल दिया गया।
1857 की पहली चिंगारी: इतिहास में दर्ज है कि 25 फरवरी 1857 को इसी बहरामपुर छावनी क्षेत्र में 19वीं नेटिव इन्फैंट्री के भारतीय सिपाहियों ने नए कारतूसों का उपयोग करने से मना कर दिया था, जिसने 1857 के विद्रोह की पहली नींव रखी थी।
स्वतंत्रता सेनानी और कवि काजी नजरुल इस्लाम
क्रांतिकारियों का गढ़: स्वदेशी और असहयोग आंदोलन के दौरान अनुशीलन समिति और युगांतर समूह के कई स्वतंत्रता सेनानियों को यहाँ कैद किया गया था।
काजी नजरुल इस्लाम: प्रसिद्ध विद्रोही कवि काजी नजरुल इस्लाम को अंग्रेजों के खिलाफ कविताएं लिखने के आरोप में वर्ष 1923 के दौरान इसी बहरामपुर जेल में रखा गया था, जहाँ उन्होंने अपनी प्रसिद्ध रचनाएँ लिखी थीं।
संदर्भ
इन्हें भी देखें
लक्ष्मण नायक
1857 का प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम
काजी नजरुल इस्लाम