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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

शृंगी

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महाभारत के शमीक पुत्र ऋषि के बारे में विभाण्डक पुत्र के लिए ऋष्यशृंग अन्य उपयोगों के लिए शृंगी (बहुविकल्पी) महाभारत , भागवतपुराण आदि ग्रन्थों के अनुसार शृंगी शमीक के पुत्र थे। इनके पिता के गले में सर्प डालने के कारण क्रोधित हो इन्होंने परीक्षित को शाप दिया था, जिसके कारण तक्षक नाग ने परीक्षित को डँसा और तत्काल उनकी मृत्यु हो गई।https://www.jagran.com/spiritual/religion-the-untold-story-of-arjun-grandson-and-the-seven-day-life-curse-40292453.html अर्जुन के पौत्र परीक्षित को 7 दिन में मृत्यु का श्राप क्यों मिला? जानिए शृंगी ऋषि की कथा दैनिक जागरण hi 27 जुलाई 2026 व्युत्पत्ति एवं व्याकरण शृंगी शब्द संस्कृत भाषा का पद है। व्याकरणिक और शब्द-रचना की दृष्टि से इसका विश्लेषण निम्न प्रकार है: मूल शब्द व प्रत्यय: यह शब्द मूल संस्कृत संज्ञा शृंग (अर्थ: सींग) में 'इन्' (इनि) मत्वर्थीय प्रत्यय लगाने से बना है। प्रथमा विभक्ति, एकवचन में इसका रूप **शृंगी** बनता है।आप्टे वामन शिवराम संस्कृत-हिन्दी कोश मोतीलाल बनारसीदास 1024 व्याकरणिक अर्थ: इसका शाब्दिक अर्थ "सींग वाला" या "जिसके पास सींग हो" होता है। यह एक मत्वर्थीय विशेषण (Possessive Adjective) है जो संज्ञा के रूप में भी प्रयुक्त होता है। वर्तनी शुद्धता: मानक देवनागरी तथा संस्कृत व्याकरण के अनुसार 'शृंगी' ही शुद्ध वर्तनी है। बहुधा इसे अशुद्ध रूप में *श्रृंगी* लिख दिया जाता है, जो कि व्याकरणिक नियमों (श + ऋ) के विपरीत है। नाम का पौराणिक संदर्भ पौराणिक साहित्य में 'शृंगी' और रामायण काल के 'ऋष्यशृंग' दो अलग-अलग ऋषि पात्र हैं: **शृंगी:** शमीक ऋषि के पुत्र (महाभारत के आदि पर्व के अनुसार), जिन्होंने राजा परीक्षित को तक्षक नाग के डंसने का शाप दिया था। **ऋष्यशृंग:** विभांडक ऋषि के पुत्र (रामायण के अनुसार), जिनका नाम दो शब्दों ('ऋष्य' अर्थात हिरण + 'शृंग' अर्थात सींग) के समास से बना है। इनका नाम हिरण के समान सींग वाले मस्तक के कारण पड़ा था। परीक्षित को शाप की कथा राजा परीक्षित को शाप महाभारत के आदि पर्व तथा भागवत पुराण के अनुसार, राजा परीक्षित शिकार खेलते समय भूखे-प्यासे शमीक ऋषि के आश्रम में पहुँचे। ऋषि उस समय मौन ध्यान में लीन थे, जिस कारण वे राजा का स्वागत न कर सके। क्रोधित होकर राजा परीक्षित ने एक मरा हुआ सांप उठाकर ऋषि के गले में डाल दिया।शास्त्री रामचंद्र श्रीमद्भागवत महापुराण गीताप्रेस गोरखपुर 45-48 जब शमीक ऋषि के तेजस्वी पुत्र **शृंगी** आश्रम लौटे और अपने पिता के गले में मृत सर्प देखा, तो वे अत्यंत क्रोधित हो गए। उन्होंने कौशिकी नदी के जल का आचमन करके शाप दिया कि "जिस पापत्मा ने मेरे पिता का यह अपमान किया है, उसे आज से सातवें दिन तक्षक नाग डंस लेगा और उसकी मृत्यु हो जाएगी।"व्यास महर्षि महाभारत (आदि पर्व) गीताप्रेस गोरखपुर 210-212 शमीक ऋषि को जब इस शाप का पता चला तो उन्होंने अपने पुत्र के इस उग्र व्यवहार का अधर्म बताकर दुःखाभिव्यक्त किया, परंतु दिया हुआ शाप निष्फल नहीं हो सकता था। धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व पौराणिक कथाओं में शृंगी ऋषि को उनके तीव्र तपोबल, क्रोध और पितृभक्ति के लिए जाना जाता है। कलि युग का प्रारंभ: पौराणिक मान्यता के अनुसार, राजा परीक्षित की मृत्यु के बाद ही पृथ्वी पर कलियुग का प्रभाव पूरी तरह से स्थापित हुआ। इस दृष्टि से शृंगी द्वारा दिया गया शाप पौराणिक कालचक्र की एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटना माना जाता है। पितृभक्ति और नियम: शृंगी का चरित्र यह दर्शाता है कि प्राचीन काल में ऋषियों के पुत्र अपने पिता के सम्मान की रक्षा के लिए कितना कठोर कदम उठा सकते थे, यद्यपि उनके पिता शमीक ने क्षमा और शांत स्वभाव को ही श्रेष्ठ धर्म माना। इन्हें भी देखें शमीक वेदव्यास जनमेजय शुकदेव सन्दर्भ श्रेणी:महाभारत के पात्र श्रेणी:ऋषि