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सुरती नारायण मणि त्रिपाठी
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सुरती नारायण मणि त्रिपाठी 1900 गोरखपुर, ब्रिटिश भारत 1988 भारतीय इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासनिक अधिकारी, राजनीतिज्ञ गोरखपुर विश्वविद्यालय के संस्थापक अध्यक्ष उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य 1967 1968 उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य 1974 1977 सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति सेंट एंड्र्यूज़ कॉलेजम्योर सेंट्रल कॉलेज इलाहाबाद विश्वविद्यालय
सुरती नारायण मणि त्रिपाठी, जिन्हें एस.एन.एम. त्रिपाठी और पंडित त्रिपाठी (1900–1988) के नाम से भी जाना जाता है, एक भारतीय प्रशासनिक अधिकारी तथा बाद में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से राजनेता थे।Shashank Chaturvedi David N. Gellner Sanjay Kumar Pandey Politics in Gorakhpur since the 1920s: the making of a safe 'Hindu' constituency Contemporary South Asia टेलर एंड फ्रांसिस 11 जनवरी 2019 27 40–57 10.1080/09584935.2018.1521785 free वे उत्तर प्रदेश के पहले आई.सी.एस. अधिकारी थे और गोरखपुर विश्वविद्यालय के संस्थापक अध्यक्ष रहे।Eminent Personalities https://gorakhpur.nic.in/personalities/ www.gorakhpur.nic.in उन्होंने उत्तर प्रदेश से विधान परिषद सदस्य के रूप में दो बार कार्य किया, पहली बार 1967 से 1968 तक और दूसरी बार 1974 से 1977 तक।Shukla Umesh हमारे पितृ पुरूष: पैदल चलकर और नाला पार कर की पढ़ाई, बन गए कलेक्टर https://www.livehindustan.com/uttar-pradesh/gorakhpur/story-surti-narayan-tripathi-struggle-for-education-become-dm-2193884.html लाइव हिन्दुस्तान 27 सितम्बर 2018 वे सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति भी रहे और गोरखपुर विश्वविद्यालय की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रारम्भिक जीवन
उनका जन्म 1900 में गोरखपुर जिले के बारपर गाँव में एक सरयू पारीण ब्राह्मण परिवार में हुआ। प्रारम्भिक शिक्षा बारपर के लोअर प्राइमरी स्कूल से हुई, इसके बाद उन्होंने सिरजाम और मझौली राज के विद्यालयों में पढ़ाई की। 1918 में उन्होंने गवर्नमेंट जुबिली स्कूल से हाई स्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण की और आगे की पढ़ाई के लिए सेंट एंड्र्यूज़ कॉलेज में दाखिला लिया।
1921 में उन्होंने इलाहाबाद स्थित म्योर सेंट्रल कॉलेज में कला स्नातक (बी.ए.) की पढ़ाई शुरू की, जिसे 1923 में पूरा किया। इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से कला स्नातकोत्तर (एम.ए.) और कानून में स्नातक (एल.एल.बी.) की डिग्रियाँ प्राप्त कीं।
करियर
1925 में वे गोरखपुर लौटे और सिविल कोर्ट में वकालत करने लगे। उसी वर्ष उनका चयन प्रांतीय सिविल सेवा (उत्तर प्रदेश) में हुआ और पहली नियुक्ति बस्ती जिले में मिली। भारत की स्वतंत्रता के बाद 1947 में उन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में सम्मिलित किया गया। उन्होंने गोरखपुर, इलाहाबाद और लखनऊ के जिलाधिकारी के रूप में कार्य किया।
1956 में सुरती नारायण मणि त्रिपाठी को लोक सेवा आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया, जहाँ उन्होंने 1961 तक सेवा दी।Civic Affairs. (1956). भारत: पी.सी. कपूर, सिटिजन प्रेस. पृष्ठ 27. इसके बाद वे कानपुर स्थित ब्रिटिश इंडिया कॉरपोरेशन में वरिष्ठ उप प्रबंध निदेशक और उपाध्यक्ष बने। 1962 में उन्हें सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया गया।
राजनीति
जून 1966 में त्रिपाठी ने भारतीय सिविल सेवा से सेवानिवृत्ति ली और गोरखपुर लौट आए। इसके बाद उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और उत्तर प्रदेश विधान परिषद की गोरखपुर–फ़ैज़ाबाद स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा। 1967 में वे पहली बार विधान परिषद सदस्य (MLC) निर्वाचित हुए। 1974 में पुनः चुने गए और अपना दूसरा कार्यकाल पूरा किया। इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से अलग होने का निर्णय लिया।
1988 में सुरती नारायण मणि त्रिपाठी का निधन हो गया।
सन्दर्भ
श्रेणी:1900 में जन्मे लोग
श्रेणी:१९८८ में निधन
श्रेणी:उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य
श्रेणी:उत्तर प्रदेश के नेता
श्रेणी:भारतीय सिविल सेवक