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411 समाचार
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घृत कुमारी

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घृत कुमारीग्वारपाठा, क्वारगंदल Aloe_vera_flower_inset.png 250px अरूबा मे उगी घृत कुमारी, देखें पुष्प. पादप मैग्नोलिओफाईटा लिलिओप्सिडा ऐस्पैरागलेस ऐस्फोडिलसी एलो A. vera Aloe vera (L.) बर्म.एफ. घृत कुमारी या अलोवेरा/एलोवेरा, जिसे क्वारगंदल या ग्वारपाठा के नाम से भी जाना जाता है, एक औषधीय पौधे के रूप में विख्यात है। इसकी उत्पत्ति संभवतः उत्तरी अफ्रीका में हुई है। यह प्रजाति विश्व के अन्य स्थानों पर स्वाभाविक रूप से नहीं पायी जाती पर इसके निकट संबंधी अलो उत्तरी अफ्रीका में पाये जाते हैं। इसे सभी सभ्यताओं ने एक औषधीय पौधे के रूप में मान्यता दी है और इस प्रजाति के पौधों का इस्तेमाल पहली शताब्दी ईसवी से औषधि के रूप में किया जा रहा है। इसका उल्लेख आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। इसके अतिरिक्त इसका उल्लेख नए करार (न्यू टेस्टामेंट) में किया हैनए करार (न्यू टेस्टामेंट) से: (यूहन्ना 19:39-40 और वहां नीकुदेमुस भी आया, जो रात को पहले यीशु के पास गया और साथ लाया गन्धरस और अलो का मिश्रण...) लेकिन, यह स्पष्ट नहीं है कि बाइबल में वर्णित अलो और अलो वेरा में कोई संबंध है। घृत कुमारी के अर्क का प्रयोग बड़े स्तर पर सौंदर्य प्रसाधन और वैकल्पिक औषधि उद्योग जैसे चिरयौवनकारी (त्वचा को युवा रखने वाली क्रीम), आरोग्यी या सुखदायक के रूप में प्रयोग किया जाता है, लेकिन घृत कुमारी के औषधीय प्रयोजनों के प्रभावों की पुष्टि के लिये बहुत कम ही वैज्ञानिक साक्ष्य मौजूद है और अक्सर एक अध्ययन दूसरे अध्ययन की काट करता प्रतीत होता है। इस सबके बावजूद, कुछ प्रारंभिक सबूत है कि घृत कुमारी मधुमेह के इलाज में काफी उपयोगी हो सकता है साथ ही यह मानव रक्त में लिपिड का स्तर काफी घटा देता है। माना जाता है ये सकारात्मक प्रभाव इसमे उपस्थिति मन्नास, एंथ्राक्युईनोनेज़ और लिक्टिन जैसे यौगिकों के कारण होता है।दैनिक भास्कर पर https://web.archive.org/web/20090212204627/http://www.bhaskar.com/2009/01/06/0901061310_aloevera_beauty.html 12 फ़रवरी 2009 त्वचा संबंधी कई बीमारियों से मुक्ति के लिए एलोविरा इसके अलावा मानव कल्याण संस्थान के निदेशक और सेवानिवृत्त चिकित्सा अधिकारी डॉ॰गंगासिंह चौहान ने काजरी के रिटायर्ड वैज्ञानिक डॉ॰ए पी जैन के सहयोग से एलोविरा और मशरूम के कैप्सूल तैयार किए हैं, जो एड्स रोगियों के लिए बहुत लाभदायक हैं।दैनिक भास्कर पर https://web.archive.org/web/20080905084713/http://www.bhaskar.com/spotlight/aids_day/200712030712030353_mushroom.html 5 सितंबर 2008 एड्स का इलाज! यह रक्त शुद्धि भी करता है।हलचल पर https://web.archive.org/web/20120204225250/http://halchal.gyandutt.com/2007/12/blog-post_26.html?showComment=1198677000000 4 फ़रवरी 2012 रक्त की शुद्धता के लिये ग्वार पाठा वर्णन thumb|right|200px|धब्बेदार घृत कुमारी घृत कुमारी का पौधा बिना तने का या बहुत ही छोटे तने का एक गूदेदार और रसीला पौधा होता है जिसकी लम्बाई ६०-१०० सेंटीमीटर तक होती है। इसका फैलाव नीचे से निकलती शाखाओं द्वारा होता है। इसकी पत्तियां भालाकार, मोटी और मांसल होती हैं जिनका रंग, हरा, हरा-स्लेटी होने के साथ कुछ किस्मों में पत्ती के ऊपरी और निचली सतह पर सफेद धब्बे होते हैं। पत्ती के किनारों पर की सफेद छोटे दाँतों की एक पंक्ति होती है। गर्मी के मौसम में पीले रंग के फूल उत्पन्न होते हैं। माना जाता है कि घृत कुमारी मूलत: उत्तरी अफ्रीका का पौधा है और मुख्यत: अल्जीरिया, मोरक्को, ट्यूनीशिया के साथ कैनेरी द्वीप और माडियरा द्वीपों से संबंधित है हालाँकि अब इसे पूरे विश्व में उगाया जाता है। इस प्रजाति को चीन, भारत, पाकिस्तान और दक्षिणी यूरोप के विभिन्न भागों में सत्रहवीं शताब्दी में लाया गया था। इस प्रजाति को शीतोष्ण और उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में जैसे ऑस्ट्रेलिया, बारबाडोस, बेलीज़, नाइजीरिया, संयुक्त राज्य अमरीका और पैराग्वे में भी सफलता पूर्वक उगाया जाता है। विश्व में इसकी २७५ प्रजातियाँ पाई जाती हैं।मेरा समस्त https://web.archive.org/web/20160305122610/http://merasamast.blogspot.com/2009/04/blog-post_131.html 5 मार्च 2016 देखें ग्वारपाठा कृषि right|thumb|200px|घृत कुमारी एक सजावटी पौधे के रूप मे उगी हुयी आजकल घृत कुमारी की खेती एक बहुत बड़े स्तर पर एक सजावटी पौधे के रूप में की जा रही है। अलो वेरा को आधुनिक उत्पादक इसके औषधीय गुणों के कारण उगा रहे हैं। इसकी सरसता इसे कम वर्षा वाले प्राकृतिक क्षेत्रों में जीवित रहने में सक्षम बनाती है, जिसके चलते यह पठारी और शुष्क क्षेत्रों के किसानों में बहुत लोकप्रिय है। घृत कुमारी हिमपात और पाले का सामना करने में असमर्थ होता है। आमतौर पर यह कीटों का प्रतिरोध करने में सक्षम होता है पर कुछ कीट जैसे मीली बग, पटरी कीट और एफिड कीड़ों के कारण पादप की वृद्धि में गिरावट आ सकती है। गमले में पौधों के लिये बालुई मिट्टी जिसमे पानी का निकास अच्छा हो तेज खिली धूप की स्थिति आदर्श होती है। आमतौर पर इन पौधो के लिये टैराकोटा के गमले क्योंकि यह छिद्रयुक्त होते हैं और अच्छी गुणवत्ता की खाद की सिफारिश की जाती है। सर्दियों के दौरान घृत कुमारी सुषुप्तावस्था में पहुँच जाती है और इस दौरान इसे बहुत कम नमी की आवश्यकता होती है। हिम या तुषार संभावित क्षेत्रों में पौधों को अन्दर या पौधाघर (ग्रीनहाउस) में रखना अच्छा रहता है। सौंदर्य प्रसाधन उद्योग के लिये अलो वेरा जैल की आपूर्ति के लिये घृत कुमारी का बड़े पैमाने पर कृषि उत्पादन ऑस्ट्रेलिया, क्यूबा, डोमिनिक गणराज्य, भारत, जमैका, दक्षिण अफ्रीका और केन्या के साथ संयुक्त राज्य अमरीका में भी होती है। मानव उपयोग घृत कुमारी के सौन्दर्य वर्धक और उपचारात्मक प्रभावों के संबंध में वैज्ञानिक साक्ष्य बहुत सीमित है और आम तौर पर विरोधाभासी है। इसके बावजूद सौन्दर्य और वैकल्पिक दवा उद्योग इसके चिकित्सीय गुणों का निरंतर दावा करता है। घृत कुमारी का स्वाद बहुत ही कड़वा होता है तथापि इसके जैल का प्रयोग व्यावसायिक रूप में उपलब्ध दही, पेय पदार्थों और कुछ मिठाइयों में एक घटक के रूप में किया जाता है। माना जाता है कि घृत कुमारी के बीजो से जैव इंधन प्राप्त किया जा सकता है। भेड़ के कृत्रिम गर्भाधान में वीर्य को पतला करने के लिये घृत कुमारी का प्रयोग होता है। ताजा भोजन के संरक्षक के रूप में और छोटे खेतों में जल संरक्षण के उपयोग में भी आता है। http://www.beautyepic.com/aloe-vera-juice-side-effects/ घृत कुमारी का दुष्प्रभाव 29 जून 2017 https://web.archive.org/web/20170723021547/http://www.beautyepic.com/aloe-vera-juice-side-effects/ 23 जुलाई 2017 dead चिकित्सा चीन, जापान और भारत में घृत कुमारी का प्रयोग पारंपरिक चिकित्सा में किया जाता है। व्यापक मान्यता के विपरीत कि घृत कुमारी विषैली नहीं होती, अगर इसको ज्यादा मात्रा में निगला जाये तो यह हानिकारक हो सकता है। मान्यता है कि घावों के भरने में घृत कुमारी प्रभावी इलाज है पर साक्ष्य सीमित और विरोधाभासी हैं। जलने और घाव पर लगाने के अलावा घृत कुमारी के सेवन से मधुमेह रोगियों की रक्त शर्करा के स्तर में सुधार होता है साथ ही यह उच्च लिपिडेमिक रोगियों के रक्त में लिपिड का स्तर घटाता है। सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ एलोवेरा (घृतकुमारी) के लाभ और गुण ज्ञान कॉसमॉस पर (हिन्दी में) एलो वेरा वाटर और जूस के स्वास्थ्य लाभ और गुण ज्ञान कॉसमॉस पर (हिन्दी में) अन्तर्राष्ट्रीय अलोय विज्ञान परिषद श्रेणी:औषधीय पौधे श्रेणी:स्वास्थ्य श्रेणी:हिन्दी विकि डीवीडी परियोजना