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रोशन कुमारी
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रोशन कुमारी फकीर मोहम्मद भारतीय शास्त्रीय नृत्यांगना, अभिनेत्री और कोरियोग्राफर हैं, जिन्हें भारतीय शास्त्रीय नृत्य कथक में सबसे अग्रणी माना जाता है।भारत के नृत्य प्रभात प्रकाशन 9788185827452 15 https://books.google.co.in/books?id=ABh11byJhXsC&pg=PA15&dq=%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B6%E0%A4%A8+%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80&hl=hi&sa=X&ved=0ahUKEwjuo-rOjNHgAhUQb30KHWpwDroQ6AEIPzAE#v=onepage&q=%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B6%E0%A4%A8%20%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80&f=false 23 फरवरी 2019 https://web.archive.org/web/20190223131724/https://books.google.co.in/books?id=ABh11byJhXsC&pg=PA15&dq=%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B6%E0%A4%A8+%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80&hl=hi&sa=X&ved=0ahUKEwjuo-rOjNHgAhUQb30KHWpwDroQ6AEIPzAE#v=onepage&q=%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B6%E0%A4%A8%20%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80&f=false 23 फ़रवरी 2019 live वह जयपुर घराने का अनुसरण करती है और कथक को बढ़ावा देने वाली अकादमी, नृत्या कला केंद्र, मुम्बई की संस्थापक है। 1975 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित, उन्हें 1984 में भारत सरकार की ओर से पद्म श्री मिला।
जीवनी
रोशन कुमारी का जन्म क्रिसमस की पूर्व संध्या (जन्म की थिति अनिश्चित है) पर उत्तर भारतीय राज्य हरियाणा के अंबाला में (तत्कालीन पंजाब) में चौधरी फकीर मोहम्मद, एक प्रसिद्ध तबला वादक और ज़ोहराबाई अम्बालेवाली, प्रसिद्ध शास्त्रीय और पार्श्व गायिका के यहाँ हुआ था। उन्होंने कथक की मूल बातें के. एस. मोरे से सीखीं और सुंदर प्रसाद के तहत मुम्बई के महाराज बिंदादीन स्कूल में अभ्यास जारी रखा। बाद में, उन्होंने गुलाम हुसैन खान और हनुमान प्रसाद से भी प्रशिक्षण लिया और गोविंदराज पिल्लई और महालिंगम पिल्लई से भरत नाट्यम सीखा।
कुमारी ने राष्ट्रपति भवन में एक विशेष प्रदर्शन सहित भारत में कई स्थानों पर प्रदर्शन किया है। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, निकिता ख़्रुश्चेव, मिल्टन ओबोटे, जॉर्डन के हुसैन और नेपाल के राजा जैसी हस्तियों के सामने भी प्रदर्शन किया है। 1971 में, उन्होंने मुम्बई के बांद्रा में नृत्य कला केंद्र की स्थापना की, जहाँ उन्होंने कई छात्रों को सिखाया। ,नंदिता पुरी, मुक्ता जोशी,अदिती भागवत, सहजप्रीत सिंह, निगार बानो उनका काम आगे बढा रहे हैं।
फिल्मी करियर
1953 में, बिमल रॉय ने कुमारी को अपनी फिल्म परिणीता में कथक करने के लिए आमंत्रित किया। अगले साल, उन्होंने नितिन बोस की वारिस और सोहराब मोदी द्वारा निर्देशित एक हिन्दी / उर्दू द्विभाषी, मिर्ज़ा गालिब (1954) में अभिनय किया। उनकी अगली उपस्थिति राजा नवाथे की 1956 की फिल्म बसंत बहार में थी। सत्यजीत रे, प्रसिद्ध भारतीय फिल्म निर्माता ने 1958 की फिल्म जलसाघर में उनके द्वारा प्रस्तुत नृत्य निर्देशन का इस्तेमाल किया। 1970 में, भारत सरकार के फिल्म्स डिवीजन ने कथक के इतिहास और अभ्यास पर एक वृत्त चित्र जारी किया, जिसमें दमयंती जोशी, उमा शर्मा, सुदर्शन धीर, और शंभु महाराज जैसे उल्लेखनीय कथक के अभ्यासकर्ता द्वारा प्रदर्शन किया गया। रोशन कुमारी ने बाद में गोपी (1970 फिल्म), लेकिन... (1990), और सरदारी बेगम (1996) जैसी हिन्दी फीचर फिल्मों में नृत्य कोरियोग्राफ किया।दिलीप कुमार: वजूद और पहचान 9789386799685 232 प्रथम संस्करण https://books.google.co.in/books?id=e3FKDwAAQBAJ&pg=PA232&dq=%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B6%E0%A4%A8+%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80&hl=hi&sa=X&ved=0ahUKEwjuo-rOjNHgAhUQb30KHWpwDroQ6AEIKTAA#v=onepage&q=%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B6%E0%A4%A8%20%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80&f=false 23 फरवरी 2019 https://web.archive.org/web/20190223184511/https://books.google.co.in/books?id=e3FKDwAAQBAJ&pg=PA232&dq=%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B6%E0%A4%A8+%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80&hl=hi&sa=X&ved=0ahUKEwjuo-rOjNHgAhUQb30KHWpwDroQ6AEIKTAA#v=onepage&q=%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B6%E0%A4%A8%20%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80&f=false 23 फ़रवरी 2019 live
सन्दर्भ
श्रेणी:पद्मश्री प्राप्तकर्ता
श्रेणी:अंबाला के लोग
श्रेणी:हरियाणा के लोग
श्रेणी:कथक
श्रेणी:संगीत नाटक अकादमी पुरस्कृत
श्रेणी:भारतीय फ़िल्म अभिनेत्री
श्रेणी:जीवित लोग