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लघु-ग्रह चंद्रमा
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लघु-ग्रह चंद्रमा (Minor-planet moon) या क्षुद्रग्रह चंद्रमा खगोल विज्ञान में एक ऐसा प्राकृतिक उपग्रह है जो किसी लघु-ग्रह - जैसे कि क्षुद्रग्रह, बौने ग्रह, या कुइपर बेल्ट ऑब्जेक्ट—की परिक्रमा करता है। यदि मुख्य पिंड और उसके चंद्रमा का आकार लगभग एक समान होता है, तो खगोलविद इसे उपग्रह कहने के बजाय एक द्विआधारी लघु-ग्रह या 'डबल एस्टेरॉयड' प्रणाली कहना अधिक पसंद करते हैं। वर्तमान में सौर मंडल में 400 से अधिक ऐसे लघु-ग्रह खोजे जा चुके हैं जिनके अपने चंद्रमा हैं।Richardson Derek C. Walsh Kevin J. Binary Minor Planets Annual Review of Earth and Planetary Sciences 34 2006 47-81 10.1146/annurev.earth.32.101802.120308"Asteroids with Satellites"
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खोज और ऐतिहासिक प्रतिमान-बदलाव
1990 के दशक की शुरुआत तक, अधिकांश खगोलविदों का मानना था कि क्षुद्रग्रहों का गुरुत्वाकर्षण इतना कम होता है कि वे किसी उपग्रह को अपनी कक्षा में बनाए नहीं रख सकते।"WGSBN Bulletin 4, #14"अगस्त 2026 InternetArchiveBot
यह धारणा 1993 में पूरी तरह से टूट गई, जब नासा का 'गैलीलियो' अंतरिक्ष यान बृहस्पति की ओर जाते समय क्षुद्रग्रह 243 इडा के पास से गुजरा। गैलीलियो द्वारा भेजी गई तस्वीरों में स्पष्ट रूप से देखा गया कि 31 किलोमीटर लंबे इस क्षुद्रग्रह की परिक्रमा 1.4 किलोमीटर व्यास वाला एक छोटा सा चंद्रमा कर रहा है। इस चंद्रमा को डैक्टाइल नाम दिया गया। इस युगांतरकारी खोज ने सिद्ध कर दिया कि छोटे खगोलीय पिंडों के भी अपने उपग्रह हो सकते हैं।"Asteroids/TNOs with Satellites list by type and presumed level of confirmation"
निर्माण प्रक्रियाएँ
लघु-ग्रहों के चंद्रमा कैसे बनते हैं, यह उनके आकार और सौर मंडल में उनकी स्थिति पर निर्भर करता है। खगोल भौतिकीविदों ने इसके तीन मुख्य सिद्धांत दिए हैं:
विशाल टकराव: कुइपर बेल्ट के बड़े पिंडों (जैसे प्लूटो, हौमिया) और मुख्य बेल्ट के विशाल क्षुद्रग्रहों के चंद्रमा आमतौर पर भयंकर अंतरिक्ष टकरावों के मलबे से बनते हैं। जब कोई अन्य पिंड इनसे टकराता है, तो बिखरा हुआ मलबा अंतरिक्ष में कक्षा में स्थापित होकर धीरे-धीरे चंद्रमा का रूप ले लेता है।
YORP प्रभाव: निकट-पृथ्वी क्षुद्रग्रहों और छोटे 'रबल-पाइल' क्षुद्रग्रहों के चंद्रमा मुख्य रूप से सूर्य के विकिरण के कारण बनते हैं। 'यार्कोव्स्की-ओ'कीफे-राडज़िएव्स्की-पैडैक' प्रभाव के कारण, सूर्य का प्रकाश क्षुद्रग्रह की घूर्णन गति को धीरे-धीरे इतना तेज़ कर देता है कि उसके भूमध्य रेखा से पत्थर और धूल अंतरिक्ष में छिटकने लगते हैं। यह सामग्री बाद में जुड़कर एक छोटा चंद्रमा बना लेती है।
गुरुत्वाकर्षण पकड़: कुछ दुर्लभ मामलों में, जब दो छोटे पिंड अंतरिक्ष में एक-दूसरे के बहुत करीब से गुज़रते हैं, तो उनकी कक्षीय ऊर्जा का क्षय हो जाता है और वे गुरुत्वाकर्षण द्वारा एक-दूसरे से बंध जाते हैं।
केवल एक चंद्रमा ही नहीं, बल्कि कई लघु-ग्रहों के दो या उससे अधिक चंद्रमा भी खोजे गए हैं:
87 सिल्विया: 2005 में, खगोलविदों ने पाया कि मुख्य बेल्ट के इस विशाल क्षुद्रग्रह के दो चंद्रमा हैं, जिन्हें रोमुलस और रेमस नाम दिया गया। यह सौर मंडल में खोजी गई पहली "त्रिआधारी" क्षुद्रग्रह प्रणाली थी।
प्लूटो और चारोन: यद्यपि प्लूटो एक बौना ग्रह है, लेकिन इसका चंद्रमा 'चारोन' इसके आकार के अनुपात में इतना बड़ा है (प्लूटो के व्यास का आधा) कि इन दोनों का द्रव्यमान केंद्र प्लूटो के बाहर अंतरिक्ष में स्थित है। इसलिए इसे एक वास्तविक 'द्विआधारी प्रणाली' माना जाता है।Stern S. Alan Mittom Jacqueline Pluto and Charon: Ice Worlds on the Ragged Edge of the Solar System John Wiley & Sons 2005 978-3527405565 45-50"Multiple Asteroid Systems: New Techniques to Study New Worlds" (PDF). Lunar and Planetary Institute. Retrieved 20 October 2009.
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
नासा (NASA) - क्षुद्रग्रह और लघु-ग्रह अन्वेषण
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श्रेणी:खगोल विज्ञान