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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

इन्द्र विद्यावाचस्पति

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इन्द्र विद्यावाचस्पति 1889 11 8 y 1960 8 24 1889 11 8 y सांसद, राज्य सभा उत्तर प्रदेश 1952 1958 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस चन्द्रावती thumb|Indra vidyavachaspathi|इन्द्र विद्यावाचस्पति द्वारा रचित कुछ पुस्तकें इन्द्र विद्यावाचस्पति (1889-1960), कुशल पत्रकार, गंभीर विचारक, एवं इतिहासवेत्ता थे। वे स्वामी श्रद्धानन्द के पुत्र थे। सन १९५२ से १९५८ तक वे राज्यसभा के सदस्य भी रहे।http://rajyasabha.nic.in/rsnew/pre_member/1952_2003/i.pdf RAJYA SABHA MEMBERS BIOGRAPHICAL SKETCHES 1952 - 2003 Rajya Sabha 5 April 2018 https://web.archive.org/web/20190328032243/https://rajyasabha.nic.in/rsnew/pre_member/1952_2003/i.pdf 28 मार्च 2019 deadIndia. Parliament. Rajya Sabha Rajya Sabha Members: Biographical Sketches, 1952-2003 https://books.google.com/books?id=VtpFJucR0foC 28 March 2019 2003 Rajya Sabha Secretariat 137Sir Stanley Reed The Times of India Directory and Year Book Including Who's who https://books.google.com/books?id=U5AjAQAAMAAJ 28 March 2019 1957 Times of India Press 982India. Parliament. Rajya Sabha Who's who https://books.google.com/books?id=d9JFAQAAIAAJ 28 March 2019 1955 Rajya Sabha Secretariat 79 जीवनी इन्द्र विद्यावाचस्पति का जन्म ९ नवम्बर सन् १८८९ को पंजाब के जालन्धर जिले के नवां शहर में हुआ था। उनकी शिक्षा-दीक्षा गुरुकुल कांगड़ी में हुई। अध्ययन के समय ही उन्हें सद्धर्म प्रचारक के सम्पादन का मौका मिला। यहीं से उनकी प्रवृति पत्रकारिता की ओर गयी। अपने जीवनकाल में उन्होने विजय, वीर अर्जुन तथा जनसत्ता का सम्पादन किया। 'विजय' दिल्ली से प्रकाशित होने वाला पहला हिन्दी समाचार पत्र था। इनका देहावसान २३ अगस्त सन् १९६० को दिल्ली में हुआ। इन्द्र जी ने शिक्षा तथा साहित्य सृजन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। शिक्षा के क्षेत्र में उनका सबसे महत्वपूर्ण योगदान गुरुकुल कांगड़ी का संचालन एवं मार्गदर्शन है। इस विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के रूप में कार्य करते हुए उन्होने गुरुकुल की उपाधियों को केन्द्र एवं राज्य सरकारों से मान्यता प्रदान कराने का स्तुत्य एवं सफल कार्य किया। गुरुकुल में हिन्दी माध्यम से तकनीकी विषयों की शिक्षण की व्यवस्था करके इन्होंने हिन्दी की अमूल्य सेवा की। कृतियाँ ये इतिहास के गम्भीर अध्येता थे। अत: इनकी इतिहास-विषयक रचनाएं अत्यन्त प्रामाणिक एवं उच्च श्रेणी की मानी गयीं हैं। 'भारत में ब्रिटिश साम्राज्य का उदय और अन्त', 'मुगल साम्राज्य का क्षय और उसके कारण', 'मराठों का इतिहास' उनकी सर्वप्रसिद्ध रचनाएँ हैं। धार्मिक एवं सांस्कृतिक क्रितियों में 'आर्यसमाज का इतिहास', 'उपनिषदों की भूमिका' तथा 'संस्कृत्ति का प्रवाह' उल्लेखनीय हैं। 'शाह आलम की आँखें' प्रतिनिधि ऐतिहासिक उपन्यास है तो 'नैपोलियन बोनापार्ट की जीवनी', 'महर्षि दयानन्द का जीवन-चरित' उल्लेखनीय जीवन-ग्रन्थ हैं। इन्द्र जी का भाषा पर पूरा अधिकार था। इनकी शैली में सहज प्रवाह है। वस्तुस्थिति का मार्मिक चित्रण करने की अद्भुत क्षमता है। इनकी कृतियाँ हिन्दी का गौरव हैं। सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ प्रो इन्द्र का व्यक्तित्व एवं कृतित्व हिन्दी साहित्य का इतिहास (गूगल पुस्तक ; लेखक - श्यामसुन्दर कपूर) श्रेणी:आर्य समाज श्रेणी:हिन्दी साहित्यकार श्रेणी:हिन्दी सेवी श्रेणी:इतिहासकार श्रेणी:भारतीय पत्रकार श्रेणी:जालंधर के लोग