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शनिवार वाड़ा
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शनिवार वाड़ा Front view of Shaniwar Wada illuminated.jpg तिरंगे के रंगों में प्रकाशित शनिवार वाड़ा IND पुणे, महाराष्ट्र, भारत 1732 01 22 y मराठा वास्तुकला *मराठा साम्राज्य (1732–1818)
Flag of the British East India Company (1801).svg ईस्ट इंडिया कंपनी (1818–1858)
ब्रिटिश भारत ब्रिटिश भारत (1858–1947)
India भारत अधिराज्य (1947–1950)
India भारत गणराज्य (1950–वर्तमान) शनिवार वाडा mr
शनिवार वाड़ा (mr शनिवार वाडा) भारत के महाराष्ट्र राज्य के पुणे शहर में स्थित एक दुर्ग है, जिनका निर्माण 1732 में किया गया था।History, Religion and Culture of India Gajrani S. 2004 978-81-8205-062-4 III 255 1818 तक यह मराठा पेशवाओं की गद्दी थी। दुर्ग ज़्यादातर एक अस्पष्ट आग से 1828 में नष्ट हो गया था, लेकिन जीवित संरचनाएँ अब एक पर्यटक स्थल के रूप में बनाए रखे है।
इतिहास
शनिवारवाड़ा किला राजस्थान के एक ठेकेदार द्वारा बनाया गया था जिसे 'कुमावत क्षत्रिय' के नाम से जाना जाता था। ऐसा कहा जाता है कि इसे कई प्रसिद्ध कारीगरों द्वारा डिजाइन और निर्मित किया गया है, जिनमें शिवराम कृष्ण कुमावत , देवजी कुमावत, कोंडाजी सुतार, मोरारजी पत्थरवत(कुमावत), भोजराजा (जयपुर के एक जड़ाउ-कार्य विशेषज्ञ) और राघो कुमावत (एक चित्रकार) शामिल हैं। किले का निर्माण पूरा करने के बाद पेशवा ने इन लोगों को 'नाइक' की उपाधि दीhttps://books.google.com/books?id=dnn2AwAAQBAJ&newbks=0&hl=en Haunted India Sinha Chandan 2014-07-07 Chandan Kumar Sinha 24 en Gajrani S. History, Religion and Culture of India III 2004 255 978-81-8205-062-4
मराठा साम्राज्य में पेशवा बाजीराव जो कि छत्रपति शाहु के प्रधान (पेशवा) थे। इन्होंने ने ही शनिवार वाड़ा का निर्माण करवाया था। शनिवार वाड़ा का मराठी में मतलब शनिवार (शनिवार/Saturday) तथा वाड़ा का मतलब टीक होता है।
शनिवार वाडा की नींव का काम १० जनवरी १७३० को शुरू हुआ। २२ जनवारी १७३२ को शनिवार वाड़ा की नींव करके वास्तु शांति की गई। १७३२ के बाद भी बाड़े में हमेशा नया बांधकाम, बदल होते गए। बुरुज के दरवाजे का काम होते-होते १७६० ये वर्ष आया। १८०८, १८१२, १८१३ इन वर्षों में छोटी बड़ी आग लगने की दुर्घटना हुई तो १७ नवंबर १८१७ को बाडे पर ब्रिटिशों के निशान लगे। इसके बाद यहाँ कुछ समय तक पुणे के पहले कलेक्टर हेन्री डंडास रॉबर्टसन रहते थे। बाडे में तुरुंग, पंगुगृह, पुलिस का निवासस्थान थे। १८२८ में बाड़े में बड़ी आग लगी और आग में अंदाजे सर्व इमारतॆ जल गई। आगे लगभग ९० साल बाद बाडे की दुरवस्था खत्म होने का योग आया। १९१९ में बाडा संरक्षित स्मारक घोषित किया गया और बाडे का उत्खनन करने का काम शुरू किया गया। उस समय बाडे में कोर्ट के लिए उपयोग में लाई जाने वाली इमारत १९२३ के पहले उत्खनन के लिए गिरा दी गई। शनिवार बाडे संबंधी अनेक घटना, दुर्घटना है। बाडेतील पेशवे के कार्यालय में अनेक वीर और मातब्बर राजकारण के दाव पेच रंगते थे। पेशवे का दरबार यही पर था। पेशवे के घर के लडके लडकियों का विवाह इसी बाडे में होता था। शनिवारबाडे के आगे के प्रांगण में सैनिको की सभा होने लगी। आचार्य अत्रे ने संयुक्त महाराष्ट्र का आंदोलन इसी प्रांगण सेे लढा़। बाडे के प्रांगण में मारुती का सभामंडप था। हे मंदिर लॉइड्ज पूल (हल्लीचा नवा पूल किंवा शिवाजी पूल) बांधने वाले केंजले ने बांधा. मंदिर में १९ मार्च १९२४ को मारुती की मूर्ती बिहार गई।
गैलरी
सन्दर्भ
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श्रेणी:महाराष्ट्र में महल
श्रेणी:भारत में शाही निवास