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बारह छोटे पैगंबर

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बारह छोटे पैगंबर यहूदी धर्म, ईसाई धर्म इब्रानी, कुछ हिस्से अरामी में 8वीं शताब्दी ईसा पूर्व से 4थी शताब्दी ईसा पूर्व बारह छोटे पैगंबर (Twelve Minor Prophets), जिन्हें अरामी भाषा में ट्रे असार (Trei Asar - "बारह") भी कहा जाता है, इब्रानी बाइबिल (तनाख) और ईसाई पुराने नियम (Old Testament) में पैगंबरीय पुस्तकों का एक महत्वपूर्ण संग्रह है। इन ग्रंथों के लेखकों को "छोटा" इसलिए कहा जाता है क्योंकि इनके ग्रंथ यशायाह, यिर्मयाह, और यहेजकेल जैसे 'बड़े पैगंबरों' की तुलना में बहुत छोटे हैं, न कि इसलिए कि उनका धार्मिक या ऐतिहासिक महत्व कम है।Sweeney Marvin A. The Twelve Prophets, Vol. 1: Hosea, Joel, Amos, Obadiah, Jonah Liturgical Press 2000 978-0814650912 15-22 ऐतिहासिक कालखंड बारह पैगंबरों की पुस्तकें लगभग 400 वर्षों के लंबे इतिहास को कवर करती हैं। विद्वान आमतौर पर इन पुस्तकों को उनके ऐतिहासिक संदर्भ के आधार पर तीन मुख्य युगों में विभाजित करते हैं: असीरियन काल (8वीं शताब्दी ईसा पूर्व): इस युग के पैगंबरों में होशे, आमोस, मीका, और योना शामिल हैं। उन्होंने मुख्य रूप से उत्तरी राज्य इज़राइल और दक्षिणी राज्य यहूदा को चेतावनी दी कि यदि उन्होंने सामाजिक अन्याय और मूर्तिपूजा को नहीं छोड़ा, तो असीरियन साम्राज्य के हाथों उनका विनाश निश्चित है। बेबीलोनियन काल (7वीं-6ठी शताब्दी ईसा पूर्व): इस काल में नहूम, हबक्कूक, और सपन्याह आते हैं। इन्होनें असीरिया के पतन, बेबीलोन के उदय, और अंततः यरूशलेम के विनाश (586 ईसा पूर्व) और 'बेबीलोनियन निर्वासन' की भविष्यवाणी की। फारसी काल / निर्वासन के बाद (6ठी-4थी शताब्दी ईसा पूर्व): हाग्गै, जकर्याह, और मलाकी ने तब भविष्यवाणी की जब यहूदी बेबीलोन से यरूशलेम लौट आए थे। उनका मुख्य ध्यान यरूशलेम के दूसरे मंदिर के पुनर्निर्माण और यहूदी धार्मिक जीवन की पुनर्स्थापना पर था।Redditt Paul L. An Introduction to the Prophets https://archive.org/details/introductiontopr0000redd Wm. B. Eerdmans Publishing 2008 978-0802828965 205-212 नोट: योएल और ओबद्याह की सटीक तिथियों पर विद्वानों में मतभेद है, हालांकि अक्सर उन्हें बाद के काल में रखा जाता है। यद्यपि प्रत्येक पुस्तक का अपना अलग संदर्भ है, लेकिन पूरे 'ट्रे असार' में कुछ केंद्रीय धार्मिक विषय गूंजते हैं: प्रभु का दिन: यह एक ऐसा निर्णायक समय है जब ईश्वर दुनिया में पापियों का न्याय करने और धर्मियों को बचाने के लिए सीधे हस्तक्षेप करेंगे। सामाजिक न्याय: आमोस और मीका जैसे पैगंबरों ने गरीबों के शोषण, भ्रष्ट अदालतों और खोखले धार्मिक अनुष्ठानों की कड़ी निंदा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामाजिक न्याय के बिना धार्मिक अनुष्ठान ईश्वर को स्वीकार्य नहीं हैं। वाचा और वफादारी: होशे ने ईश्वर और इज़राइल के बीच के रिश्ते को एक विवाह के रूप में चित्रित किया, जहाँ इज़राइल की मूर्तिपूजा को आध्यात्मिक 'व्यभिचार' माना गया। ईश्वर अपने लोगों से 'वाचा' के प्रति वफादारी की मांग करते हैं।Coggins Richard Han Jin H. Six Minor Prophets Through the Centuries: Nahum, Habakkuk, Zephaniah, Haggai, Zechariah, and Malachi https://archive.org/details/sixminorprophets0000cogg John Wiley & Sons 2011 978-1444342734 10-18 यहूदी और ईसाई परंपरा में संरचना यहूदी धर्म: इब्रानी बाइबिल (तनाख) में, इन बारह छोटी पुस्तकों को एक ही पुस्तक, ट्रे असार के रूप में गिना जाता है। प्राचीन काल में, अलग-अलग रखे जाने पर छोटे चर्मपत्रों के खो जाने का डर रहता था, इसलिए उन्हें एक ही बड़े चर्मपत्र में संकलित कर दिया गया था। ईसाई धर्म: ईसाई पुराने नियम में, इन बारह ग्रंथों को अलग-अलग पुस्तकों के रूप में गिना जाता है, और ये आमतौर पर पुराने नियम के अंतिम भाग का निर्माण करते हैं, जो नए नियम के लिए एक पुल का काम करते हैं।"How Prophecy Gets Written: Hosea, Redactors and Neo-Assyrian Prophecy"The Oxford Handbook of the Minor Prophets सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ बाइबिल गेटवे (Bible Gateway) - ऑनलाइन बाइबिल ग्रंथ श्रेणी:यहूदी धर्म श्रेणी:ईसाई धर्म श्रेणी:प्राचीन इस्राइल