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ब्रह्मांड की बहु-विश्व व्याख्या
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क्वांटम यांत्रिकी की बहु-विश्व व्याख्या (Many-Worlds Interpretation of Quantum Mechanics)
क्वांटम यांत्रिकी की बहु-विश्व व्याख्या (Many-Worlds Interpretation), जिसे अक्सर '''MWI''' कहा जाता है, एक प्रमुख व्याख्या है जो [[क्वांटम यांत्रिकी]] के कुछ विरोधाभासों को हल करने का प्रयास करती है। यह व्याख्या बताती है कि जब भी कोई [[क्वांटम मापन]] (quantum measurement) होता है, तो ब्रह्मांड कई समानांतर ब्रह्मांडों में विभाजित हो जाता है। प्रत्येक नए ब्रह्मांड में, मापन का एक अलग संभावित परिणाम साकार होता है। इसका मतलब है कि हमारे ब्रह्मांड में जो कुछ भी हो रहा है, उसके हर संभावित परिणाम के लिए एक नया, अलग ब्रह्मांड मौजूद है।
यह व्याख्या [[क्वांटम सुपरपोज़िशन]] (quantum superposition) की अवधारणा पर आधारित है। सुपरपोज़िशन के अनुसार, एक क्वांटम प्रणाली एक साथ कई अवस्थाओं में मौजूद हो सकती है। MWI का दावा है कि ये सभी अवस्थाएँ वास्तविक हैं और अलग-अलग ब्रह्मांडों में रहती हैं।
मुख्य अवधारणाएँ
क्वांटम सुपरपोज़िशन
'''क्वांटम सुपरपोज़िशन''' वह सिद्धांत है जहाँ एक कण एक ही समय में कई संभावित स्थानों या अवस्थाओं में मौजूद हो सकता है। जब हम उस कण का अवलोकन या माप करते हैं, तो सुपरपोज़िशन टूट जाता है और कण केवल एक अवस्था में पाया जाता है। MWI के अनुसार, कण वास्तव में एक ही अवस्था में नहीं आता है। इसके बजाय, जिस समय माप होता है, ब्रह्मांड विभाजित हो जाता है ताकि हर संभावित परिणाम एक अलग, स्वतंत्र ब्रह्मांड में मौजूद हो।
डिकॉहेरेंस
'''डिकॉहेरेंस''' वह प्रक्रिया है जहाँ एक क्वांटम प्रणाली अपने पर्यावरण के साथ क्रिया करती है, जिससे उसकी सुपरपोज़िशन अवस्था टूट जाती है। MWI में, डिकॉहेरेंस को ब्रह्मांड के विभाजन का कारण माना जाता है। जब एक प्रणाली पर्यावरण से जुड़ती है, तो वे एक संयुक्त सुपरपोज़िशन अवस्था में आ जाते हैं, जिससे ब्रह्मांड कई "शाखाओं" में बंट जाता है।
श्रोडिंगर की बिल्ली का विचार प्रयोग
इस व्याख्या को अक्सर '''श्रोडिंगर की बिल्ली''' (Schrödinger's Cat) के विचार प्रयोग से समझा जाता है।
प्रयोग: एक बिल्ली को एक बंद बक्से में रखा जाता है जिसमें एक रेडियोधर्मी [[परमाणु]] और एक ज़हर की शीशी होती है। परमाणु के क्षय (decay) होने की 50% संभावना है। यदि परमाणु का क्षय होता है, तो ज़हर निकलता है और बिल्ली मर जाती है। यदि नहीं होता, तो बिल्ली जीवित रहती है।
क्वांटम यांत्रिकी के अनुसार: जब तक बक्सा खोला नहीं जाता, बिल्ली '''जीवित और मृत दोनों की सुपरपोज़िशन''' में होती है।
MWI के अनुसार: जब कोई बक्सा खोलता है, तो ब्रह्मांड विभाजित हो जाता है: एक ब्रह्मांड में, बिल्ली जीवित होती है और आप उसे जीवित देखते हैं, जबकि दूसरे ब्रह्मांड में, बिल्ली मृत होती है और आप उसे मृत देखते हैं। दोनों परिणाम वास्तविक हैं और दोनों ब्रह्मांड समानांतर रूप से मौजूद हैं।
इतिहास और समर्थक
MWI को पहली बार 1957 में ह्यूग एवरेट III (Hugh Everett III) ने अपनी पीएचडी थीसिस में प्रस्तावित किया था। इस व्याख्या को बाद में ब्रायस डीविट (Bryce DeWitt) जैसे भौतिकविदों ने लोकप्रिय बनाया। हालांकि यह अभी भी एक बहस का विषय है, यह क्वांटम यांत्रिकी की एक बहुत ही प्रभावशाली और आकर्षक व्याख्या है।