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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

नीलकण्ठ महादेव मन्दिर, कालिंजर

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नीलकंठ महादेव मन्दिर Nilkanth Temple.jpg दुर्ग का नीलकंठ मन्दिर, जहाँ स्थापित शिवलिंग का अभिषेक निरंतर प्राकृतिक तरीके से होता रहता है। नाग वंश चौथी शताब्दी नीलकंठ महादेव नागर शैली कालिंजर दुर्ग, कालिंजर, बांदा जिला, उत्तर प्रदेश 24.9997 80.4852 type:landmark inline कालिंजर दुर्ग के पश्चिमी भाग में यहां के अधिष्ठाता देवता नीलकंठ महादेव का एक प्राचीन मंदिर भी स्थापित है। इस मंदिर को जाने के लिए दो द्वारों से होकर जाते हैं। रास्ते में अनेक गुफाएँ तथा चट्टानों को काट कर बनाई शिल्पाकृतियाँ बनायी गई हैं। वास्तुशिल्प की दृष्टि से यह मंडप चंदेल शासकों की अनोखी कृति है। मंदिर के प्रवेशद्वार पर परिमाद्र देव नामक चंदेल शासक रचित शिवस्तुति है व अंदर एक स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है। मन्दिर के ऊपर ही जल का एक प्राकृतिक स्रोत है, जो कभी सूखता नहीं है। इस स्रोत से शिवलिंग का अभिषेक निरंतर प्राकृतिक तरीके से होता रहता है। बुन्देलखण्ड का यह क्षेत्र अपने सूखे के कारण भी जाना जाता है, किन्तु कितना भी सूखा पड़े, यह स्रोत कभी नहीं सूखता है। http://www.patrika.com/news/jabalpur/amazing-hill-with-the-historical-and-religious-fort-of-kalinjar-1482132/ सदियों से रिस रहा है इस पहाड़ से पानी, अंकगणित के हिसाब से सजे हैं मंदिर 2017-01-07 पत्रिका https://web.archive.org/web/20170227064206/http://www.patrika.com/news/jabalpur/amazing-hill-with-the-historical-and-religious-fort-of-kalinjar-1482132/ 27 फ़रवरी 2017 6 मार्च 2017 live गुप्ता पर्मिला भारत के विश्वप्रसिद्ध धरोहर स्थल https://books.google.co.in/books?id=YWCcDAAAQBAJ&pg=PA52&lpg=PA52&dq=%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%B0+%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE&source=bl&ots=BaxvKgkcPj&sig=WgO7JZG7TOa-BLmIuu6V4Wp5TTM&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwjXv_7n3q_SAhUHkZQKHfwdDnc4FBDoAQgqMAI#v=onepage&q=%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%B0%20%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE&f=false प्रभात प्रकाशन चण्डीगढ़ 938434351X, 9789384343514 ५१-५२ 6 मार्च 2017 https://web.archive.org/web/20170227232230/https://books.google.co.in/books?id=YWCcDAAAQBAJ&pg=PA52&lpg=PA52&dq=%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%B0+%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE&source=bl&ots=BaxvKgkcPj&sig=WgO7JZG7TOa-BLmIuu6V4Wp5TTM&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwjXv_7n3q_SAhUHkZQKHfwdDnc4FBDoAQgqMAI#v=onepage&q=%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%B0%20%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE&f=false 27 फ़रवरी 2017 live> कालिंजर दुर्ग में २४९ ई. में हैहय वंशी कृष्णराज का शासन था, एवं चतुर्थ शताब्दी में नागों का अधिकार हुआ, जिन्होंने यहाँ नीलकंठ महादेव का मन्दिर बनवाया। http://www.jagranyatra.com/2010/04/kalinjar-uttar-pradesh-cultural-place-historica/ कालजयी कालिन्जर दैनिक जागरण- यात्रा https://web.archive.org/web/20170227231721/http://www.jagranyatra.com/2010/04/kalinjar-uttar-pradesh-cultural-place-historica/ 27 फ़रवरी 2017 9 मार्च 2017 dead चन्देल शासकों के समय से ही यहां की पूजा अर्चना में लीन चन्देल राजपूत जो यहां पण्डित का कार्य भी करते हैं, वे बताते हैं कि शिवलिंग पर उकेरे गये भगवान शिव की मूर्ति के कंठ का क्षेत्र स्पर्श करने पर सदा ही मुलायम प्रतीत होता है। यह भागवत पुराण के सागर मंथन के फलस्वरूप निकले हलाहल विष को पीकर, अपने कंठ में रोके रखने वाली कथा के समर्थन में साक्ष्य ही है। मान्यता है कि यहां शिवलिंग से पसीना भी निकलता रहता है। http://hindutva.info/dharti-par-aaj-bhi-majud-hai-shiv-ke/ धरती पर आज भी मौजूद है शिव के कालिंजर स्वरुप के प्रमाण !! 2017-02-04 हिन्दुत्व.इन्फ़ो 2017-02-27 https://web.archive.org/web/20170227234755/http://hindutva.info/dharti-par-aaj-bhi-majud-hai-shiv-ke/ 27 फ़रवरी 2017 dead अबूझ पहेली मंदिर के ठीक पीछे की तरफ पहाड़ काटकर पानी का कुंड बनाया गया है। माना जाता है कि इस प्राचीनतम किले में मौजूद खजाने का रहस्य भी इसी प्रतिलिपि में है, लेकिन आज तक कोई इसका पता नहीं लगा सका है। इस मंदिर के ऊपर पहाड़ है, जहां से पानी रिसता रहता है। बुंदेलखंड सूखे के कारण जाना जाता है, लेकिन कितना भी सूखा पड़ जाए, इस पहाड़ से पानी रिसना बंद नहीं होता है। कहा जाता है कि सैकड़ों साल से पहाड़ से ऐसे पानी निकल रहा है, ये सभी इतिहासकारों के लिए अबूझ पहेली की तरह है। निकटस्थ ऊपरी भाग स्थित जलस्रोत हेतु चट्टानों को काटकर दो कुंड बनाए गए हैं जिन्हें स्वर्गारोहण कुंड कहा जाता है। इसी के नीचे के भाग में चट्टानों को तराशकर बनायी गई काल-भैरव की एक प्रतिमा भी है। इनके अलावा परिसर में सैकड़ों मूर्तियाँ चट्टानों पर उत्कीर्ण की गई हैं। http://www.abhivyakti-hindi.org/paryatan/2010/kalinjar.htm दुर्ग कलिंजर का खरे ज्योति 2010-06-14 अभिव्यक्ति-हिन्दी https://web.archive.org/web/20170202085717/http://www.abhivyakti-hindi.org/paryatan/2010/kalinjar.htm 2 फ़रवरी 2017 6 मार्च 2017 dead शिवलिंग के समीप ही भगवती पार्वती एवं भैरव की मूर्तियाँ भी स्थापित हैं। प्रवेशद्वार के दोनों ही ओर ढेरों देवी-देवताओं की मूर्तियां दीवारों पर तराशी गयी हैं। कई टूटे स्तंभों के परस्पर आयताकार स्थित स्तंभों के अवशेष भी यहां देखने को मिलते हैं। इतिहासकारों के अनुसार कि इन पर छः मंजिला मन्दिर का निर्माण किया गया था। इसके अलावा भी यहाँ ढेरों पाषाण शिल्प के नमूने हैं, जो कालक्षय के कारण जीर्णावस्था में हैं। File:Panoramic_view_of_Kalinjar_Neelkanth_Temple.jpg 330 दुर्ग स्थित नीलकण्ठ मन्दिर नीलकण्ठ मन्दिर सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ श्रेणी:कालिंजर श्रेणी:उत्तर प्रदेश के हिन्दू तीर्थ श्रेणी:नीलकंठ श्रेणी:शिव मंदिर श्रेणी:गुप्त राजवंश