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स्वयं प्रकाश

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स्वयं प्रकाश Swayam Prakash.jpg 250px स्वयं प्रकाश 20 जनवरी, 1947 इंदौर, मध्य प्रदेश 7 दिसंबर,2019 मुंबई, महाराष्ट्र हिन्दी कहानीकार भारतीय हिन्दी आधुनिक काल (साठोत्तरी) कहानी, उपन्यास, निबन्ध, नाटक, अनुवाद कथा साहित्य, वैचारिकी जनवादी लेखन लेखन एवं सम्पादन स्वयं प्रकाश ( जन्म-1947 निधन-२०१९) एक हिन्दी साहित्यकार रहे हैं । वे मुख्यतः हिन्दी कहानीकार के रूप में विख्यात हैं। कहानी के अतिरिक्त उन्होंने उपन्यास तथा अन्य विधाओं को भी अपनी लेखनी से समृद्ध किया । वे हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में साठोत्तरी पीढ़ी के बाद के जनवादी लेखन से सम्बद्ध रहे। उत्कृष्ट साहित्य-सृजन के लिए उन्हें बाल साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित अनेक सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है! जीवन-परिचय स्वयं प्रकाश का जन्म २० जनवरी सन् १९४७ को मध्य प्रदेश के इंदौर में हुआ था।संवेद, अप्रैल 2017, संपादक- किशन कालजयी, पृष्ठ-80. उनका पैतृक घर अजमेर (राजस्थान) में था।चौपाल (पत्रिका), जनवरी-जून 2017, संपादक- कामेश्वर प्रसाद सिंह, पृष्ठ-100. इंदौर में उनका ननिहाल था। उनके नाना स्वतंत्रता-सेनानी थे।कमला प्रसाद, सम्बोधन, जनवरी-मार्च 2007, सौजन्य संपादक- ए॰ हुसैन, सलाहकार संपादक- क़मर मेवाड़ी, पृष्ठ-12. सन् १९६२ में उन्होंने हायर सेकेंडरी की परीक्षा उत्तीर्ण की तथा १९६६ में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा प्राप्त की। जीविकोपार्जन के लिए सन् १९६७ में उन्होंने भारतीय नौसेना में प्रवेश लिया और सन् १९६८ से १९६९ तक जयंती शिपिंग कंपनी, ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग कंपनी आदि में शोर फिटर के रूप में कार्य किया। सन् १९७० में भारतीय डाक-तार विभाग में रिपीटर स्टेशन असिस्टेंट के पद पर कार्य आरंभ किया और लंबे समय तक यह कार्य करते रहे। सन् १९८३ में हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड में राजभाषा अधिकारी के रूप में उन्होंने कार्य आरंभ किया तथा सन् २००२ में वहाँ से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली।संवेद, अप्रैल 2017, संपादक- किशन कालजयी, पृष्ठ-82. नौकरी करते हुए ही सन् १९७४ में उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से बी.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली थी तथा सन् १९८० में राजस्थान विश्वविद्यालय से हिन्दी विषय में एम॰ए॰ की परीक्षा उत्तीर्ण करके सन् १९८२ में मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर से पीएच॰डी॰ की उपाधि भी प्राप्त कर ली थी। स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद सन २००४ में भावी निवास के लिए वे भोपाल आ गये और इसके बाद जीवन पर्यंत वहीं रहे। ८ दिसंबर सन् २०१९ को कर्कट रोग के कारण उनका देहांत हो गया। लेखन-कार्य स्वयं प्रकाश साहित्यिक लेखन के आरंभिक दौर में कविताएँ लिखते थे और मंचों पर सस्वर काव्य-पाठ भी करते थे। उनके पिता अजमेर में रहते थे। वहीं प्रसिद्ध कथाकार रमेश उपाध्याय की संगति में उन्होंने कहानी लिखना प्रारंभ किया। सन् १९६९ में उन्होंने पहली कहानी लिखी।पल्लव, संवेद (अप्रैल 2017), संपादक- किशन कालजयी, पृष्ठ-5 एवं 9. स्वयं प्रकाश के प्रिय साहित्यकारों में चेखव, राजेन्द्र सिंह बेदी, मार्क ट्वेन, जॉर्ज बर्नार्ड शॉ, ब्रेख़्त, नाजिम हिकमत एवं जैक लंडन के नाम शामिल हैं।स्वयं प्रकाश, सम्बोधन, जनवरी-मार्च 2007, सौजन्य संपादक- ए॰ हुसैन, सलाहकार संपादक- क़मर मेवाड़ी, पृष्ठ-38. अपने लेखन के मुख्य दौर में स्वयं प्रकाश काशीनाथ सिंह, असग़र वजाहत, संजीव, पंकज बिष्ट, उदय प्रकाश, अरुण प्रकाश जैसे कथाकारों के साथ जनवादी विचारधारा से सम्बद्ध रहे। इस दौर के साथ-साथ स्वयं प्रकाश के लेखन के सम्बन्ध में पल्लव का मानना है : "कहानी मानो सजीव हो उठी और पात्र अपने गाँव-देहात की भाषा-बोली में अपने दुःख-दर्द साझा करने लगे। स्वयं प्रकाश इस दौर में मध्यवर्ग की शक्ति और संभावनाओं को देख रहे थे और उसे बखूबी अभिव्यक्त कर रहे थे। इस वर्ग की कमियों-कमजोरियों और छद्म को उघाड़ना उन्हें आता था लेकिन इस वर्ग से उनकी उम्मीद समाप्त नहीं हो गयी थी। उनकी कहानियाँ 'तीसरी चिट्ठी' या 'बाबूजी का अंतिम भाषण' भारत के विशाल मध्यवर्ग के प्रति आशा का उजास ही तो हैं।"पल्लव, संवेद (अप्रैल 2017), संपादक- किशन कालजयी, पृष्ठ-5-6. राजस्थान में रहते हुए स्वयं प्रकाश ने भीनमाल से अपने मित्र मोहन श्रोत्रिय के साथ लघु पत्रिका 'क्यों' का संपादन-प्रकाशन किया तथा 'फीनिक्स', 'चौबोली' और 'सबका दुश्मन' जैसे नाटक भी लिखे। उनका प्रसिद्ध उपन्यास 'बीच में विनय' भीनमाल के परिवेश पर ही लिखा गया है। इस उपन्यास की पृष्ठभूमि के संदर्भ में स्वयं प्रकाश का कहना है : "यह उपन्यास सिर्फ यह बताने की कोशिश है कि जब भारत में साम्यवादी आंदोलन के पचास वर्ष पूरे होने में अधिक समय नहीं था, एक कस्बे में कम्युनिस्ट किस तरह आचरण कर रहे थे और किन कठिनाइयों से किस तरह जूझ रहे थे। संभव है इस तरह हम अपने अंतर्विरोधों को अधिक साफ तरीके से देख पाएँ और भविष्य में अपना आंदोलन ठीक से चलाने के लिए कुछ ज़रा-सी मदद पाएँ।"स्वयं प्रकाश, बीच में विनय, राजकमल प्रकाशन, नयी दिल्ली, संस्करण-2002, पृष्ठ-8. इससे पहले वे अपने सैन्य जीवन के अनुभवों पर एक उपन्यास 'जलते जहाज पर' लिख चुके थे। इधर के वर्षों में उनकी रचनाशीलता में परिवर्तन हुए और उन्होंने बदल रहे भारतीय समाज को अपने लेखन में देखने-समझने की रचनात्मक कोशिश की। उनका उपन्यास 'ईंधन' भूमंडलीकरण की वृहद् परिघटना का भारतीय समाज पर पड़ रहे प्रभावों का अध्ययन करने वालाकमला प्रसाद, सम्बोधन, जनवरी-मार्च 2007, सौजन्य संपादक- ए॰ हुसैन, सलाहकार संपादक- क़मर मेवाड़ी, पृष्ठ-18-19. पहला हिन्दी उपन्यास है।पल्लव, संवेद (अप्रैल 2017), संपादक- किशन कालजयी, पृष्ठ-6. अपनी नौकरी के दौरान वे कुछ वर्षों तक चित्तौड़गढ़ में रहे थे। तब वे हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड में अधिकारी थे। एक तरफ देश भर में निजीकरण और उदारीकरण का शोर था, वहीं खुद उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के अपने उपक्रम हिंदुस्तान ज़िंक लिमिटेड का निजीकरण देखा। पल्लव की मान्यता है कि 'जो बचा रहा' का चित्तौड़गढ़ अध्याय इस निजीकरण की घटना का हिन्दी साहित्य में किया गया पहला और एकमात्र अंकन है। अपने लेखन की प्रासंगिकता के संदर्भ में समकालीन दौर के भारतीय ग्राम-समाज की पूर्ववर्ती दौर से भिन्नता के अंकन को लेकर इन दौरों में लिखने वाले साहित्यकारों के सम्बन्ध में स्वयं प्रकाश की मान्यता है : "आज हिंदीभाषी भारत के देहातों को समझने के लिए प्रेमचंद के पास जाना पर्याप्त नहीं है। भैरवप्रसाद गुप्त, मार्कण्डेय, शिवप्रसाद सिंह और रेणु भी आपको उसका पूरा पता नहीं दे पाएँगे। इसके लिए आपको संजीव, शिवमूर्ति, नीरज सिंह, विजयकांत, मिथिलेश्वर और विजयदान देथा की कहानियाँ ही पढ़नी पड़ेंगी। आज़ादी से आज तक के कस्बों-शहरों-नगरों के सामान्य जन के हर्ष और विषाद, सपने और कुंठाएँ, आशाएँ और हताशाएँ आपको भीष्म साहनी, शेखर जोशी, काशीनाथ सिंह, दूधनाथ सिंह, हृदयेश, रमेश उपाध्याय, आलमशाह ख़ान, असग़र वजाहत, अब्दुल बिस्मिल्लाह और उदय प्रकाश, अरुण प्रकाश आदि में ही मिलेंगी। यहाँ कमलेश्वर, मोहन राकेश, राजेन्द्र यादव से काम नहीं चलेगा। निर्मल वर्मा से तो हरगिज़ नहीं।"स्वयं प्रकाश, इक्यावन कहानियाँ, समय प्रकाशन, नयी दिल्ली, संस्करण-2017, पृष्ठ-4 (भूमिका)। प्रकाशित कृतियाँ कहानी संग्रह- मात्रा और भार, 1975 (लोकसंपर्क प्रकाशन, जयपुर) सूरज कब निकलेगा, 1981 (प्रकाशन संस्थान, नयी दिल्ली) आसमाँ कैसे-कैसे, 1982 (प्रकाशन संस्थान, नयी दिल्ली) अगली किताब, 1988 (परिमल प्रकाशन, इलाहाबाद) आयेंगे अच्छे दिन भी, 1991 (राजकमल प्रकाशन, नयी दिल्ली) आदमी जात का आदमी, 1994 (किताबघर प्रकाशन, नयी दिल्ली) अगले जनम, 2002 (किताबघर प्रकाशन, नयी दिल्ली) संधान 2006 (वाणी प्रकाशन, नयी दिल्ली) छोटू उस्ताद, 2015 (किताबघर ्रकाशन, नयी दिल्ली) चयनित कहानियों के संकलन- आधार चयन कहानियाँ, 1994 (आधार प्रकाशन, पंचकूला) चर्चित कहानियाँ, 1995 (किताबघर प्रकाशन, नयी दिल्ली) पार्टीशन, 2002 (रचना प्रकाशन, जयपुर) दस प्रतिनिधि कहानियाँ, 2003 (किताबघर प्रकाशन, नयी दिल्ली) इक्यावन कहानियाँ, 2003 [द्वितीय मौलिक कहानी-संग्रह ('सूरज कब निकलेगा') से लेकर छठे संग्रह ('आदमी जात का आदमी') तक की लगभग सभी कहानियाँ; (समय प्रकाशन, नयी दिल्ली से प्रकाशित)] आधी सदी का सफरनामा, 2006 (पेंगुइन प्रकाशन, नयी दिल्ली) मेरी प्रिय कहानियाँ -2014 (राजपाल एंड सन्ज़, दिल्ली नीलकांत का सफर -2015 (अरु पब्लिकेशंस प्रा० लि०, दिल्ली) स्वयं प्रकाश की लोकप्रिय कहानियाँ -2016 (संपादक- माधव हाड़ा; प्रभात प्रकाशन, नयी दिल्ली) स्वयं प्रकाश : चुनी हुई कहानियाँ -2024 (सं. पल्लव, नयी किताब प्रकाशन, शाहदरा दिल्ली) संचयन- संचयन : स्वयं प्रकाश (तीन खंड) - सं. पल्लव (अनन्य प्रकाशन, शाहदरा दिल्ली) उपन्यास- जलते जहाज पर -1982 (प्रकाशन संस्थान, नयी दिल्ली) ज्‍योति रथ के सारथी -1987 (धरती प्रकाशन, बीकानेर) उत्तर जीवन कथा -1993 (परिमल प्रकाशन, इलाहाबाद) बीच में विनय -1994 (राजकमल प्रकाशन, नयी दिल्ली) ईंधन -2004 (वाणी प्रकाशन, नयी दिल्ली) निबन्ध- स्वान्त: दुःखाय -1983 (कृष्णा ब्रदर्स, अजमेर) दूसरा पहलू -1990 (परिमल प्रकाशन, इलाहाबाद) रंगशाला में एक दोपहर -2002 (सामयिक प्रकाशन, नयी दिल्ली) एक कहानीकार की नोटबुक -2010 (अंतिका प्रकाशन, गाजियाबाद) क्या आप साम्प्रदायिक हैं? -2011 (आस्था संस्थान, उदयपुर) नाटक- फीनिक्स -1980 (धरती प्रकाशन बीकानेर से; पुनः 'संभव प्रकाशन, कैथल, हरियाणा' से 2016 में प्रकाशित) रेखाचित्र- हमसफरनामा -2000 (रचना प्रकाशन, जयपुर से; परिवर्धित संस्करण अंतिका प्रकाशन, गाजियाबाद से 2010 में प्रकाशित) साक्षात्कार- और फिर बयां अपना -2009 (यश पब्लिकेशंस, दिल्ली) मेरे साक्षात्कार 2015 (किताबघर प्रकाशन, नयी दिल्ली) स्वयं प्रकाश (मोनोग्राफ), लेखक- डॉ० विश्वंभरनाथ उपाध्याय (राजस्थान साहित्य अकादमी से प्रकाशित) चर्चा (2007), संपादक- योगेंद्र दवे (जोधपुर) का विशेषांक सम्बोधन (जनवरी-मार्च 2007), संपादक- कमर मेवाड़ी राग भोपाली (2007), संपादक- शैलेंद्र शैली (भोपाल) बनास (प्रवेशांक 2008; 312 पृष्ठों का (अप्रैल 2017) लेखक- पल्लव, संपादक- किशन कालजयी (नयी दिल्ली) चौपाल (जनवरी-जून 2017) संपादक- कामेश्वर प्रसाद सिंह असम्भव के विरुद्ध : कथाकार स्वयं प्रकाश, प्रथम संस्करण-2018, सम्पादक- कनक जैन, (अमन प्रकाशन, कानपुर) साम्य (साम्य पुस्तिका-18) संपादक- विजय गुप्त सम्मान राजस्थान साहित्य अकादमी पुरस्कार विशिष्ट साहित्यकार सम्मान वनमाली स्मृति पुरस्कार सुभद्राकुमारी चौहान पुरस्कार पहल सम्मान कथाक्रम सम्मान भवभूति अलंकरण बाल साहित्य अकादमी पुरस्कार 'प्यारे भाई रामसहाय' पर। सन्दर्भ श्रेणी:हिन्दी कथाकार श्रेणी:हिन्दी उपन्यासकार श्रेणी:हिन्दी गद्यकार