Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

चन्द्रयान

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

चन्द्रयान-1 Chandrayaan-1 CY1 2007 (cropped).jpg 275px चन्द्र ऑर्बिटर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन 2008-052A 33405 http://www.isro.gov.in/Spacecraft/chandrayaan-1 योजना: 2 वर्ष हासिल: 22 October 2008 00:52 28 August 2009 20:00 ymd , 1380 kg lb 22 अक्टूबर 2008, 00:52 यु.टी.सी ध्रुवीय उपग्रह प्रमोचन वाहन सी11 द्वितीय लॉन्च पैड, सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन 28 अगस्त 2009, 20:00 यु.टी.सी 19 मई 2009 चन्द्र केन्द्रीय कक्ष 200 km mi 200 km mi 1758 km mi us 0.0 selene orbiter चन्द्र 3,400 8 नवंबर 2008 चन्द्रयान कार्यक्रम चन्द्रयान-२ चन्द्रयान (अथवा चंद्रयान-१) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के चंद्र अन्वेषण कार्यक्रम के अंतर्गत द्वारा चंद्रमा की तरफ कूच करने वाला भारत का पहला अंतरिक्ष यान था।https://aajtak.intoday.in/story/chandrayaan-2-and-chandrayaan-1-differences-isro-moon-mission-full-details-question-answer-1-1117238.html चंद्रयान 1 और 2 में क्या फर्क, कैसे करेगा काम? आपके हर सवाल का जवाब यहां है... इस अभियान के अन्तर्गत एक मानवरहित यान को २२ अक्टूबर, २००८ को चन्द्रमा पर भेजा गया और यह ३० अगस्त, २००९http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2009/08/090829_chandrayan_fail_skj.shtml ३१ अगस्त २००९ चंद्रयान मिशन हुआ समाप्त तक सक्रिय रहा। यह यान ध्रुवीय उपग्रह प्रमोचन यान (पोलर सेटलाईट लांच वेहिकल, पी एस एल वी) के एक संशोधित संस्करण वाले राकेट की सहायता से सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र से प्रक्षेपित किया गया। इसे चन्द्रमा तक पहुँचने में ५ दिन लगे पर चन्द्रमा की कक्षा में स्थापित करने में १५ दिनों का समय लग गया।http://www.bbc.co.uk/hindi/science/story/2008/10/081022_chandrayaan_launched_vv.shtml २९ अक्टूबर २००८ चंद्रयान भेजा जाएगा 22 अक्टूबर को चंद्रयान ऑर्बिटर का मून इम्पैक्ट प्रोब (MIP) 14 नवंबर 2008 को चंद्र सतह पर उतरा, जिससे भारत चंद्रमा पर अपना झंडा लगाने वाला चौथा देश बन गया।http://economictimes.indiatimes.com/ET_Cetera/Tricolours_4th_national_flag_on_moon/articleshow/3714959.cms Tricolour's 4th national flag on Moon The Economic Times 15 November 2008 18 November 2008 https://web.archive.org/web/20090112054329/http://economictimes.indiatimes.com/ET_Cetera/Tricolours_4th_national_flag_on_moon/articleshow/3714959.cms 12 January 2009 चंद्रयान का उद्देश्य चंद्रमा की सतह के विस्तृत नक्शे और पानी के अंश और हीलियम की तलाश करना था। चंद्रयान-प्रथम ने चंद्रमा से १०० किमी ऊपर ५२५ किग्रा का एक उपग्रह ध्रुवीय कक्षा में स्थापित किया। यह उपग्रह अपने रिमोट सेंसिंग (दूर संवेदी) उपकरणों के जरिये चंद्रमा की ऊपरी सतह के चित्र भेजे। भारतीय अंतरिक्षयान प्रक्षेपण के अनुक्रम में यह २७वाँ उपक्रम था। इसका कार्यकाल लगभग २ साल का होना था, मगर नियंत्रण कक्ष से संपर्क टूटने के कारण इसे उससे पहले बंद कर दिया गया। चन्द्रयान के साथ भारत चाँद को यान भेजने वाला छठा देश बन गया था। इस उपक्रम से चन्द्रमा और मंगल ग्रह पर मानव-सहित विमान भेजने के लिये रास्ता खुला। हालाँकि इस यान का नाम मात्र चंद्रयान था, किन्तु इसी शृंखला में अगले यान का नाम चन्द्रयान-२ होने से इस अभियान को चंद्रयान-१ कहा जाने लगा। तकनीकी जानकारी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र 'इसरो' के चार चरणों वाले ३१६ टन वजनी और ४४.४ मीटर लंबे अंतरिक्ष यान चंद्रयान प्रथम के साथ ही ११ और उपकरण एपीएसएलवी-सी११ से प्रक्षेपित किए गए जिनमें से पाँच भारत के और छह अमरीका और यूरोपीय देशों के थे।http://thatshindi.oneindia.in/news/bizarre/2008/10/moon-mission-vv.html २९ अक्टूबर २००८ चाँद की ओर भारत का पहला क़दम 8 जुलाई 2009 https://web.archive.org/web/20090708043057/http://www.robotstxt.org/ dead इस परियोजना में इसरो ने पहली बार १० उपग्रह एक साथ प्रक्षेपित किए। द्रव्यमान - प्रक्षेपण के समय १३८० किलोग्राम और बाद में चन्द्रमा तक पहुँचने पर इसका वजन ५७५ किग्रा हो जाएगा। अपने इम्पैक्टरों को फेंकने के बाद ५२३ किग्रा। आकार- एक घन के आकार में जिसकी भुजाए १.५ मीटर लम्बी हैं। संचार- एक्स-बैंड ऊर्जा- ऊर्जा का मुख्य स्रोत सौर पैनल है जो ७०० वाट की क्षमता का है। इसे लीथियम-आयन बैटरियों में भर कर संचित किया जा सकता है। अध्ययन के विशिष्ट क्षेत्र स्थायी रूप से छाया में रहने वाले उत्तर- और दक्षिण-ध्रुवीय क्षेत्रों के खनिज एवं रासायनिक इमेजिंग। सतह या उप-सतह चंद्र पानी-बर्फ की तलाश, विशेष रूप से चंद्र ध्रुवों पर। चट्टानों में रसायनों की पहचान। दूरसंवेदन से और दक्षिणी ध्रुव एटकेन क्षेत्र (एसपीएआर) के द्वारा परत की रासायनिक वर्गीकरण, आंतरिक सामग्री की इमेजिंग। चंद्र सतह की ऊंचाई की भिन्नता का मानचित्रण करना। 10 केवी से अधिक एक्स-रे स्पेक्ट्रम और 5 मी (16 फुट) रिज़ॉल्यूशन के साथ चंद्रमा की सतह के अधिकांश स्टेरिओग्राफिक कवरेज का निरीक्षण। चंद्रमा की उत्पत्ति और विकास को समझने में नई अंतर्दृष्टि प्रदान करना। घटनाक्रम बुधवार २२ अक्टूबर २००८ को छह बजकर २१ मिनट पर श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र से चंद्रयान प्रथम छोड़ा गया। इसको छोड़े जाने के लिए उल्टी गिनती सोमवार सुबह चार बजे ही शुरू हो गई थी। मिशन से जुड़े वैज्ञानिकों में मौसम को लेकर थोड़ी चिंता थी, लेकिन सब ठीक-ठाक रहा। आसमान में कुछ बादल जरूर थे, लेकिन बारिश नहीं हो रही थी और बिजली भी नहीं चमक रही थी। इससे चंद्रयान के प्रक्षेपण में कोई दिक्कत नहीं आयी। इसके सफल प्रक्षेपण के साथ ही भारत दुनिया का छठा देश बन गया है, जिसने चांद के लिए अपना अभियान भेजा है।http://khabar.ndtv.com/2008/10/22065117/Moon-mission.html संग्रहीत प्रति 22 अक्तूबर 2008 23 अक्तूबर 2008 https://web.archive.org/web/20081023075051/http://khabar.ndtv.com/2008/10/22065117/Moon-mission.html dead इस महान क्षण के मौके पर वैज्ञानिकों का हजूम 'इसरो' के मुखिया जी माधवन नायर 'इसरो' के पूर्व प्रमुख के कस्तूरीरंगन के साथ मौजूद थे। इन लोगों ने रुकी हुई सांसों के साथ चंद्रयान प्रथम की यात्रा पर सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लगातार नजर रखी और एक महान इतिहास के गवाह बने। चंद्रयान के ध्रुवीय प्रक्षेपण अंतरिक्ष वाहन पीएसएलवी सी-११ ने सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र से रवाना होने के १९ मिनट बाद ट्रांसफर कक्षा में प्रवेश किया। ११ पेलोड के साथ रवाना हुआ चंद्रयान पृथ्वी के सबसे नजदीकी बिन्दु (२५० किलोमीटर) और सबसे दूरस्थ बिन्दु (२३, ००० किलोमीटर) के बीच स्थित ट्रांसफर कक्षा में पहुंच गया। दीर्घवृताकार कक्ष से २५५ किमी पेरिजी और २२ हजार ८६० किमी एपोजी तक उठाया गया था। गुरुवार २३ अक्टूबर २००८ को दूसरे चरण में अंतरिक्ष यान के लिक्विड इंजिन को १८ मिनट तक दागकर इसे ३७ हजार ९०० किमी एपोजी और ३०५ किमी पेरिजी तक उठाया गया। शनिवार २५ अक्टूबर २००८ को तीसरे चरण के बाद कक्ष की ऊंचाई बढ़ाकर एपोजी को दोगुना अर्थात ७४ हजार किमी तक सफलतापूर्वक अगली कक्षा में पहुंचा दिया गया। इसके साथ ही यह ३६ हजार किमी से दूर की कक्षा में जाने वाला देश का पहला अंतरिक्ष यान बन गया।http://www.bhaskar.com/2008/10/26/0810260547_chandrayan1.html 29 अक्टूबर 2008 दूसरी कक्षा में चंद्रयान 29 अक्तूबर 2008 https://web.archive.org/web/20081029073400/http://www.bhaskar.com/2008/10/26/0810260547_chandrayan1.html dead सोमवार २७ अक्टूबर २००८ को चंद्रयान-१ ने सुबह सात बज कर आठ मिनट पर कक्षा बदलनी शुरू की। इसके लिए यान के ४४० न्यूटन द्रव इंजन को साढ़े नौ मिनट के लिए चलाया गया। इससे चंद्रयान-१ अब पृथ्वी से काफी ऊंचाई वाले दीर्घवृत्ताकार कक्ष में पहुंच गया है। इस कक्ष की पृथ्वी से अधिकतम दूरी १६४,६०० किमी और निकटतम दूरी ३४८ किमी है।http://www.bhaskar.com/2008/10/27/0810270858_chandrayan-1.html 29 अक्टूबर 2008 गहरे अंतरिक्ष में पहुंचा चंद्रयान -१ 28 अक्तूबर 2008 https://web.archive.org/web/20081028184734/http://www.bhaskar.com/2008/10/27/0810270858_chandrayan-1.html dead बुधवार २९ अक्टूबर २००८ को चौथी बार इसे उसकी कक्षा में ऊपर उठाने का काम किया। इस तरह यह अपनी मंजिल के थोड़ा और करीब पहुंच गया है। सुबह सात बजकर ३८ मिनट पर इस प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। इस दौरान ४४० न्यूटन के तरल इंजन को लगभग तीन मिनट तक दागा गया। इसके साथ ही चंद्रयान-१ और अधिक अंडाकार कक्षा में प्रवेश कर गया। जहां इसका एपोजी (धरती से दूरस्थ बिंदु) दो लाख ६७ हजार किमी और पेरिजी (धरती से नजदीकी बिंदु) ४६५ किमी है। इस प्रकार चंद्रयान-1 अपनी कक्षा में चंद्रमा की आधी दूरी तय कर चुका है। इस कक्षा में यान को धरती का एक चक्कर लगाने में करीब छह दिन लगते हैं। इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमान नेटवर्क और अंतरिक्ष यान नियंत्रण केंद्र, ब्यालालु स्थित भारतीय दूरस्थ अंतरिक्ष नेटवर्क एंटीना की मदद से चंद्रयान-1 पर लगातार नजर रखी जा रही है। इसरो ने कहा कि यान की सभी व्यवस्थाएं सामान्य ढंग से काम कर रही हैं। धरती से तीन लाख ८४ हजार किमी दूर चंद्रमा के पास भेजने के लिए अंतरिक्ष यान को अभी एक बार और उसकी कक्षा में ऊपर उठाया जाएगा।http://in.jagran.yahoo.com/news/national/general/5_1_4946216.html 29 अक्टूबर 2008 मंजिल के और करीब पहुंचा चंद्रयानअगस्त 2021 InternetArchiveBot शनिवार ८ नवंबर २००८ को चन्द्रयान भारतीय समय अनुसार करीब 5 बजे सबसे मुश्किल दौर से गुजरते हुए चन्दमाँ की कक्षा में स्थापित हो गया। अब यह चांद की कक्षा में न्यूनतम 504 और अधिकतम 7502 किमी दूर की अंडाकार कक्षा में परिक्रमा करगा। अगले तीने-चार दिनों में यह दूरी कम होती रहेगी। शुक्रवार १४ नवंबर २००८ वैज्ञानिक उपकरण मून इंपैक्ट प्रोब (एमआईपी) को चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्र में शाकेल्टन गड्ढे के पास छोड़ दिया। एमआईपी के चारों ओर भारतीय ध्वज चित्रित है। यह चांद पर भारत की मौजूदगी का अहसास कराएगा। शनिवार २९ अगस्त २००९ चंद्रयान-1 का नियंत्रण कक्ष से संपर्क टूट गया। रविवार ३० अगस्त २००९ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने चंद्रयान प्रथम औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया। चंद्र पानी की खोज २४ सितंबर २००९ को साइंस (पत्रिका) ने बताया कि चंद्रयान पर चंद्रमा खनिजोग्य मैपर (एम 3) ने चंद्रमा पर पानी की बर्फ होने की पुष्टि की है।http://www.sciencemag.org/cgi/content/abstract/sci;1178658v1 Character and Spatial Distribution of OH/H2O on the Surface of the Moon Seen by M3 on Chandrayaan-1 15 September 2009 26 September 2009 Science Mag सदी की सबसे महान उपलब्धि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन [इसरो] ने दावा किया कि चांद पर पानी भारत की खोज है। चंद्रमा पर पानी की मौजूदगी का पता चंद्रयान-1 पर मौजूद भारत के अपने मून इंपैक्ट प्रोब [एमआईपी] ने लगाया। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के उपकरण ने भी चांद पर पानी होने की पुष्टि की है। चंद्रमा पर पानी की मौजूदगी का पता भारत के अपने एमआईपी ने लगाया है। चंद्रयान-1 के प्रक्षेपण के करीब एक पखवाड़े बाद भारत का एमआईपी यान से अलग होकर चंद्रमा की सतह पर उतरा था। उसने चंद्रमा की सतह पर पानी के कणों की मौजूदगी के पुख्ता संकेत दिए थे। चंद्रयान ने चांद पर पानी की मौजूदगी का पता लगाकर इस सदी की महत्वपूर्ण खोज की है। इसरो के अनुसार चांद पर पानी समुद्र, झरने, तालाब या बूंदों के रूप में नहीं बल्कि खनिज और चंट्टानों की सतह पर मौजूद है। चंद्रमा पर पानी की मौजूदगी पूर्व में लगाए गए अनुमानों से कहीं ज्यादा है। आंकड़े का सार्वजनिक प्रदर्शन चंद्रयान-1 द्वारा इकट्ठा किए गए आंकड़े वर्ष 2010 के अंत तक जनता के लिए उपलब्ध कराए गए थे। आंकड़े को दो सत्रों में विभाजित किया गया था जिसमें पहले सत्र 2010 के अंत तक सार्वजनिक हो गया था और दूसरा सत्र 2011 के मध्य तक सार्वजनिक हो गया था। आंकड़ो में चंद्रमा की तस्वीरें और चंद्रमा की सतह के रासायनिक और खनिज मानचित्रण के आंकड़े शामिल हैं।http://www.space-travel.com/reports/Data_From_Chandrayaan_Moon_Mission_To_Go_Public_999.html Data From Chandrayaan Moon Mission To Go Public 6 September 2010 10 September 2010 Space-Travel 9 सितंबर 2010 https://web.archive.org/web/20100909142705/http://www.space-travel.com/reports/Data_From_Chandrayaan_Moon_Mission_To_Go_Public_999.html dead चंद्रयान-2 चंद्रयान-2 thumb| right| 200px| चंद्रयान २ के लैंडर मॉड्यूल का चित्रण 18 सितंबर २००८ को, प्रथम मनमोहन सिंह ने मिशन को मंजूरी दी। अंतरिक्षयान का डिजाइन अगस्त २००९ में पूरा हुआ, जिसमें दोनों देशों के वैज्ञानिकों ने एक संयुक्त समीक्षा की। हालांकि इसरो ने चंद्रयान२ के प्रति शेड्यूल के लिए पेलोड को अंतिम रूप दिया, मिशन को जनवरी 2013 में स्थगित कर दिया गया और २०१६ को पुनर्निर्धारित किया गया क्योंकि रूस समय पर लैंडर विकसित करने में असमर्थ था रोस्कोसमोस बाद में मार्स में फोबोस-ग्रंट मिशन की विफलता के कारण वापस ले लिया, क्योंकि फ़ुबोस-ग्रंट मिशन से जुड़े तकनीकी पहलुओं का उपयोग चंद्र परियोजनाओं में भी किया गया था, जिनकी समीक्षा किए जाने की आवश्यकता थी। जब रूस ने २०१५ तक भी लैंडर प्रदान करने में असमर्थता का हवाला दिया, तो भारत ने चंद्र मिशन को विकसित करने का फैसला किया जिसकी समीक्षा करने की आवश्यकता है। जब रूस ने २०१५ तक भी लैंडर प्रदान करने में असमर्थता का हवाला दिया, तो भारत ने चंद्र मिशन को स्वतंत्र रूप से विकसित करने का निर्णय लिया। 2018 के तहत तैयारी के तहत दूसरा चरण, चंद्रमा पर नरम-लैंडिंग में सक्षम अंतरिक्ष यान को शामिल करेगा और अतिरिक्त माप लेने के लिए एक ऑर्बिटर के साथ चंद्र सतह पर एक रोबोट रोवर को भी तैनात करेगा। चंद्रयान -2 को 14 जुलाई २०१९ को लॉन्च किया जाना था। लेकिन लॉन्च को तकनीकी मुद्दों के कारण लॉन्च से 56 मिनट पहले अंतिम क्षणों में बंद कर दिया गया था। इसे बाद में 22 जुलाई, 2019 को जीएसएलवी एमके ३ रॉकेट पर लॉन्च किया गया था। 6 सितंबर, २०१९ को लगभग 1:53 बजे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, इसरो, मिशन कंट्रोल ने यान के साथ सभी संपर्क खो दिया, जबकि जमीन पर उतरने का प्रयास किया। संपर्क खो जाने पर चंद्रमा की सतह से 2.1 किमी की ऊंचाई पर होने का अनुमान लगाया गया था। बाहरी कड़ियाँ चंद्र अभियान (चन्द्रयान) https://web.archive.org/web/20091219142813/http://hindi.webdunia.com/news/news/chand/ 19 दिसंबर 2009 (वेबदुनिया) Offical Homepage of Chandrayaan-1 Chandrayaan-1 Mission Profile https://web.archive.org/web/20080519195325/http://solarsystem.nasa.gov/missions/profile.cfm?MCode=Chandrayaan 19 मई 2008 by NASA's Solar System Exploration Chandrayaan-1 Announcement of Opportunity and home page from ISRO Video Overview of chandrayaan mission https://web.archive.org/web/20071015044928/http://chandrayaan.wordpress.com/2007/04/24/video-how-will-be-mission/ 15 अक्तूबर 2007 European Space Agency to cooperate with India's first lunar mission NSSDC Chandrayaan-1 page https://web.archive.org/web/20070821072425/http://nssdc.gsfc.nasa.gov/database/MasterCatalog?sc=CHANDRYN1 21 अगस्त 2007 M3 fact sheet https://web.archive.org/web/20081028210746/http://aviris.jpl.nasa.gov/html/m3factsheet.pdf 28 अक्तूबर 2008 space.com: U.S. radar on Chandrayaan-1? Chandrayaan-II - ISRO plans moon rover https://web.archive.org/web/20070914233140/http://www.hindu.com/2007/01/04/stories/2007010401342200.htm 14 सितंबर 2007 SPACE.COM Moonbase: In the Dark On Lunar Ice The case for Chandrayaan Chandrayaan News and Forum Chandrayaan Animation by Thejes on YouTube Download High Resolution Chandrayaan Animation by Thejes https://web.archive.org/web/20081026132112/http://www.thejes.com/chandrayaan.html 26 अक्तूबर 2008 चन्द्रयान : उद्देश्य, सम्भावनाएँ और भविष्य https://web.archive.org/web/20081024185057/http://www.tarakash.com/200810201946/Science/all-about-chandrayaan-india-isro.html 24 अक्तूबर 2008 From launch to landing - Indian moon mission's journey सन्दर्भ श्रेणी:अंतरिक्ष परियोजना श्रेणी:अंतरिक्ष श्रेणी:हिन्दी विकि डीवीडी परियोजना श्रेणी:भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन श्रेणी:चंद्र अंतरिक्षयान श्रेणी:चंद्रयान परियोजना श्रेणी:भारत के चन्द्र अभियानों की सूची श्रेणी:हिन्दी सम्पादनोत्सव के अंतर्गत बनाए गए लेख