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तम्बाकू का स्वास्थ्य पर प्रभाव
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तम्बाकू के स्वास्थ्य पर प्रभाव से आशय तम्बाकू उत्पादों (जैसे सिगरेट, बीड़ी, सिगार, हुक्का तथा चबाने वाला तम्बाकू) के सेवन से मानव शरीर पर पड़ने वाले शारीरिक और मानसिक प्रभावों से है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार तम्बाकू का उपयोग विश्व-भर में रोके जा सकने वाली मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार प्रत्येक वर्ष लाखों लोगों की मृत्यु तम्बाकू-जनित रोगों के कारण होती है।
अंगूठाकार|मानव शरीर पर तम्बाकू का असर
संयुक्त राष्ट्र की एक ख़बर अनुसार यह एक सकारात्मक प्रवृत्ति है कि तम्बाकू का सेवन करने वालों की संख्या वर्ष २००० में १ अरब ३८ करोड़ से घटकर वर्ष २०२४ में लगभग १ अरब २० करोड़ रह गई है।विश्व स्वास्थ्य संगठन: तम्बाकू उपयोग में गिरावट, पर अभी भी चुनौती बरकरार https://news.un.org/hi/story/2025/10/1087024 संयुक्त राष्ट्र समाचार 2025 hi 15 फरवरी 2026
रासायनिक घटक
तम्बाकू के धुएँ में लगभग ७० से अधिक रासायनिक पदार्थ पाए जाते हैं, जिनमें से अनेक विषैले तथा कैंसरकारी माने जाते हैं। प्रमुख घटकों में निकोटिन, टार, कार्बन मोनोऑक्साइड, फॉर्मल्डिहाइड, बेंजीन, अमोनिया और आर्सेनिक जैसे तत्व शामिल हैं।
निकोटिन तम्बाकू का मुख्य सक्रिय घटक है, जबकि टार धुएँ में उपस्थित कणीय अवशेष है। कार्बन मोनोऑक्साइड एक रंगहीन एवं गंधहीन गैस है, जो दहन प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न होती है। इसके अतिरिक्त तम्बाकू के प्रसंस्करण और जलने की प्रक्रिया में विभिन्न नाइट्रोसामीन और अन्य कार्बनिक यौगिक भी बनते हैं।
मौखिक तम्बाकू उत्पादों में भी अनेक रासायनिक यौगिक पाए जाते हैं, जिनकी संरचना और मात्रा उत्पाद के प्रकार के अनुसार भिन्न हो सकती है।
तम्बाकू की लत
तम्बाकू धूम्रपान
तंबाकू की लत धूम्रपान तथा धूम्ररहित तंबाकू उत्पादों दोनों से विकसित हो सकती है।
धूम्रपान की लत मुख्यतः निकोटिन नामक रासायनिक पदार्थ के कारण विकसित होती है, जो तंबाकू उत्पादों में पाया जाता है। निकोटिन एक अत्यधिक नशा उत्पन्न करने वाला मनो-सक्रिय पदार्थ है, जो मस्तिष्क में डोपामिन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर के स्तर को प्रभावित करता है। डोपामिन आनंद और संतुष्टि की अनुभूति से संबंधित होता है। जब कोई व्यक्ति धूम्रपान करता है, तो निकोटिन कुछ ही सेकंड में मस्तिष्क तक पहुँच जाता है और अस्थायी सुखद अनुभूति उत्पन्न करता है। यही प्रभाव बार-बार धूम्रपान करने की प्रवृत्ति को बढ़ाता है।
समय के साथ शरीर निकोटिन का अभ्यस्त हो जाता है और समान प्रभाव प्राप्त करने के लिए अधिक मात्रा की आवश्यकता पड़ती है। इस प्रक्रिया को सहनशीलता (टॉलरेंस) कहा जाता है। यदि धूम्रपान अचानक बंद कर दिया जाए तो चिड़चिड़ापन, बेचैनी, एकाग्रता में कमी, अनिद्रा, भूख में परिवर्तन और तीव्र इच्छा (क्रेविंग) जैसे लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं। इन्हें निकोटिन वापसी लक्षण (विथड्रॉअल सिम्पटम्स) कहा जाता है।
धूम्रपान की लत केवल रासायनिक निर्भरता तक सीमित नहीं है। इसके साथ व्यवहारिक और मनोवैज्ञानिक कारक भी जुड़े होते हैं। कई लोग तनाव, चिंता, अवसाद या सामाजिक परिस्थितियों के प्रभाव में धूम्रपान शुरू करते हैं। मित्रों या परिवार के सदस्यों द्वारा धूम्रपान किया जाना भी इसकी शुरुआत में भूमिका निभा सकता है। कुछ मामलों में धूम्रपान दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बन जाता है, जैसे भोजन के बाद या कार्य-विराम के दौरान।Tobacco
https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/tobacco
World Health Organization
15 फरवरी 2026
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वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, किशोरावस्था में धूम्रपान प्रारंभ करने वाले व्यक्तियों में लत विकसित होने की संभावना अधिक होती है, क्योंकि इस आयु में मस्तिष्क का विकास जारी रहता है। इसके अतिरिक्त, आनुवंशिक प्रवृत्ति भी निकोटिन निर्भरता में योगदान दे सकती है।
धूम्रपान की लत से मुक्ति संभव है, किंतु इसके लिए प्रायः बहु-आयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है। परामर्श, निकोटिन प्रतिस्थापन उपचार (जैसे निकोटिन गम या पैच), औषधीय उपचार तथा व्यवहारिक चिकित्सा प्रभावी मानी जाती हैं। सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों और चेतावनी संदेशों का उद्देश्य भी इसी लत को कम करना है।
धूम्रपान के स्वास्थ्य प्रभाव
धूम्रपान मानव स्वास्थ्य पर व्यापक और गंभीर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। तंबाकू के धुएँ में अनेक विषैले रसायन उपस्थित होते हैं, जिनमें से कई कैंसरकारी (कार्सिनोजेन) माने जाते हैं। धूम्रपान का सीधा संबंध फेफड़ों के कैंसर, मुख एवं गले के कैंसर, स्वरयंत्र के कैंसर तथा अग्नाशय के कैंसर से पाया गया है।
धूम्रपान हृदय तथा रक्तवाहिनी तंत्र को भी प्रभावित करता है। यह उच्च रक्तचाप, हृदयाघात, स्ट्रोक तथा धमनियों के संकुचन (एथेरोस्क्लेरोसिस) के जोखिम को बढ़ाता है। लंबे समय तक धूम्रपान करने वालों में क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिज़ीज़ (सीओपीडी) और वातस्फीति (एम्फ़ीसीमा) जैसी फेफड़ों की बीमारियाँ सामान्यतः देखी जाती हैं।
धूम्रपान प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर देता है, जिससे शरीर संक्रमणों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है और घाव भरने की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है। अनुसंधानों के अनुसार, नियमित धूम्रपान करने वालों की औसत जीवन प्रत्याशा धूम्रपान न करने वालों की तुलना में कम होती है।
रोकथाम और नियंत्रण
तंबाकू के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए वैश्विक तथा राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न नीतियाँ, कानून और सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम लागू किए गए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार तंबाकू उपयोग विश्व में रोकी जा सकने वाली मृत्यु का एक प्रमुख कारण है, जिसके कारण प्रतिवर्ष लाखों लोगों की मृत्यु होती है।Tobacco https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/tobacco World Health Organization 15 February 2026 इसी कारण तंबाकू नियंत्रण को सार्वजनिक स्वास्थ्य की प्राथमिकता माना गया है।
सन् 2005 में विश्व स्वास्थ्य संगठन के "तंबाकू नियंत्रण रूपरेखा अभिसमय" (WHO Framework Convention on Tobacco Control - FCTC) को लागू किया गया, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र की पहली वैश्विक संधि मानी जाती है।WHO Framework Convention on Tobacco Control https://fctc.who.int WHO FCTC 15 February 2026 इस अभिसमय के अंतर्गत सदस्य देशों को तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन, प्रायोजन और प्रचार पर प्रतिबंध लगाने, सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध लागू करने, पैकेटों पर चित्रात्मक स्वास्थ्य चेतावनी अनिवार्य करने तथा अवैध व्यापार को नियंत्रित करने जैसे उपाय अपनाने की अनुशंसा की गई है।
तंबाकू उत्पादों पर कर वृद्धि को तंबाकू नियंत्रण का सबसे प्रभावी उपायों में से एक माना जाता है। अनुसंधानों से संकेत मिलता है कि मूल्य में वृद्धि से तंबाकू की खपत में कमी आती है, विशेषकर किशोरों और निम्न आय वर्ग के लोगों में।Tobacco Control and Taxation https://www.worldbank.org/en/topic/tobacco World Bank 15 February 2026 उच्च कर नीति न केवल उपभोग घटाने में सहायक होती है, बल्कि सरकारों के लिए राजस्व का स्रोत भी बनती है, जिसे स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश किया जा सकता है।
इसके अतिरिक्त, जन-जागरूकता अभियान, विद्यालय-आधारित स्वास्थ्य शिक्षा कार्यक्रम, मीडिया के माध्यम से चेतावनी संदेश तथा सामुदायिक पहल भी रोकथाम की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। तंबाकू छोड़ने में सहायता के लिए परामर्श सेवाएँ, निकोटिन प्रतिस्थापन उपचार (जैसे गम और पैच) तथा औषधीय उपचार उपलब्ध कराए जाते हैं। कई देशों में तंबाकू निषेध हेल्पलाइन और विशेष परामर्श केंद्र स्थापित किए गए हैं, जो उपयोगकर्ताओं को लत से मुक्ति में सहयोग प्रदान करते हैं।
इस प्रकार तंबाकू की रोकथाम और नियंत्रण के लिए नीतिगत, सामाजिक तथा व्यक्तिगत स्तर पर समन्वित प्रयास आवश्यक माने जाते हैं।
सन्दर्भ
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श्रेणी:धूम्रपान से नुक़सान