Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

फ्रेड्रिक बेजर

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

जुलाई 2026 फ्रेडरिक बाजेर Frederik Bajer by E. Møller.jpg 21 अप्रैल 1837 नेस्टवेड, डेनमार्क 22 जनवरी 1922 कोपेनहेगन, डेनमार्क डैनिश शांतिवाद, राजनीति, शिक्षा अंतर्राष्ट्रीय शांति ब्यूरो, डैनिश शांति समाज नोबेल शांति पुरस्कार (1908) फ्रेडरिक बाजेर (21 अप्रैल 1837 – 22 जनवरी 1922) एक अत्यंत प्रख्यात और विश्वविख्यात डैनिश लेखक, शिक्षक, राजनीतिज्ञ और शांतिवादी नेता थे, जिन्हें पूरे यूरोप में शांति आंदोलनों को संगठित करने और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता को बढ़ावा देने के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है।नोबेल पुरस्कार समिति: फ्रेडरिक बाजेर के प्रामाणिक तथ्य वर्ष 1908 में उन्हें वैश्विक शांति के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व और अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान के लिए स्वीडन के क्लास पोंटस अर्नोल्डसन के साथ संयुक्त रूप से नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।द न्यूयॉर्क टाइम्स: 1908 का नोबेल शांति पुरस्कार समाचार यह महान सम्मान उन्हें 'अंतर्राष्ट्रीय शांति ब्यूरो' की स्थापना करने और विभिन्न देशों के बीच उत्पन्न होने वाले राजनीतिक विवादों को युद्ध के बजाय शांतिपूर्ण कानूनी तरीकों व कूटनीति से सुलझाने की ऐतिहासिक वकालत करने के लिए प्रदान किया गया था।एन्साइक्लोपीडिया ब्रिटानिका: फ्रेडरिक बाजेर का विस्तृत जीवन परिचय उनका यह अत्यंत महत्वपूर्ण राजनीतिक और सामाजिक कार्य आधुनिक अंतरराष्ट्रीय संबंधों, मध्यस्थता प्रणालियों और यूरोपीय शांति संधियों को स्पष्ट रूप से समझने में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर माना जाता है।नोबेल फाउंडेशन: फ्रेडरिक बाजेर की आधिकारिक जीवनी प्रारंभिक जीवन और शिक्षा उनका जन्म 21 अप्रैल 1837 को डेनमार्क के नेस्टवेड नामक एक अत्यंत प्रमुख और ऐतिहासिक नगर में एक पादरी के परिवार में हुआ था। उनके प्रारंभिक जीवन का परिवेश काफी हद तक धार्मिक, नैतिक और अनुशासित था, जिसने उनके चरित्र को मजबूत बनाने में एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।प्रोजेक्ट गुटेनबर्ग: ऐतिहासिक शांति साहित्य और पुस्तकें उन्होंने शुरुआत में एक सैन्य अधिकारी बनने की उच्च शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 1856 में डैनिश सेना में एक युवा अधिकारी के रूप में भर्ती हुए। उन्होंने वर्ष 1864 में डेनमार्क और प्रुशिया के बीच छिड़े अत्यंत भयंकर युद्ध में भी एक सैन्य अधिकारी के रूप में सक्रिय रूप से भाग लिया था। इस भयंकर युद्ध की विनाशलीला, व्यापक रक्तपात और निर्दोष नागरिकों की असीम पीड़ा को अत्यंत निकट से देखने के बाद उनका हृदय पूरी तरह से परिवर्तित हो गया। इस युद्ध की विभीषिका ने उनके बाल मन और आंतरिक चेतना पर इतना गहरा प्रभाव डाला कि उन्हें यह दृढ़ विश्वास हो गया कि युद्ध कभी भी किसी अंतरराष्ट्रीय समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता है। इसके पश्चात उन्होंने सेना छोड़ने का एक अत्यंत साहसिक और ऐतिहासिक निर्णय लिया। उन्होंने वर्ष 1865 में सेना से पूरी तरह से त्यागपत्र दे दिया और अपना पूरा जीवन वैश्विक शांति के प्रसार, सामाजिक सुधारों और अंतरराष्ट्रीय भाईचारे के लिए समर्पित कर दिया। पुरस्कार और सम्मान अंतरराष्ट्रीय कूटनीति, कूटनीतिक मध्यस्थता और वैश्विक शांति के क्षेत्र में उनके इस ऐतिहासिक और अभूतपूर्व प्रयासों के लिए उन्हें वर्ष 1908 में नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया।संयुक्त राष्ट्र संघ: शांति और सुरक्षा का वैश्विक मंच इस महान पुरस्कार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके द्वारा किए गए कार्यों को एक नई और अत्यधिक प्रतिष्ठित मान्यता प्रदान की। वे केवल एक राजनेता और संगठनकर्ता नहीं थे, बल्कि एक अत्यंत उत्कृष्ट और प्रभावशाली लेखक भी थे। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के इतिहास, तटस्थता और स्कैंडिनेवियाई देशों की राजनीति पर कई महत्वपूर्ण पुस्तकें और शोध पत्र लिखे, जिन्होंने पूरे यूरोप में शांति आंदोलन को एक नया और अत्यंत मजबूत वैचारिक आधार प्रदान किया। उन्होंने अपने नोबेल पुरस्कार की संपूर्ण धनराशि को भी अंतर्राष्ट्रीय शांति ब्यूरो और अन्य शांतिवादी गतिविधियों के लिए पूरी तरह से दान कर दिया था। 22 जनवरी 1922 को 84 वर्ष की अत्यंत परिपक्व आयु में डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में उनका शांतिपूर्ण निधन हो गया, परंतु वैश्विक शांति के जगत में उनका अमूल्य योगदान सदा के लिए अमर रहेगा। इन्हें भी देखें नोबेल शांति पुरस्कार क्लास पोंटस अर्नोल्डसन डेनमार्क सन्दर्भ 2