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411 समाचार
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मुल्ताई

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मुलताई (Multai) भारत के मध्य प्रदेश राज्य के बैतूल ज़िले में स्थित एक नगर है। == विवरण == मुलताई को मूलतापी के नाम से भी जाना जाता हैं। यह शहर पृथ्वी की प्रथम नदी सुर्यपुत्री सलीला माँ ताप्ती का उद्गम स्थल हैं। मान्यता यह हैं की माँ ताप्ती का जन्म मुलताई के वर्तमान निर्मित सरोवर से हुआ है। मुलताई के निकट प्रभात पट्टन तहसील और इसका जिला बैतूल है। यह मुलताई मध्य-प्रदेश के दक्षिणी क्षेत्रों में आता है और सतपुड़ा पठार क्षेत्र का लगभग आधा क्षेत्र इसके अन्तर्गत्त आता है। नगर के कई गांवों के फ़ैलाव सहित सतपुड़ा क्षेत्र में उत्तरी ओर नर्मदा घाटी और दक्षिण के मैदानों के बीच काफ़ी फ़ैला हुआ है। इसके पश्चिमी ओर निमार (पूर्वी) और अमरावती जिलों के बीच वन क्षेत्र का विस्तार है। यह नगर ताप्ती नदी के उत्तरी तट पर स्थित है और इस नदी का मूलस्थान भी है।मुलताई का मूल नाम मूलतापी था,जिसको पुनः रखने की घोषणा मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने की। तापी नदी के उद्गम या मूलस्थान होने के कारण पड़ा था। मराठा एवं ब्रिटिश राज के समय मुलताई क्षेत्रीय मुख्यालयों में से एक रहा है और जो उत्तर में जिला मुख्यालय से और दक्षिण में महाराष्ट्र के नागपुर जिला मुख्यालय को जोड़ता था। == यातायात == मुलताई अपने पड़ोसी क्षेत्रों से भली-भांति रेल एवं सड़क मार्गों द्वारा जुड़ा हुआ है। निकटतम विमानक्षेत्र नागपुर है जो 120 किमी दूर है एवं मुलताई से बस एवं टैक्सी सेवाओं द्वारा जुड़ा हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्ग ४७ और राष्ट्रीय राजमार्ग ३४७ यहाँ से गुज़रते हैं। == भूगोल == मुलताई की भौगोलिक निर्देशांक स्थित 21.77°N 78.25°E / 21.77; 78.25 है। यहां की औसत ऊंचाई 749 मीटर (2457 फ़ीट) है। मुलताई के उत्तर में आमला और दक्षिण में महाराष्ट्र का अमरावती जिला है। इसके पूर्व में छिंदवाड़ा जिला और पश्चिम में बैतूल हैं। नगर की दक्षिणी सीमा मेलघाट शृंखला की तराई में फ़ैली है, किन्तु अमरावती के हट्टी घाट एवं चिकल्दा इसकी सीमा से बाहर हैं। नगर जम्बादी से ६ किमी, सण्डिया से ७ किमी, सिरसावाड़ी से ७ किमी, कर्पा से ८ कि.मी, नरपा से ९ कि.मी है। ये यहां के मुख्य ग्राम हैं। मुलताई कस्बे के दक्षिण में प्रभात पट्टन तहसील, उत्तर में आमला तहसील, दक्षिण में वरूड़ तहसील एवं पूर्व में पांढुर्णा जिला स्थित हैं। मुलताई भारत की बड़ी नदी ताप्ती का उद्गम होने के कारण एक हिन्दू धामिक क्षेत्र भी है। हिन्दू मान्यता अनुसार ताप्ती माता भगवान सूर्य की पुत्री हैं। ताप्ती माता के यहां दो प्रमुख मन्दिर हैं एक प्राचीन मन्दिर और एक नवीन मन्दिर। ताप्ती नदी की जयन्ती के दिन यहां अखण्ड सप्तमी ताप्ती जन्मोत्सव मनाय़ा जाता है और शहर को सजाय़ा जाता है। इसके अलावा यहां कई भगवान शिव, हनुमान आदि हिन्दू भगवानों के मन्दिर भी हैं। == जनसांख्यिकी == 2001 के अनुसार [update] के भारतीय जनगणना अनुसार, मुल्ताई कस्बे की कुल जनसंख्या २१,४२८ है। इसमें ५२% पुरुष एवं ४८% स्त्रियां हैं। यहां की साक्षरता दर ७४% है जो राष्ट्रीय दर ५९.५% से कहीं अधिक है। इनमें पुरुष साक्षरता दर ७९% एवं स्त्री साक्षरता दर ६८% हैं। यहां की १३% जनसंख्या ६ वर्ष की आयु से कम की है। == संस्कृति == नगर में बहुरंगी संस्कृति दिखाई देती है जिसका कारण यहां कई धर्म एवं परम्पराओं का संगम है। जिले के उत्तरी भाग में बुन्देलखंडी भाषा एवं संस्कृति की झलक दिखाई देती है तो दक्षिणी क्षेत्रों में मराठी भाषा एवं संस्कइतु बहुल है। शेष जिला मुख्यतः जनजातीय क्षेत्र है जिनमें गोंड एवं कोरकू मुख्य हैं जो बाबा महादेव को पूजते हैं तथा अनेक अंधविश्वासों एवं प्रथाओं के साथ पशु बलि तक देते हैं। ये लोग अभी तक प्राकृतिक चिकित्सा एवं जड़ी-बूटियों पर ही निर्भर हैं। मुलताई में मेघनाथ का मेला लगता है यहां के मुख्य धर्मों में हिन्दू धर्म आता है, जिसके साथ ही यहां मुस्लिम, सिख, जैन एवं ईसाई लोग भी रहते हैं। प्रमुख हिंदू जातियों में भार्गव (ब्राह्मण),अग्रवाल,खंडेलवाल,मिश्रा, शर्मा,गुप्ता,भोयर पवार/पवार, राजपूत, कुर्मी, कुन्बी हैं। इसके अलावा गोंड, भील, कोरकू आदि है । बोली जाने वाली भाषाओं में हिन्दी, पवारी/भोयरी , मराठी, गोंडी एवं कोरकू हैं। == ताप्ती नदी == सूर्यपुत्री माँ ताप्ती नदी उद्गम स्थल मुलताई बैतूल जिला एवं मध्यप्रदेश में पर्यटन का मुख्य केन्द्र है। सूर्य पुत्री पुण्य सलिला ताप्ती का पौराणिक महत्व अपार है। मान्यता है कि ताप्ती जल से दिवंगत परिजनों के लिए तर्पण करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। पितृपक्ष के दौरान महाराष्ट्र प्रदेश के साथ अन्य नगरों से भी बड़ी संख्या में लोग ताप्ती सरोवर पर तर्पण करने पहुंचते है। == इन्हें भी देखें == बैतूल ज़िला == सन्दर्भ ==