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रेंडो माझी
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रेण्डो माझी ରେଣ୍ଡୋ ମାଝି उर्लादानी, कालाहांडी 10 दिसंबर 1855 कालाहांडी फाँसी कंध आंदोलन आदिवासी नेता, स्वतंत्रता सेनानी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन
रेण्डो माझी ( मृत्यु: 10 दिसंबर 1855) ओड़िशा के कालाहांडी क्षेत्र के एक आदिवासी नेता और स्वतंत्रता सेनानी थे। वे 1853–1855 के कंध आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक थे। उन्होंने ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन तथा उसके प्रशासनिक हस्तक्षेप के विरुद्ध कंध आदिवासियों का नेतृत्व किया।Rendo Majhi https://cmsadmin.amritmahotsav.nic.in/district-reopsitory-detail.htm?4814= Azadi Ka Amrit Mahotsav भारत सरकार, संस्कृति मंत्रालय 11 सितंबर 2026
भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय से संबद्ध अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान की पुस्तक Tribal Movement & Freedom Fighters of Odisha में कालाहांडी के कंध आंदोलन (1853–1855) का नेतृत्व रेण्डो माझी द्वारा किया जाना दर्ज है।Tribal Movement & Freedom Fighters of Odisha https://repository.tribal.gov.in/handle/123456789/75254 Tribal Research Institute Repository Scheduled Castes and Scheduled Tribes Research and Training Institute, Odisha 11 सितंबर 2026
प्रारंभिक जीवन
रेण्डो माझी का जन्म कालाहांडी क्षेत्र के उर्लादानी गाँव में हुआ था। सरकारी अभिलेख उन्हें कंध समुदाय से संबंधित बताते हैं। वे कालाहांडी के पहाड़ी और वनवासी क्षेत्रों में रहने वाले कंध लोगों के बीच एक स्थानीय नेता के रूप में उभरे।
उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य में कालाहांडी क्षेत्र में ब्रिटिश प्रशासन का प्रभाव बढ़ रहा था। वन, भूमि, राजस्व और स्थानीय सामाजिक व्यवस्था से संबंधित औपनिवेशिक नीतियों ने कंध समुदाय में असंतोष पैदा किया। कंध समुदाय अपनी पारंपरिक भूमि, स्थानीय स्वायत्तता और जीवन-पद्धति को लेकर विशेष रूप से संवेदनशील था।
कंध आंदोलन
रेण्डो माझी का नाम कालाहांडी के 1853–1855 के कंध आंदोलन से जुड़ा है। जनजातीय आंदोलन और स्वतंत्रता सेनानियों पर प्रकाशित सरकारी सामग्री में इस आंदोलन को कालाहांडी के कंध प्रतिरोध के रूप में वर्णित किया गया है।
ब्रिटिश प्रशासन कंध समुदाय की कुछ पारंपरिक प्रथाओं, विशेषकर मेरिया (मानव बलि) की प्रथा, को समाप्त करने का प्रयास कर रहा था। इसके साथ ही औपनिवेशिक प्रशासन द्वारा वन और भूमि संबंधी नियंत्रण तथा राजस्व व्यवस्था में परिवर्तन से भी कंध समुदाय प्रभावित हुआ।
1853 में ब्रिटिश अधिकारी लेफ्टिनेंट मैकनील ने रेण्डो माझी को गिरफ्तार किया। सरकारी विवरण के अनुसार उन्हें बिना मुकदमे के रासलकंडा जेल में रखा गया। उनकी गिरफ्तारी के बाद कंध समुदाय में असंतोष और प्रतिरोध और अधिक तीव्र हो गया।
गिरफ्तारी और आंदोलन का विस्तार
1855 में लेफ्टिनेंट मैकनील रेण्डो माझी को लोहे की जंजीरों में बाँधकर कंध क्षेत्रों में ले गया। इसका उद्देश्य अन्य कंध नेताओं में भय उत्पन्न करना था। किंतु उनके साथ किए गए इस व्यवहार ने कंध समुदाय के बीच आक्रोश को और बढ़ा दिया।
ओड़िशा सरकार की Odisha Review में प्रकाशित ऐतिहासिक सामग्री में भी उल्लेख मिलता है कि रेण्डो माझी से संबंधित कंध समूहों ने दिसंबर 1855 में ब्रिटिश शिविर पर आक्रमण किया था। इसमें बोरीकिया और कुटिया कंध समूहों की भागीदारी का उल्लेख किया गया है।Odisha Review अगस्त 2007 Government of Odisha
उर्लादानी का संघर्ष
10 दिसंबर 1855 को कंध विद्रोहियों ने उर्लादानी में लेफ्टिनेंट मैकनील के शिविर पर आक्रमण किया। ब्रिटिश सैनिकों ने गोलीबारी की, जिसमें अनेक कंध विद्रोही मारे गए। मैकनील को खोंडमहल के तहसीलदार दीनबंधु पटनायक की सहायता से वहाँ से निकलने में सफलता मिली।
जनजातीय कार्य मंत्रालय से संबद्ध प्रकाशन के अनुसार, संघर्ष के बाद ब्रिटिश अधिकारियों ने रेण्डो माझी को फाँसी दे दी और इसके साथ कालाहांडी में उस चरण का कंध आंदोलन दबा दिया गया।
मृत्यु
रेण्डो माझी को 10 दिसंबर 1855 को फाँसी दी गई। भारत सरकार द्वारा प्रकाशित Tribal Leaders of India में भी उनकी मृत्यु की तिथि 10 दिसंबर 1855 और मृत्यु का कारण फाँसी बताया गया है। उसी प्रकाशन में उन्हें ब्रिटिश शासन के विरुद्ध अपने साहसिक प्रतिरोध के लिए स्मरण किए जाने का उल्लेख है।Tribal Leaders of India – Rendo Majhi https://amritkaal.nic.in/flip-book/Tribal-Freedom-Fighters.pdf भारत सरकार 11 सितंबर 2026
विरासत
रेण्डो माझी को कालाहांडी के आदिवासी प्रतिरोध और ओड़िशा के प्रारंभिक औपनिवेशिक-विरोधी आंदोलनों के प्रमुख नेताओं में गिना जाता है। भारत सरकार के डिजिटल जिला अभिलेख में उन्हें कालाहांडी के कंध विद्रोह का नेता तथा स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े आदिवासी सेनानी के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
कालाहांडी जिला प्रशासन भी रेण्डो माझी को जिले के उल्लेखनीय व्यक्तित्वों में शामिल करता है और उन्हें ओड़िशा के स्वतंत्रता सेनानी के रूप में वर्णित करता है।About Us – Kalahandi District https://kalahandi.odisha.gov.in/en/about-district/about-us Kalahandi District, Government of Odisha 11 सितंबर 2026 सितंबर 2026 InternetArchiveBot
उनकी स्मृति में भवानीपटना स्थित सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल का नाम शहीद रेण्डो माझी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रखा गया है।Saheed Rendo Majhi Medical College and Hospital https://srmmch.odisha.gov.in/ Government of Odisha 11 सितंबर 2026 10 मई 2026 https://web.archive.org/web/20260510200828/https://srmmch.odisha.gov.in/ dead
यह भी देखें
कालाहांडी ज़िला
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
भारत सरकार — रेण्डो माझी
Tribal Research Institute — Tribal Movement & Freedom Fighters of Odisha
कालाहांडी जिला प्रशासन — About District सितंबर 2026 InternetArchiveBot
शहीद रेण्डो माझी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, भवानीपटना
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