411 REFERENCE · Wikipedia
धनदेव का अयोध्या अभिलेख
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
Dhanadeva Ayodhya inscription.jpg धनदेव का अयोध्या अभिलेख प्राचीन संस्कृत अभिलेख प्रस्तर संस्कृत ईसापूर्व प्रथम शताब्दी अयोध्या (उत्तर प्रदेश) रणोपाली आश्रम, श्री उदासीन संगत ऋषि आश्रम India center yes रणोपाली आश्रम, अयोध्या 26.783200 82.189087
__NOTOC__
धनदेव का अयोध्या अभिलेख एक प्राचीन प्रस्तर अभिलेख है जो ईसापूर्व पहली शताब्दी के भारतीय शासक धनदेव के काल की है। धनपाल देव राजवंश के राजा थे।P. K. Bhattacharyya Historical Geography of Madhyapradesh from Early Records https://books.google.com/books?id=njYpsvmr2dsC&pg=PA9 Motilal Banarsidass 978-81-208-3394-4 9 footnote 6Ashvini Agrawal Rise and Fall of the Imperial Guptas https://books.google.com/books?id=hRjC5IaJ2zcC&pg=PA126 1989 Motilal Banarsidass 978-81-208-0592-7 126 उन्होने कोशल राज्य के अयोध्या नगरी से शासन चलाया। धनदेव का नाम प्राचीन सिक्कों एवं अभिलेखों में मिलता है। श्री पी एल गुप्त के कथनानुसार, ईसापूर्व १३० ई से १५८ ई (ईसा पश्चात) की कालावधि में पन्द्रह शासकों ने अयोध्या से शासन संभाला जिसमें धनदेव भी सम्मिलित हैं। इन शासकों द्वारा प्रचलित सिक्के प्राप्त हुए हैं। इनके नाम ये हैं- मूलदेव, वायुदेव, विशाखदेव, धनदेव, अजवर्मन, संघमित्र, विजयमित्र, सत्यमित्र, देवमित्र, और आर्यमित्र। P.L. Gupta (1969), Conference Papers on the Date of Kaniṣka, Editor: Arthur Llewellyn Basham, Brill Archive, 1969, p.118 दिनेशचन्द्र सरकार ने इस अभिलेख का काल प्रथम शताब्दी (ईसा पश्चात) निर्धारित किया है। डी सी सरकार (1965), Select Inscriptions, Volume 1, 2nd Edition, pages 94-95 and footnote 1 on page 95 यह अभिलेख संस्कृत भाषा में लिखा है और संस्कृत में लिखे प्राचीनतम अभिलेखों में से एक है।
अभिलेख क्षतिग्रस्त अवस्था में है। इसमें सेनापति पुष्यमित्र शुंग और उसके उत्तराधिकारी 'धन-' का उल्लेख है। उसके द्वारा अश्वमेध यज्ञ करने का उल्लेख है।
कोसलाधिपेन द्विररश्वमेधयाजिनः सेनापतेः पुष्पमित्रसुंगस्य षष्ठेन कोशिकीपुत्रेण धनदेवेन धर्मराज्ञा पितुः फल्गुदेवस्य केतन कारितं।।
(अर्थ : दो अश्वमेध यज्ञ करने वाले सेनापति पुष्यमित्र सुंग के कौशिकीपुत्र कोसलाधिप धनदेव ने अपने पिता धर्मराज फल्गुदेव का केतन (ध्वज स्तम्भ) बनवाया।)
center|550px|thumb
यह अभिलेख अयोध्या से डेढ़ किमी दूर बने रणोपाली भवन में बाबा सन्तबख्श की समाधि के पूर्वी द्वार के चौखट-ललाट (सिरदल) से प्राप्त हुआ है। लगता है कि यह कहीं वहीं आसपास मिट्टी में दबा मिला होगा जिसे अनजाने में इस चौखट पर किया गया होगा। इसका उद्धार किसी इतिहास-संरक्षी व्यक्ति की दृष्टि पड़ने पर हुई होगी। भारतीय पुरालेखों का अध्ययन, पृष्ट १६९-१७० https://web.archive.org/web/20181110080517/https://books.google.co.in/books?id=iu9J0U2m2LsC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false 10 नवंबर 2018 (गूगल पुस्तक ; लेखक- शिव स्वरूप सहाय)
सन्दर्भ
इन्हें भी देखें
हाथीबाड़ा घोसुण्डी शिलालेख
नानाघाट अभिलेख
श्रेणी:भारतीय शासक