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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

संगीत मकरन्द

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सङ्गीत मकरन्द शास्त्रीय संगीत का एक प्राचीन ग्रन्थ है जिसके रचयिता नारद हैं। इस कृति में भरत मुनि से लेकर शार्ङ्गदेवतक के अन्य प्राचीन प्रतिष्ठित संगीतज्ञों के संगीत सम्बन्धी विचारों पर परिभाषाओं, विवरणों और टिप्पणियों का एक दुर्लभ संग्रह है। इसकी मुख्य विशेषता रागों का पुरुष, स्त्री और नपुंसक के रूप में वर्गीकरण है।http://aalaap.net/sangitamakaranda.html Sangita Makaranda https://web.archive.org/web/20081004200024/http://www.aalaap.net/sangitamakaranda.html 2008-10-04 2010-01-18 इस ग्रंथ की रचना आठवीं शताब्दी के लगभग हुई थी। इसके रचयिता नारद है । नारदीय शिक्षा भी इन्हीं की कृति है। संगीत मकरंद में रागों को चार दृष्टिकोण से विभाजित किया गया है- कम्पन, जाति, समय और प्रकार । कम्पन की दृष्टि से दो प्रकार के राग हैं- मुक्तांक कम्पन और कम्पनविहीन । जाति की दृष्टि से रागों के तीन वर्ग है- औडव, षाडव और सम्पूर्ण। गायन समय की दृष्टि से तीन विभाग है- प्रातर्गेय, मध्याह्नगेय और रात्रिगेय । प्रकार दृष्टि से रागों को स्त्री, पुरूष और नपुंसक वर्गों में बाँटा गया है। यह विभाजन उस समय के लिये बिल्कुल नया था जो सर्वप्रथम बार इसी ग्रन्थ में मिलता है। बाद के ग्रन्थाकारों ने इसी ग्रन्थ के बाद से राग-रागिनी वर्गीकरण मानना शुरू किया है। उसने 20 पुरुष राग, 24 स्त्री राग और 36 नपुंसक राग माने हैं। नाद की परिभाषा देते हुये उसने नाद के 5 प्रकार स्वीकार किये है- नखज, वायुज, चर्मज, लोहज और शरीरज। यद्यपि श्रुति की संख्या 22 मानी है लेकिन उनके नाम परम्परागत नामों से बिल्कुल भिन्न हैं। उसने 18 प्रकार की वीणा का वर्णन किया है। इन्हें भी देखें संगीत रत्नाकर बाहरी कड़ियाँ संगीत मकरन्द (सम्पादक - मंगेश रामकृष्ण तेलंग) संगीत मकरन्द (सम्पादक - मंगेश रामकृष्ण तेलंग) संगीत मकरन्द सन्दर्भ श्रेणी:हिन्दू ग्रन्थ श्रेणी:भारतीय संगीत