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रोशनलाल सुरिरवाला
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अंग्रेज़ी जनवरी 2026
January 2017
रोशनलाल सुरिरवाला हिन्दी साहित्य के श्रेष्ठ व्यंग्यकारों में से एक थे। उनका जन्म १० जनवरी १९३१ को सुरिर, मथुरा में हुआ। वे एक निम्न-मध्यवर्गीय परिवार से आए थे। शिक्षा के लिए वे अलीगढ़ आए, जहाँ उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर उपाधि तथा बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से पुस्तकालय-विज्ञान में डिप्लोमा प्राप्त किया। वे अलीगढ़ के श्री वृष्णेय महाविद्यालय में अपनी सेवानिवृत्ति तक पुस्तकालयाध्यक्ष के रूप में कार्यरत रहे। उनका निधन २००९ में अलीगढ़ में हुआ।
सुरिरवाला की प्रथम पत्नी का देहान्त विवाह के एक वर्ष के भीतर हो गया। उन्होंने पुनर्विवाह किया, परन्तु दहेज लेने से स्पष्ट इनकार किया—जो उस समय अत्यन्त साहसिक और आदर्शवादी निर्णय माना जाता था। उनके प्रारम्भिक साहित्यिक संस्कारों पर उनके मामा प्यारे लाल वृष्णी का गहरा प्रभाव था, जो उपन्यासकार तथा अलीगढ़ से प्रकाशित सामुदायिक पत्रिका बरहसेनी के सम्पादक थे। सुरिरवाला का प्रथम लेख बरहसेनी में प्रकाशित हुआ, जब वे केवल १९ वर्ष के थे। आगे चलकर उन्होंने अपने जीवन में तीन बार उसी पत्रिका का सम्पादन भी किया।
सुरिरवाला की प्रमुख कृतियों में हास्य–व्यंग्य–संग्रह पत्नी शरणं गच्छामि, खाट पर हजामत, भिश्ती और भस्मासुर, लँगड़ी भिन्न, शंख और मूर्ख, मंच के विक्रमादित्य, मूर्ख शिरोमणि, मेरी शोक सभा, ये मँगनेवाले, तथा घोड़ेवाला मेहमान सम्मिलित हैं; उपन्यास छोटी बहू, कायर; कहानी–संग्रह वैदेही; तथा नाटक बद्तमीज़ लोग। उनका अन्तिम प्रकाशित उपन्यास पतन के पंख था। गिट्टालेन अत्यन्त लघु कथाओं का संग्रह है। उनकी अधिकांश रचनाएँ प्रभात प्रकाशन तथा उसके सह-प्रकाशनों द्वारा प्रकाशित हुईं।
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श्रेणी:२००९ में निधन
श्रेणी:1931 में जन्मे लोग
श्रेणी:हिन्दी व्यंग्यकार