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परशुराम जयंती
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मार्च 2025
मार्च 2025
परशुराम जन्मोत्सव हिन्दू File:NarayanaTirumala27.JPG तिरुमाला में परशुराम की मूर्ति हिन्दू धर्म, मुख्यतः वैष्णवों में वैशाख शुक्ल पक्ष तृतीया (हिन्दू माह वैशाख का तीसरा दिन) 30 अप्रैल पूजा, उपवास, धर्मग्रंथों का पाठ, मंदिर अनुष्ठान, तीर्थयात्रा 1 दिन वार्षिक विष्णु का पृथ्वी पर अवतार और परशुराम के रूप में जन्म वैशाख हिन्दू कालदर्शक पर आधारित 10 मई 19 अप्रैल परशुराम जन्मोत्सव अक्षय तृतीया
परशुराम जन्मोत्सव हिंदू धर्म में भगवान विष्णु के छठे अवतार के रुप में मनाई जाती है। यह पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आता है, जिसे अक्षय तृतीया भी कहा जाता है।
तारीख और महत्व
परशुराम जन्मोत्सवषका हिंदू पंचांग के अनुसार तिथि हर वर्ष बदलती रहती है, लेकिन यह आमतौर पर अप्रैल या मई महीने में आती है। इस दिन को धर्म, शस्त्र और शास्त्र की आराधना का विशेष पर्व माना जाता है।
पूजा-विधि और परंपराएँ
व्रत एवं उपवास – भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और भगवान परशुराम की पूजा करते हैं।
भगवान परशुराम की प्रतिमा की स्थापना और अभिषेक – गंगाजल, दूध, पंचामृत आदि से अभिषेक किया जाता है।
शस्त्र पूजन – भगवान परशुराम को शस्त्रों का ज्ञाता माना जाता है, इसलिए इस दिन शस्त्रों की पूजा की जाती है।
हवन एवं कथा – कई स्थानों पर यज्ञ, हवन और भगवान परशुराम की कथा का आयोजन किया जाता है।
दान-पुण्य – इस दिन दान करने का विशेष महत्व होता है, विशेषकर ब्राह्मणों को भोजन कराना शुभ माना जाता है।
भारत में परशुराम जन्मोत्सव के आयोजन
उत्तर भारत – उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश में बड़े स्तर पर पूजा-पाठ और शोभायात्राएँ निकाली जाती हैं।
महाराष्ट्र – परशुराम जयंती विशेष रूप से कोकण और पुणे क्षेत्रों में हर्षोल्लास से मनाई जाती है।
दक्षिण भारत – कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल में भी परशुराम मंदिरों में विशेष अनुष्ठान होते हैं।
भगवान परशुराम जन्मोत्सव केवल एक धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि हिंदू संस्कृति में वीरता, धर्म और ज्ञान की आराधना का प्रतीक भी है।
सन्दर्भ
श्रेणी:हिन्दू पर्व